‘अच्छा बोलकर लोगों का दिल जीतना चाहिए’

Neemuch News - भास्कर संवाददाता | कुकड़ेश्वर जरा तोलकर मीठा बोले कटु बोलने में कुछ सार नहीं है, सुई से कांटा निकल जाता है लेकिन...

Oct 12, 2019, 08:20 AM IST
भास्कर संवाददाता | कुकड़ेश्वर

जरा तोलकर मीठा बोले कटु बोलने में कुछ सार नहीं है, सुई से कांटा निकल जाता है लेकिन बोला गया कटु वचन नहीं निकलता। कब बोलना है, कैसा बोलना है, अपनी बात से सामने वाले को व अपनी आत्मा को भी शांति मिले, सब कुछ वाणी में है। वाणी वैभव व खजाना है। बोलकर दूसरों के दिल को जीतना है न कि दिल जलाना है। तुच्छ वाणी नहीं बोले, ना ही हल्की भाषा का प्रयोग करें। मेवाड़ की बोली को उच्च बोली बताया गया है। बोली से ही सारा कार्य होता है। बात-बात में किसी को हम पागल, अंधा, बहरा, काणा, गेला कह देते हैं। यह तुच्छ वाणी है। बोलना सहज है, चतुराई व निपुणता से बोले। यह बात जैन धर्मशाला में चातुर्मास धर्मसभा में साध्वी प्रेमलता श्रीजी ने कही। राजेंद्र जैन, मनोज खाबिया, विनोद जोधावत, तेजकरण सोनी, रामचंद्र गंगवाल, प्रकाश जैन, अरुण जोधावत, सुभाष जैन, मनोहरसिंह छाजेड़, बसंत कुमार छाजेड़ उपस्थित थे। संचालन सतीश खाबीया ने किया।

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