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छोटे तालाब में पानी रहे इसलिए अब तक खर्च किए डेढ़ करोड़ रु., फिर भी है सूखा

Dainik Bhaskar

Apr 09, 2018, 05:40 AM IST

Narsinghgarh News - भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़ छोटा तालाब लगभग सूख चुका है। हर साल गर्मियों में यह स्थिति बनती है। पिछले सालों में...

छोटे तालाब में पानी रहे इसलिए अब तक खर्च किए डेढ़ करोड़ रु., फिर भी है सूखा
भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़

छोटा तालाब लगभग सूख चुका है। हर साल गर्मियों में यह स्थिति बनती है। पिछले सालों में नगरपालिका ने छोटे तालाब के विकास, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपया खर्च किया है, लेकिन तालाब के सीपेज को नहीं रोका जा सका। इसकी वजह से गर्मियों में इसके सूखने का सिलसिला बंद नहीं हो रहा है।

मुद्दा खास क्यों : छोटा तालाब वास्तव में 3 पहाड़ियों से आने वाले बारिश के पानी को इकट्ठा करने का स्रोत है। छोटा महादेव, गऊ घाटी और नादिया पानी से बारिश के दिनों में बहने वाले झरनों का पानी छोटा तालाब में ही इकट्ठा होता है। इससे आसपास के फूल बाग, चंपी मोहल्ला, लंकापुरी, बड़ा महादेव बस्ती और बलबटपुरा के क्षेत्रों का जलस्तर प्रभावित होता है।


अगर स्थानीय लोग सक्रिय होते तो आज तालाब सिकुड़ा हुआ नजर नहीं आता

छोटा तालाब का अधिकतर हिस्सा सूख चुका है।

परशुराम सागर में भी फैल रहा अतिक्रमण

शहर के बड़े जलाशय परशुराम सागर का भी स्पष्ट सीमांकन नहीं होने की वजह से इसके कई हिस्सों में अतिक्रमण हो चुका है। तालाब के 3 किनारे पक्के घाटों से बंधे हुए हैं, लेकिन भरतगढ़ मंदिर और थावरिया के पीछे वाले हिस्सों में कोई घाट नहीं है। इसकी वजह से तालाब की सीमा तय नहीं हो पाती है। इसी का फायदा उठाकर कहीं मलबा डालकर तालाब को पाट दिया गया है तो कई मकानों के बड़े हिस्से तालाब के अंदर तक बने हुए हैं।अभी तक नगरपालिका ने तालाब को सुरक्षित रखने के लिए सीमांकन नहीं किया है।

पर्यावरण संगठनों की भी सक्रियता चाहिए

छोटा तालाब का मुद्दा सीधे तौर पर शहर के जल स्तर और प्राकृतिक सौंदर्य से जुड़ा है। ऐसे में पर्यावरण संगठनों की सक्रियता भी इस मुद्दे पर जरूरी है। स्थानीय स्तर पर जागरूकता नहीं होने की वजह से लगभग दो दशक पहले तालाब के बलबटपुरा की ओर वाले हिस्से में अतिक्रमण भी हो गया। स्थानीय लोग या पर्यावरण संगठन सक्रिय होते तो आज तालाब सिकुड़ा नजर नहीं आता।

रिटेनिंग वाल का बनना जरूरी

छोटा तालाब के किनारे पर बने श्री रामलला जी मंदिर के पिछवाड़े में रिटेनिंग वाल का बनना जरूरी है। इससे दोहरा फायदा होगा। तालाब के पानी से मंदिर को हर साल बारिश में होने वाला नुकसान रोका जा सकेगा, साथ ही तालाब में से होने वाले पानी के रिसाव पर भी रोक लग सकेगी।

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