रूठे पति-पत्नी फिर हुए एक, बुजुर्ग मां-बाप को बेटा हर माह बैंगलुरु से भेजेगा 50 हजार

Neemuch News - जिले की 18 खंडपीठों में शनिवार को नेशनल लोक अदालत शनिवारलगी। इसमें विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई हुई। कई रोचक...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:40 AM IST
Neemuch News - mp news rutha husband and wife will return to one elderly parents and children will be sent from bengaluru every month to 50 thousand
जिले की 18 खंडपीठों में शनिवार को नेशनल लोक अदालत शनिवारलगी। इसमें विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई हुई। कई रोचक मामले आए। सालों से लंबित केस में राजीनामा से निराकरण कर दाेनाें पक्षकारों को पौधे देकर उनकी देखरेख का संकल्प दिलाया।

जिला न्यायालय में सुबह 10 लोक अदालत शुरू हुआ। यहां 11 खंडपीठों में बैंक, बीमा, बिजली, आपराधिक प्रकरणों में से न्यायाधीशों की सबसे ज्यादा रुचि कुटुंब न्यायालय में पारिवारिक मामलों को निपटाने पर रही है। जिला जज हृदेश श्रीवास्तव व खंडपीठ के पीठासीन अधिकारी व प्रधान न्यायाधीश अखिलेश शुक्ला ने पति-प|ी व पिता-पुत्र के भरण पोषण के मामलों में दोनों पक्षों का समझाइश देकर समझौता करवाया। जिला जज ने इन्हें पौधे देकर कहा अब कोई गुस्सा नहीं करना और जब गुस्सा आए पौधे को पानी देने चलने जाना। इसी तरह जावद में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीतिराजसिंह सिसोदिया, रुप सिंह कनेल, सोनू जैन ने प्रकरणों पर सुनवाई की।

सर्वाधिक मामले में निपटाने पर जिला जज ने की सम्मानित करने की घोषणा- एडीआर भवन में जिला जज हृदेश ने कहा लोक अदालत के सर्वाधिक मामले निपटाने वाले न्यायाधीश, वकील व कर्मचारी को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया जाएगा। प्रधाानन्यायाधीश अखिलेश शुक्ला व विशेष न्यायाधीश आरपी शर्मा ने भी संबोधित किया।

बिना नोटिस व तारीख के दंपति आनंद व सपना ने कोर्ट पहुंचकर अपना राजीनामा करने पर उन्हें पौधा देकर सम्मानित किया।

बेटे को बैंगलुरु से बुलाया, जज ने समझाया तब राशि देने को हुआ तैयार

कुटुम्ब न्यायालय में विकास नगर निवासी भौमिक जैन वर्तमान में बैंगलुरु की एक निजी कंपनी में सवा लाख रुपए मासिक वेतन पर सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर है। उस पर आश्रित पिता रोशनलाल जैन व मां का दिसंबर 2018 से भरण पोषण नहीं कर रहा था। उन्होंने कोर्ट की शरण ली। उनका प्रकरण लोक अदालत में रखा। माता-पिता के साथ बेटे काे बैंगलुरु से बुलाया जहां न्यायाधीश की समझाइश पर बेटे ने माता-पिता काे भरण-पाेषण के प्रति माह 50 रुपए भेजने की सहमति दी। इसके बाद तीनाें अपने घर लाैटे। इसी तरह बिजली कंपनी में कार्यरत जवाहर नगर निवासी जानसन भी उस पर आश्रित पिता सुनील आइसेक व मां का भरण भरण नहीं कर रहा था। कोर्ट में केस लगाने के बाद उसने भी 10 हजार रुपए प्रति माह पिता को देने की सहमति व्यक्त की।

दो टूटे परिवार को मिलाने में अभिभाषकों ने निभाई अहम भूमिका, जज के साथ फिर गले मिले दंपती

बगीचा नंबर 4 निवासी राशिद अली की जावरा निवासी अफरोज से 7 अप्रैल 2017 को शादी हुई थी। सास-ससुर से अलग रहने की बात पर विवाद करते अफरोज मायके चली गई। राशिद ने कोर्ट में केस लगाया। इसके बाद दोनों को समझाइश दी तो प|ी पति व सास-ससुर के साथ रहने का राजी हुई। दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई और साथ में घर गए। इसी तरह नीमच के आनन्द पिता बाबूलाल सुथार ने प|ी सपना निवासी गेलाणी तहसील पिड़ावा जिला झालावाड़ ने भी राजीनामा किया। दोनों पक्षकार अभिभाषक लक्ष्मण सिंह भाटी व यशवंत चतुर्वेदी के प्रयासों से कोर्ट पहुंचे और समझाइश देने के बाद उन्हें मिला दिया।

बिजली चोरी के प्रकरण में परियोजना अधिकारी को भेजा था नोटिस, नही कराया समझौता

बिजली चोरी के प्रकरण में 35 हजार की वसूली के लिए कलेक्टोरेट में पदस्थ शहरी विकास परियोजना अधिकारी एस. कुमार को भी लोक अदालत में निराकरण के लिए नोटिस भेजा गया। लेकिन वह उपस्थित नही हुए। इस कारण से यह प्रकरण निराकरण से रह गया।

कोर्ट में सबसे ज्यादा जलकर व संपत्तिकर जमाने के लिए लोग पहुंचे और छूट का फायदा उठाया।

न्याय वाटिका में रोपे पौधे, सुरक्षा का संकल्प

न्यायिक कर्मचारी सहकारी साख संस्था द्वारा एडीआर भवन के पीछे तैयार की जा रही न्याय वाटिका में पौधराेपण किया। सभी न्यायाधीश के नाम से एक-एक पौधे उनके हाथों से रोपे गए। देखरेख की जिम्मेदारी कर्मचारियों ने ली।

873 प्रकरणों में 3.31 करोड़ का अवॉर्ड पारित

जिला विधिक सहायता अधिकारी शक्ति रावत ने बताया लोक अदालत में जिले भर की 18 खंडपीठों में न्यायालय में लंबित 3719 में से 396 प्रकरणों का तथा प्रीलिटिगेशन के 2793 केस में से 477 का निराकरण हुआ। प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में विद्युत कंपनी वसूली के 100 प्रकरण में 6.10 लाख, जलकर के 114 प्रकरण में 268335 व अन्य 263 मामलों में 18.73 लाख रुपए के अवॉर्ड पारित किए। इससे 477 लोग लाभान्वित हुए। न्यायालय में लंबित 396 प्रकरणों में राजीनामा होकर 3.03 कराेड़ रुपए के का समझौता हुआ। लोक अदालत में 873 प्रकरणों का निराकरण कर 3 करोड़ 31 लाख 15 हजार 743 रुपए समझौता राशि के प्राप्त हुए तथा 1381 लोग लाभान्वित हुए।

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