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भ्रूण हत्या समाज के लिए कलंक है

2 वर्ष पहले
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भ्रूण हत्या हर समाज के लिए कलंक व अभिशाप है। जब पानी, हवा, अग्नि के एकंद्री जीव की रक्षा की बात करते है तो फिर भ्रूण हत्या रोकना भी मानवता है। इसके लिए हमें जागृत होना पड़ेगा। नहीं तो जीव हत्या का पाप नहीं रूकेगा।

यह बात साध्वी हर्षप्रिया श्रीजी ने जैन भवन में चातुर्मास धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा कि शरणागत की रक्षा करना धर्म है तो क्या वो भ्रूण हमारा शरणागत नहीं है? श्रीकृष्ण से किसी ने पूछा की आपने गीता में वचन दिया था कि धरती पर अत्याचार, भ्रष्टाचार बढ़ने पर में पुनर्जन्म लूंगा तो अब आप जन्म क्यों नहीं लेते? क्या आप अपना वचन भूल गए? श्रीकृष्ण ने कहा मुझे अपना वचन याद है मैं आज भी जन्म लेने को तैयार हूं। पहले तुम देवकी जैसी मां तो लाओ। मैं मेरी मां की सातवीं संतान था फिर भी मां ने मुझे जन्म दिया। आज की मां होती तो मुझे गर्भ से ही यमलोक पहुंचा देती। साध्वी श्रीजी ने कहा कि तीर्थंकरों ने पशु-पक्षी को बचाने अपने प्राणों की आहुति दे दी और कहां हम है कि अपना देह को सजाने-संवारने पशुओं की आहुति दे रहे हैं। सौंदर्य प्रसाधनों का त्याग करना चाहिए।

धर्मसभा संबोधित करतीं साध्वी हर्षप्रिया श्रीजी व उपस्थित समाजजन।

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