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स्कूल के मैदान में ईंटों से आकृतियां बनाकर बच्चों को ज्यामितीय आकृतियां समझाईं

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 03:52 AM IST

Neemuch News - स्कूल के बोर्ड पर चाक से विद्यार्थियों को ज्यामितीय आकृतियां समझाई गई, महीनों प्रयास के बाद भी महज 25-30 फीसदी बच्चे...

Manasa News - mp news explain geometric figures to children by making shapes from bricks in school grounds
स्कूल के बोर्ड पर चाक से विद्यार्थियों को ज्यामितीय आकृतियां समझाई गई, महीनों प्रयास के बाद भी महज 25-30 फीसदी बच्चे ही आकृतियां पहचान पाए ताे स्कूल के शिक्षक ने अनोखा तरीका अपनाया। स्कूल मैदान में ईंटों से ज्यामितीय आकृतियां बनाई, इसमें पौधे रोेपे। खेल-खेल में बच्चों को आकृतियां याद कराई, पौधे में पानी देने पर भी आकृतियों के नाम लिए और छह महीने में सभी बच्चे ज्यामितीय आकृतियों के नाम सीख गए।

जिले के छोटे गांव कचौली के शासकीय माध्यमिक स्कूल में विद्यार्थियों को शिक्षक पढ़ाई कराते और बोर्ड पर सवालों के उत्तर लिखकर समझाते।बच्चों को बोर्ड पर ज्यामितीय आकृतियां और उससे संबंधित सवालों के उत्तर समझाए जाते थे। बच्चों का बेस लाइन टेस्ट लिया तो 25-30 फीसदी विद्यार्थी ही ज्यामितीय आकृतियां पहचान पाए। बच्चों को कई बार समझाने के बाद भी आकृतियां याद नहीं हो रही थी। इस पर शिक्षक रवींद्र बिसेन ने कुछ अलग ढंग से बच्चों को पढ़ाने की योजना बनाई। स्कूल के मैदान में बाउंड्रीवाल के पास ज्यामितीय आकृतियां बनाकर बच्चों को समझाने की योजना बनाई। बाउंड्रीवाल के पास कतार में त्रिभुज, चतुर्भुज, षटकोण, आयत, वर्ग के साथ सारी आकृतियां ईंटों से बनाई। हर आकृति में अलग-अलग पौधे रोपे गए और आकृतियों के माध्यम को बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। कभी बच्चे आकृतियों में लगे पौधों में पानी देते और बोलते मैंने त्रिभुज में, मैंने आयत में तो कोई कहता मैंने तो चतुर्भुज को पानी दिया। खेल-खेल में आकृतियां याद कराई। कौन पहले चतुर्भुज या त्रिभुज को हाथ लगाएगा। कभी आकृतियां के पास खड़े रहकर समझाया गया। इससे पढ़ाई के तीन महीने बाद बेस लाइन टेस्ट लिया तो 70 फीसदी बच्चों को सारी आकृतियां याद हो गई। दोपहर की छुट्टी या अवकाश के दिन भी बच्चे आकृतियों से खेलने लगे और छह बाद दिसंबर में टेस्ट लिया तो परिणाम सौ फीसदी आया। अब स्कूल के सारे बच्चे ही ज्यामितीय आकृतियां पहचानने लगे हैं।

कचौली के स्कूल मैदान में बनी आकृतियों से बच्चों को पढ़ाते शिक्षक रवींद्र बिसेन।

खेल-खेल में गणित और आंकड़ों की पढ़ाई कराई

विद्यार्थियों को ज्यामितीय आकृतियां याद होते देख गणित जैसा कठिन लगने वाला विषय भी खेल खेल में पढ़ाया जाने लगा और गणित की संख्या, आंकड़ों को विद्यार्थी याद करने लगे। विद्यार्थियों ने बताया अब तो आकृतियां हमारी दोस्त और गणित की संख्या हमारी मित्र। स्कूल में गणित दौड़, पब्बा, घोड़ा बादाम खाए पीछे देखे मार खाए जैसे खेल में गणित को पढ़ाया जाता है और हमें गणित आसान लगने लगा है।

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