उपज मंडी में डेढ़ साल में ई- नीलामी नहीं हो पाई शुरू, लाखों रुपए के उपकरण पड़े बेकार / उपज मंडी में डेढ़ साल में ई- नीलामी नहीं हो पाई शुरू, लाखों रुपए के उपकरण पड़े बेकार

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 03:51 AM IST

Neemuch News - केंद्र शासन ने किसानों को उनकी उपज के सही दाम दिलाने व नीलामी में मध्यस्थता खत्म करने के लिए ई-मंडी तैयार करने की...

Mandsore News - e auction can not be started in one year and half in the produce market waste equipment worth lakhs of rupees
केंद्र शासन ने किसानों को उनकी उपज के सही दाम दिलाने व नीलामी में मध्यस्थता खत्म करने के लिए ई-मंडी तैयार करने की प्रक्रिया के पहले चरण में ऑनलाइन नीलामी शुरू करने के प्रयास शुरू किए। इसके लिए देश की कई मंडियों सहित मंदसौर मंडी में शासन ने लाखों रुपए के कम्प्यूटर व उपज की जांच के लिए लैब सामग्री भेजी। आज तक मंदसौर में ई-नीलामी शुरू नहीं हो पाई। व्यापारियों के अनुसार ई-नीलामी प्रक्रिया में उपज की जांच व ट्रांसपोर्ट की समस्या का समाधान नहीं होने से यह प्रक्रिया सफल नहीं हो पाई। अधिकारी व व्यापारी शासन स्तर से अागे के निर्देशों के मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

केंद्र सरकार ने डेढ़ साल पहले कृषि उपज मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए व किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ई-नीलामी की प्रोसेस शुरू की। इसके अंतर्गत मंडियों में किसान उपज को देश में किसी भी कौने में बैठे व्यापारी को बेच सकते हैं व व्यापारी कहीं से भी किसान का माल क्रय कर सकते हैं। प्रक्रिया में किसानों की उपज की मंडी में लैब में जांच की जाना होगी। इसमें उपज की नमी, ग्रेडिंग का आकलन कर डाटा को ऑनलाइन फीड किया जाना है। इनके अनुसार बाहर बैठा व्यापारी उपज की गुणवत्ता का पता लगाकर उसका मूल्यांकन कर मूल्य लगा सकते हैं। इसके लिए शासन ने मंडियों में कम्प्यूटर पहुंचाए, जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगवाए, यही नहीं उपज की जांच के लिए लाखों रुपए की मशीनें व सामग्रियां पहुंचाईं। मंदसौर कृषि उपज मंडी में भी कम्प्यूटर व मशीनें रखी हैं। हालांकि आज तक इनका उपयोग नहीं हो पाया। उपज की जांच के लिए तकनीकी दल नहीं होने व योजना में कई खामियां होने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। मंदसौर मंडी में अधिकारी ऑनलाइन नीलामी का दावा तो कर रहे लेकिन जानकारी मांगने पर आंकड़े नहीं बता रहे। इधर व्यापारियों के अनुसार मंडी व्यापारी महासंघ द्वारा विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन देने के बाद यह प्रक्रिया बंद है। चुनावों के कारण भी शासन स्तर से कोई नए निर्देश नहीं मिल रहे हैं। ऐसी स्थिति में करोड़ों रुपए की सामग्री मंडियों में बर्बाद हो रही है। ऑनलाइन नीलामी में कोई भी व्यापारी कहीं भी मंडी में ऑनलाइन किसानों का माल क्रय कर लेगा लेकिन वह माल उसे कैसे मिलेगा इसकी व्यवस्था नहीं हो पाई। चैन्नई के व्यापारी ने मंदसौर मंडी में लहसुन क्रय की तो वह माल उस तक कैसे पहुंचेगा इसकी व्यवस्था नहीं हो पाई।

मंदसौर कृषि उपज मंडी कार्यालय। यहां ऑनलाइन नीलामी के लिए लगे सिस्टम व लैब के उपकरण।
व्यापारियों का दबाव भी मुख्य कारण

इस व्यवस्था से छोटी जगह पर मंडी व्यापारियों की हालत खराब हो सकती है। जैसे वर्तमान में मंदसौर मंडी से सैकड़ों व्यापारी लहसुन, प्याज जैसी उपज का क्रय कर मुनाफे में मुंबई, पंजाब, बंगाल सहित देश के कोने-कोने में अन्य व्यापारियों को भेजते हैं। इस व्यवस्था से बाहर बैठे व्यापारी कम दामों में सीधे किसानों से उपज क्रय कर सकते हैं जिससे छोटी जगह पर व्यापारी खत्म हो जाते हैं। सूत्रों के अनुसार व्यापारियों के दबाव में शासन को कदम पीछे हटाने पड़े।

व्यापारी माल कैसे ले जाएगा




मामले की जानकारी नहीं




प्रायोगिक तौर पर जारी


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