भक्ति की तपस्या व शक्ति से इंसान के कष्ट दूर होते हंै- विनोद भय्या

Neemuch News - भक्त द्वारा कलियुग में भगवान नाम का स्मरण करना ही मोक्ष का प्रथम द्वार है। भगवान नरसी भक्त की तपस्या भक्ति से...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 04:10 AM IST
Neemuch News - mp news humans are suffering from the penance and power of devotion vinod bhayya
भक्त द्वारा कलियुग में भगवान नाम का स्मरण करना ही मोक्ष का प्रथम द्वार है। भगवान नरसी भक्त की तपस्या भक्ति से प्रसन्न होकर कष्ट दूर कर देते थे, जो आज भी आर्दश है। नानीबाई के विवाह में श्रीकृष्ण ने 56 करोड़ का मायरा भरकर आर्थिक संकट गरीबी में भी भक्त की प्रतिष्ठा बचाई और संसार को भक्ति के प्रति विश्वास की प्रेरणा दी थी जो आधुनिक युग में भी शिक्षाप्रद है। आज भक्ति पीड़ित मानवता की सेवा में निहित है।

यह बात विनोद भय्या ने स्कीम नंबर 14 स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में संगीतमय नानीबाई का मायरा में कही। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति करने पर नरसी मेहता को वरदान में पांच वस्तु तुलसी माला, करताल घुघरू, टोपी, केदारो राग प्रदान किए। इसमें शिव द्वारा नरसी मेहता को गोलोक धाम के दर्शन भी करवाए। जैसा विश्वास नरसी ने भगवान कृष्ण पर किया हम भी भागवान पर भक्ति कर विश्वास रखे तभी जीवन का कल्याण होगा। नरसी की पुत्री नानीबाई का मायरा के लिए उनके पास धन नहीं था नरसी भक्त का मायरा भगवान में स्वयं भरा था। नरसी भक्त की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। बैलगाड़ी टूटी हुई थी, नरसी भक्त गरीब थे उनकी जगत हंसी करता था। नानीबाई बिना मां की बेटी थी, संसार स्वार्थ से भरा है समय का चक्र सदैव चलता है पहले मायरा की परम्परा में तीन दिन तक महिलाएं गीत गाती थी नरसी की बेटी नानीबाई को सासु मां, देरानी जेठानी ने ताने दिये थे। म्हारो सांवरियो आसी...भजन प्रस्तुत किए। महाराज ने नरसी जन्म, नानीबाई की पत्रिका लिखने, नरसी का जीवन परिचय आदि विषयों का विस्तार से वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया। महाआरती के प्रसाद वितरण किया गया।

नानीबाई का मायरा कथा से पहले निकली यात्रा में शामिल लोग।

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