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अगर आप श्रवणकुमार की मां बनना चाहती हैं तो पहले पति को श्रवणकुमार बनाएं : राष्ट्रसंत ललितप्रभजी
माता-पिता का असली बेटा वह होता है जो श्रवण कुमार बनकर उनकी सेवा किया करता है। अगर आपने अपने मां-बाप को भाग्य भरोसे छोड़ दिया है तो जरा सोचें जन्म देने के बाद उन्होंने भी आपको भाग्य के भरोसे छोड़ दिया होता तो आपका क्या हाल हो चुका होता। आप सातों वारों को सुखी और सफल बनाना चाहते हैं तो पहले अपने आठवें वार परिवार को सुखी बनाइए। जिसका आठवां वार परिवार सुखी है उसके सातों वार सदा सुखी रहते हैं। माताएं अगर श्रवणकुमार की मां बनना चाहती हैं तो पहले पति को श्रवणकुमार बनाएं।
यह बात राष्ट्रसंत ललितप्रभ महाराज ने स्टेशन रोड स्थित शगुन गार्डन में खरतरगच्छ श्रीसंघ द्वारा आयोजित प्रवचन माला के दौरान घर को कैसे स्वर्ग बनाएं विषय पर श्रद्वालुओं को संबोधित करते हुए कहीं। यहां संत के प्रवचनों से प्रभावित होकर कई लोगों ने नशे का आजीवन त्याग करने का संकल्प लिया। धर्मसभा में बहुओं से कहा कि जैसे आप चाहती हैं कि आपकी भाभी आपके भाई को मां से अलग ना करें और भाई-भाभी आपकी मां की सेवा करें तो पहले जरूरी है कि आप भी अपनी सासु मां की सेवा करें और अपने पति को उनसे अलग ना करें। आप प|ी बनने से पहले घर की कुलवधू या गृहलक्ष्मी बनें। अगर आप अपने सास-ससुर से अलग हो चुके हैं तो आज ही बड़प्पन दिखाकर उनको अपने पास बुलाकर ले आएं और उनकी सेवा करें। ताकि उन्हें मन में कभी यह ना आए कि हमने बेटे को पैदा ही क्यों किया। अगर आपके सास-ससुर को आप पर गर्व है तो समझ लेना आपका बहू बनना सार्थक हो गया।
संत ने कहा कि रिश्तों को बनाने में नहीं, अपितु निभाने में विश्वास रखिए। रिश्ते बनाना उतना ही आसान है जैसे मिट्टी से मिट्टी पर मिट्टी लिखना, पर रिश्तों को निभाना उतना ही कठिन है, जैसे पानी से पानी पर पानी लिखना। बचपन में हम सौ बार लड़ते थे, तो भी रिश्ता खत्म नहीं होता था। अब दूसरी बार लड़ने की नौबत नहीं आती, क्योंकि पहली लड़ाई में ही हम रिश्तों का खत्म कर देते हैं। रिश्तों की खूबसूरती बरकरार रखनी है तो बात मनवाने पर नहीं, समझाने पर जोर दीजिए। रिश्तों में अहंकार को पैदा मत होने दीजिए। एक दिन हम सब एक-दूसरे को सिर्फ यह सोचकर खो देंगे कि वह मुझे याद नहीं करता, तो मैं क्यों करूं।
शगुन गार्डन में समाजजन को संबोधित करते राष्ट्रसंत ललितप्रभजी।