‘अपने अंदर खोजेंगे तो पता चलेगा कि हम जीवन में कितनी गलतियां कर रहे’

Neemuch News - भास्कर संवाददाता | कुकड़ेश्वर “शासन मिला प्रभु का हमारा सौभाग्य है..आराधना हो ऐसी नहीं जन्म हो दुबारा’ मनुष्य के...

Nov 18, 2019, 08:56 AM IST
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भास्कर संवाददाता | कुकड़ेश्वर

“शासन मिला प्रभु का हमारा सौभाग्य है..आराधना हो ऐसी नहीं जन्म हो दुबारा’ मनुष्य के मन में प्रश्न उठता है कि दुनिया में क्यों आना पड़ता है बार-बार, जन्म क्यों लेना पड़ता है। उसके कारण की खोज करने के लिए थूल से सूक्ष्म की तरफ जाना पड़ता है। सूक्ष्म वह जड़ है वहा जाएंगे, भीतर खोजेंगे तो पता चलेगा कि हम जीवन में कितनी गलतियां कर रहे हैं।

यह बात साध्वी पूर्वी श्रीजी ने जैन धर्मशाला में कही। उन्होंने कहा कि जिन शासन की प्रभावना हमें मिल रही है, प्रभु हमें मार्ग बता रहे हैं। उचित मार्ग के लिए भगवान ने प्रतिक्रमण की व्यवस्था की है। क्या है प्रतिक्रमण प्रतिक्रमण से क्या होता है इसकी अनुभूति क्या होती है। मन में शांति की अनुभूति होगी। प्रतिक्रमण से प्रायश्चित होता है। हर भूल का सुधार होता है और कर्म कम होते हैं। आज जिंदगी में जो कुछ भी हो रहा है उसका कारण कौन? मानव स्वयं अगर उन दोषों को, उन गलतियों को देखें और स्वयं की ओर देखें तो विरोध प्रतिकार मन में नहीं रहेंगे, तो मन शांत रहेगा। अशांति का कारण ही नहीं आएगा। क्रोध उत्पन्न नहीं होंगे तो राग द्वेष नहीं रहेगा। हमें चिंतन करके मानव जीवन को सफल बनाना है। अपनी प्रवृत्तियों को बदल कर मन को शांत करना है, नहीं तो सामायिक, प्रतिक्रमण, संयम सब बेकार है, निरर्थक है। स्वयं के अंदर झांके एवं चिंतन करो तो हमारे जन्म-मरण के चक्कर से छुटकारा मिल सकता है। गुस्सा आने पर मोन धारण कर लो। साध्वी सुश्रीया श्रीजी सुंदर स्तन “सिद्ध अरिहंत में मन रमाते चलो सब कर्मों के बंद छुड़ाते चलो...सुनाते हुए कहा कि हमें चार क्षरण बड़ी मुश्किल से मिलती है। मनुष्यभव, जिनवाणी श्रवण, श्रवण कर श्रद्धा होना और संयम का पराक्रम करना यह भव हमें मिल गया है। इसकी वैल्यू नहीं समझ रहे हैं। जिस प्रकार एक अज्ञान व्यक्ति को चंदन का वन दे देते हैं तो वह चंदन की लकड़ी को जलाकर कोयले बेचता है। क्योंकि उसे चंदन की कीमत मालूम नहीं होती है। इसी प्रकार यह मानव जीवन चंदन के समान है। हमें मिला है लेकिन हम इसे यूं ही व्यर्थ गंवा रहे हैं। भोगो से तृप्ति होना संभव नहीं है। त्याग से मन तृप्त होता हैं। शांति के लिए आराधना की आवश्यकता होती है। जीवन में शांति होना आवश्यक है। श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे। शाखा प्रभारी मनोज खाबीया ने बताया कि रामपुरा से साध्वी श्रीजी कुकड़ेश्वर से पधारे है, जिनके धर्मसभा में प्रवचन हो रहे हैं।

नदी में सीधा घड़ा खाली रहता है, जब झुकता है तो पानी भर जाता है

द्वारकापुरी में धर्मसभा में साध्वी गुणरंजना श्रीजी ने कहा

नीमच | नदी में सीधा घड़ा खाली रहता है, जब झुकता है तो पानी भर जाता है। अपने उल्टे विचारों को सीधे करने होंगे तभी क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा। विनम्रता के साथ झुके बिना कल्याण नहीं होगा। जो झुकने के लिए सदैव तैयार रहे, वह अागे बढ़ेगा।

यह बात साध्वी गुणरंजना श्रीजी ने शक्तिनगर स्थित शंखेश्वर पार्श्व पदमावती धाम ट्रस्ट श्रीसंघ के तत्वाधान में द्वारिकापुरी स्थित रिखब भामावत के आवास पर धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा कि संसार के प्रत्येक प्राणी के प्रति संवेदना होना आवश्यक है। राम, कृष्ण, महावीर भी कह दे वह ईश्वर तत्व है, एक है। देवत्य जहां होती है वहां सम्पूर्ण प्रकृति का कल्याण हो जाता है। हर कार्य के लिए परिरम का पुरुषार्थ स्वयं करना पड़ता है, तभी सफलता मिलती है। श्रीराम सदैव झुकने के लिए तैयार थे, लेकिन रावण नहीं माना था। इसलिए युद्ध हुआ। रावण ने अंहकार किया तो समाप्त हो गया था। संत समाज कल्याण के लिए कठोर वाणी बोलते है, निजी स्वार्थ के लिए नहीं। रिखब, संजय, स्नेहलता भामावत सहित परिवारजन का श्रीसंघ पदाधिकारियों द्वारा सम्मान किया गया।

द्वारकापुरी में धर्मसभा को संबोधित करतीं साध्वी गुणरंजना श्रीजी व उपस्थित समाजजन।

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