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पहले दिन निकलती है गेर, 4 दिन बाद खेलते हैं होली

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 04:40 AM IST

Nasrullaganj News - जिले में होली के पर्व का अपना एक अलग महत्व है। लोग अपने-अपने अंदाज में यहां इस पर्व को मनाते चले आ रहे हैं। कहीं एक से...

पहले दिन निकलती है गेर, 4 दिन बाद खेलते हैं होली
जिले में होली के पर्व का अपना एक अलग महत्व है। लोग अपने-अपने अंदाज में यहां इस पर्व को मनाते चले आ रहे हैं। कहीं एक से दो तो सीहोर में तीन दिन, आष्टा में पांच दिन तक होली का पर्व आज भी लोग मनाते चले आ रहे हैं। सालों पुरानी होली पर्व की परंपराएं आज भी चली आ रही हैं। जिले के सभी विकासखंडों में होली पर्व अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। यह नवाबी शासन काल से ही चला आ रहा हैैं।

गजकेसरी और सर्वार्थ सिद्धि योग में 150 से अधिक जगह पर हुआ होलिका दहन : होली का पर्व आज हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। गुरुवार रात को नगर में 150 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन हुआ। खास बात यह है कि गुरुवार को 100 साल बाद होलिका दहन के समय गज केसरी और सर्वार्थ सिद्धि योग में होली दहन किया गया। आज सभी लोग भाईचारे के साथ अबीर-गुलाल से होली खेलेंगे। त्यौहार को लेकर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।होली का हुड़दंग और उत्सव में उमंग। त्योहार का यह आनंद रासायनिक रंग फीका कर सकते हैं। इसलिए सामाजिक संस्थाओं ने इस वर्ष भी सूखे गुलाल से तिलक होली खेलने की अपील की है।

सजावट और कार्यक्रम भी हुए

गुरुवार शाम के समय होली स्थान के आसपास विद्युत तथा पुष्प सज्जा की गई। दहन से पूर्व कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी बच्चों ने दी। देर रात विधि-विधान से होलिका दहन किया गया। दहन के बाद महिलाएं भी होली की पूजन करने पहुंचेंगी।

अनूठा अंदाज

सीहोर जिले में होली उत्सव मनाने की है अनूठी परंपपराएं पर हर जगह होली का भरपूर उल्लास भी रहता है

सीहोर में 3 दिन होती है होली

सीहोर शहर में होली का पर्व तीन दिन मनाया जाता है। होली के दिन शोकाकुल परिवारों के यहां रंग डालने का दिन माना जाता है। इसके दूसरे दिन फिर लोग रंग खेलते हैं। रंग पंचमी के दिन जुलूस निकलता है और दिनभर लोग रंग खेलते हैं।

आष्टा में पांचों दिन होली

आष्टा नगर में पांचों दिन रंगपंचमी तक होली का पर्व मनाया जाता है। पहले दिन गेर में लोग शामिल होते हैं।

आदिवासी बहुल गांवों में डांडा गड़ते ही शुरु हो जाता है पर्व

इछावर विकासखंड के करीब 50 आदिवासी बहुल गांवों में डांडा गड़ते ही होली पर्व भगोरिया शुरु हो जाता है जिसका समापन होलिका दहन पर होता है। ।

रंगपंचमी पर ही रंग पर्व

नसरुल्लागंज, रेहटी में होली पर शोकाकुल परिवारों के यहां लोग रंग डालने जाते हैं। इसके बाद दूसरे दिन रंग नहीं खेला जाता है। अंतिम दिन रंगपंचमी के दिन ही रंग खेला जाता है।

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