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1880 में आई भाप से चलने वाली ट्रेन, 1978 में चला डीजल इंजन, 42 साल बाद अब इलेक्ट्रिक इंजन

एक वर्ष पहले
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नीमच के 140 साल पुराने रेलवे इतिहास में रतलाम-नीमच के बीच 8 मार्च 2020 काे पहली यात्री ट्रेन 59811 रतलाम-यमुनाब्रिज (हल्दीघाटी पैसेंजर) बिजली इंजन से चली।

ट्रेन रतलाम से सुबह 8.40 बजे रवाना होकर 11.34 बजे नीमच पहुंची। लोको पायलट मनोज स्वामी, सहायक कृष्णकांत जाट, गार्ड एनके राव लेकर आए। अभी इलेक्ट्रिक इंजन रतलाम से नीमच के बीच ही चला। नीमच से चित्ताैड़गढ़ हाेते हुए यमुनाब्रिज तक डीजल इंजन से ट्रेन गई। वापसी में 59812
हल्दीघाटी पैसेंजर नीमच से दोपहर 12.50 बजे बिजली इंजिन से रतलाम रवाना हुई। इसे लोको पायलट मोहम्मद शकील लेकर गए।

अंग्रेजों ने देश की सभी 52 छावनियों को जोड़ने के लिए डाली थी रेल लाइन

अंग्रेजी शासनकाल में 1875 से 1880 के बीच दिल्ली को दक्षिण से जोड़ने के लिए जयपुर, अजमेर, चित्तौड़गढ़, मंदसौर, रतलाम, इंदौर, खंडवा, अकोला होकर हैदराबाद तक मीटरगेज लाइन डाली थी। 145 साल में इस रेल खंड पर कई परिवर्तन देखने को मिले। इतिहासकार डॉ. सुरेंद्र शक्तावत ने कहा कि 1857के गदर के बाद अंग्रेजों को विद्रोहियों की वजह से अपनी छावनियों से संपर्क करने और वहां से सहायकता पहुंचने मंे विलंब हाेने पर काफी परेशानियों करना पड़ा था। इस समस्या के समाधान के लिए अंग्रेजों ने देश की सभी 52छावनियों को जोड़ने के लिए एक योजना बनाई। योजना के पालन में सबसे पहले महू-नसीराबाद की छावनियों को जोड़ने हेतु कार्य प्रारंभ किया गया। यह कार्य 1880में पूर्ण हो गया। इस ट्रेक पर 3 नवंबर 1880 काे पहली बार मीटरगेज की यात्री गाड़ी नीमच पहुंची थी। फिर डीजल इंजन से मीटरगेज ट्रेन दौड़ी। 30 सितंबर 2006 तक अकोला-अजमेर रेल खंड में गाड़ियां दौड़ती रही। फिर रतलाम-नीमच के बीच गेज परिवर्तन हुआ और 17 जून 2007 को बड़ी लाइन की पहली ट्रेन डीजल इंजन से चली थी। 2018-19 में 400 करोड़ रुपए की लागत से ट्रैक का विद्युतीकरण हुआ।

आगे क्या- चित्तौड़गढ़ तक विस्तार जल्द : रेलवे की योजना अप्रैल में रतलाम से चित्तौड़गढ़ तक इलेक्ट्रिक इंजिन से ट्रेन चलाने की है। वर्तमान में नीमच-चित्तौड़गढ़ के बीच 56 किमी में इलेक्ट्रिफिकेशन चल रहा है। 15 मार्च तक सिंगल लाइन का काम पूरा हो जाएगा। मार्च अंत में सीआरएस निरीक्षण हो जाएगा। अप्रैल से रेलवे हल्दीघाटी पैसेंजर को ही चित्तौड़गढ़ तक चलाने लगेगा।


रतलाम-चित्तौड़गढ़ सेक्शन के इलेक्ट्रिफिकेशन की स्थिति

नीमच-चित्तौड़गढ़ सेक्शन के शंभुपुरा स्टेशन तक इलेक्ट्रिफिकेशन हो गया है। अब शंभुपुरा-चित्तौड़गढ़ के 13 किमी लंबे सेक्शन में काम चल रहा है, जिसमें पोल लगने के बाद केबल डाली जा रही है।

8 मार्च से पहली पैसेंजर ट्रेन बिजली इंजन से नीमच स्टेशन पहुंची।

1937 ः भारत के वायसराय जावरा स्टेट विजिट पर नवाब इफ्तेखार अली से मिलने आए थे। तब भाप इंजन वाली ट्रेन चलती थी। (भास्कर को यह तस्वीर समाजसेवी शेखर नाहर ने अपने संग्रह से उपलब्ध कराई है।)
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