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भू-जलस्तर गिरा, 250 फीट खुदवाने के बाद भी ट्यूबवेल में नहीं निकला पानी

भास्कर संवाददाता | नरसिंहगढ़ क्षेत्र की हरियाली और बेहतर जलस्तर को लेकर खुश होने वाले नागरिकों के लिए यह एक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 26, 2018, 04:30 AM IST

भास्कर संवाददाता | नरसिंहगढ़

क्षेत्र की हरियाली और बेहतर जलस्तर को लेकर खुश होने वाले नागरिकों के लिए यह एक परेशान कर देने वाली खबर है। शहर में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। मंगलवार रात नगर पालिका ने सिविल मेहताब अस्पताल के सुलभ कांप्लेक्स में पानी की सप्लाई के लिए ट्यूबवेल खुदवाया था, लेकिन 250 फीट खोदने के बाद भी पानी नहीं निकला।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। कुछ दिन पहले शासकीय श्री विक्रम उत्कृष्ट विद्यालय में भी ट्यूबवेल इसी तरह नाकाम हो चुका है। खास बात यह है कि सभी ट्यूबवेल पीएचई की भूजल शाखा की ओके रिपोर्ट के बाद खोदे गए थे। इसके बाद भी जमीन में पानी का ना मिलना चिंता की बात है। अस्पताल के साथ ही नगर पालिका ने पंडित दीनदयाल उद्यान और श्री रामलला जी मंदिर के पास भी ट्यूबवेल खुदवाए थे, जिनमें से केवल एक में ही पानी निकला है। वह भी बहुत मामूली है।

एक वजह यह भी-छोटे तालाब के आसपास मेले वाले बाग का बड़ा हिस्सा सीमेंट से पाट दिया

बारिश के पानी को नहीं सहेजा

शहर का जल स्तर परशुराम सागर से सबसे ज्यादा निर्धारित होता है, आज की तारीख में पूरा तालाब एक कूड़ेदान की शक्ल ले चुका है। तालाब की तलहटी मलबे से भरी हुई है, जिससे बारिश का पानी जमीन में नहीं जा पाता है। रेन वाटर हारवेंस्टिंग सिस्टम को गंभीरता से ना लिया जाना भी जलस्तर घटने का बड़ा कारण है। ब्लॉक में जिले की सर्वाधिक बारिश हर साल होती है। अगर इस पानी को शत प्रतिशत सहेजकर जमीन में उतार दिया जाए तो जल स्तर को दोबारा पाया जा सकता है।

चिंता का विषय है,नए सिरे से सोचना होगा

शहर का घटता जल स्तर बड़ी चिंता का विषय है।इससे निपटने के लिए नए सिरे से सोचना होगा। विशेषज्ञों से बात चल रही है। -पवन अवस्थी ,सीएमओ, नपा परिषद कार्यालय, नरसिंहगढ़

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