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35 घंटे पहले जारी धारा 144 के आदेश का नहीं हो पा रहा पालन, धरना जारी

भास्कर संवाददाता | नसरुल्लागंज तहसील कार्यालय में चल रहा निर्वाचन कार्य परिसर में होने वाले धरना आंदोलनों से...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 03:30 AM IST
भास्कर संवाददाता | नसरुल्लागंज

तहसील कार्यालय में चल रहा निर्वाचन कार्य परिसर में होने वाले धरना आंदोलनों से बाधित हो रहा है। इसे देखते हुए एसडीएम ने 11 सितंबर को दोपहर 2 बजे तहसील परिसर में धारा 144 लागू कर दी थी। इधर ग्रामीणों की विभिन्न मांगों को लेकर किसान नेता अर्जुन आर्य परिसर में ही धरना दे रहा है। ऐसे में एसडीएम के आदेश पर 35 घंटे बाद भी अमल नहीं हो पाया है।

एसडीएम राजेश शुक्ला ने 11 सितंबर दोपहर 2 बजे तहसील परिसर में दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग कर संपूर्ण तहसील परिसर में धारा 144 लागू कर दी गई। इस आदेश के जारी होने के बावजूद भी तहसील प्रांगण में बीते तीन दिन से अर्जुन आर्य धरना प्रदर्शन कर रहा है जिससे उक्त आदेश का उल्लंघन हो रहा है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि दो माह के लिए परिसर में किसी भी प्रकार का जुलूस, धरना, प्रदर्शन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही 4 से अधिक व्यक्ति एकत्रित नहीं हो सकेंगे। यदि ऐसा होता है तो संबंधित के खिलाफ धारा 188 के तहत आपराधिक प्रकरण कायम कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों, अभिभाषकों व शासकीय कर्तव्य में लगाए सुरक्षा बलों पर लागू नहीं होगा। बावजूद इसके आदेश जारी होने के बाद 35 घंटे तक तहसील परिसर में किसान नेता अर्जुन आर्य का धरना आंदोलन कर रहा है।

आदेश नहीं मिला, उसे देख कार्रवाई करुंगा: इस संबंध में थाना प्रभारी जितेंद्र पटेल ने बताया कि मैं अभी सीहोर में हूं। मुझे आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। यदि आदेश जारी हो चुका है तो अर्जुन आर्य सहित किसी भी व्यक्ति द्वारा तहसील परिसर में धरना आंदोलन नहीं किया जा सकता। साथ ही कार्रवाई भी की जाएगी।

किन मांगों को लेकर दिया जा रहा धरना: किसान नेता अर्जुन आर्य कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। पट्टाधारी किसानों को पट्टों का वितरण, सनकोटा, मोगराखेड़ा आदि गांवों के बगैर पट्टाधारी किसानों की डेम में जो जमीन डूब रही है, उसका मुआवजा दिलाने तथा बगैर पट्टाधारी किसानों को उचित मुआवजा देने, ओलावृष्टि में बर्बाद हुई गेहूं चने का उचित मुआवजा देने की मांग की गई है। सोयाबीन का बीमा दिया गया, उसमें हमीदगंज, घोघरा, बाईंबोड़, चीचली छूट गए हैं।