• Hindi News
  • Madhya Pradesh
  • Neemuch
  • सुखानंद तीर्थ पर राजवंश ने जताया हक, कहा प्रतिमा मालिक, हम प्रबंधक
--Advertisement--

सुखानंद तीर्थ पर राजवंश ने जताया हक, कहा-प्रतिमा मालिक, हम प्रबंधक

Neemuch News - प्रसिद्ध सुखानंद तीर्थस्थल पर अठाना के राजवंश ने हक जताया है। राजवंश ने सुखानंद को पर्यटन स्थल बनाने के प्रशासन...

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2017, 04:20 AM IST
सुखानंद तीर्थ पर राजवंश ने जताया हक, कहा-प्रतिमा मालिक, हम प्रबंधक
प्रसिद्ध सुखानंद तीर्थस्थल पर अठाना के राजवंश ने हक जताया है। राजवंश ने सुखानंद को पर्यटन स्थल बनाने के प्रशासन द्वारा तैयार किए प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। तर्क दिया सुखानंद मंदिर की प्रतिमा यहां की संपत्ति की मालिक है और राजवंश प्रबंधक। इसे लेकर राजवंश हाईकोर्ट जाएंगे।

जिले के जावद विकासखंड के सुखानंद में ऋषि शुकदेव की तपस्थली है। यहां गूफा में शिव मंदिर है। यह 100 हेक्टेयर में फैला है। जंगल में मंदिर की 600 बीघा जमीन है। प्रशासन ने पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए एक करोड़ रुपए की योजना बनाई है। इस पर काम शुरू होते ही राजवंश ने आपत्ति ले ली। राजवंश के रावत जितेंद्रसिंह का कहना है ग्वालियर रियासत के समय मंदिर की जमीन और व्यवस्था अठाना राजवंश को सौंपी थी। दशकों से राजवंश ही यहां मेले, मंदिर और क्षेत्र का प्रबंधन करता था। अठाना जागीर में 40 गांव आते थे। 1952 में जागीरी प्रथा खत्म हुई और राजवंश की जागीरी खत्म हो गई। लेकिन सुखानंद मंदिर क्षेत्र राजवंश के प्रबंधन में रहा। 1954 में रावत किशन सिंह ने समझौते के तहत यहां लगने वाले मेले की व्यवस्था जावद पंचायत को सौंप दी। 1975 में तत्कालीन मंदसौर कलेक्टर ने अपने नाम रिकॉर्ड में चढ़ा दिया। रावत किशन सिंह ने तहसील न्यायालय में केस लगाया। कलेक्टर, धर्मस्व न्यायालय में केस चला लेकिन कलेक्टर का नाम नहीं हटा। 2013 में हाईकोर्ट इंदौर में याचिका लगाई जिस पर अभी सुनवाई होना है। इस बीच प्रशासन ने अचानक सुखानंद को पर्यटन स्थल बनाने पर काम शुरू कर दिया। इसके खिलाफ 15 जनवरी को हाईकोर्ट में स्टे के लिए याचिका दायर करेंगे।

हाईकोर्ट में खारिज हुआ था पुजारी का दावा

मंदिर की जमीन, मेले की व्यवस्था और संपत्ति पर पुजारी शिवदत्त गिरी ने हक जताते हुए हाईकोर्ट में केस लगाया था। 1972 में कोर्ट ने दावा खारिज कर दिया था। पुजारी के दावे को राजवंश और जावद पंचायत ने भी चुनौती दी थी। पुजारी के केस हारने के बाद प्रशासन ने राजवंश को प्रबंधक पद से हटाकर कलेक्टर का नाम चढ़ा दिया था।

हम जनहित में कर रहे हैं काम


राजवंश की ये हैं दो आपत्तियां

राजवंश ने सुखानंद को लेकर दो आपत्ति दर्ज कराई है। पहली सुखानंद में हम प्रबंधक हंै, प्रतिमा मालिक है फिर कलेक्टर का नाम प्रबंधक के रूप में कैसे चढ़ा। दूसरी केस जब हाईकोर्ट में चल रहा है। ऐसे में सुखानंद में निर्माण की तैयारी क्यों हो रही है।

सुखानंद में पहाड़ों के बीच स्थित मंदिर।

X
सुखानंद तीर्थ पर राजवंश ने जताया हक, कहा-प्रतिमा मालिक, हम प्रबंधक
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..