राग-द्वेष-ईर्ष्या-निंदा रूपी विष को जो पी जाता वह है नीलकंठ

Neemuch News - जहां अमृत निकला वहीं हलाहल विष भी निकला जिसे पान करने से दैत्य ही नहीं देवता भी डर से पीछे हट गए। तब महादेव ने इस जहर...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:20 AM IST
Mandsore News - mp news the one who drinks anger hate jealousy condemned poison is nilkantha
जहां अमृत निकला वहीं हलाहल विष भी निकला जिसे पान करने से दैत्य ही नहीं देवता भी डर से पीछे हट गए। तब महादेव ने इस जहर को पिया लेकिन उसे कंठ में ही रोक लिया ताकि वह अंदर जाकर शरीर का अहित न कर सके। इसी प्रकार संसार में रहते हुए जो निंदा, राग, द्वेष आदि से व्यथित होकर उनका सामना करते हुए इस विष को ना तो भीतर प्रवेश कराता है और न बाहर फैलाता है। इससे ना तो स्वयं दु:खी होता है और ना दूसरों को कष्ट होने देता हैं। वह पुरुष नीलकंठ कहलाता है।

यह बात श्री सांवलिया गोशाला परिसर कुचड़ौद में स्वामी नित्यानंद महाराज की मूर्ति प्रतिस्थापना समारोह में आयोजित भागवत सप्ताह के चौथे दिन आयोजित भागवत कथा में भागवताचार्य कमलेश शास्त्री ने कही।

उन्होंने कहा कि परिवार, समाज और संसार दुःख का कारण नहीं है। बंधन का कारण आसक्ति और मोह का होना है। कथा प्रसंग में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। कथा में आसपास के बड़ी संख्या में ग्रामीण सहित ग्रामवासी, महिला, पुरूष सम्मिलित होकर धर्मलाभ लिया। 17 अप्रैल को सुबह 11 बजे संतों के सानिध्य में स्वामी नित्यानंद महाराज की मूर्ति का वैदिक विधि विधान से उज्जैन के विद्वान आचार्यों द्वारा प्रतिष्ठा की जाएगी।

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