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ज्ञापन देने के लिए कार्यालय के बाहर 2 घंटे बैठे ग्रामीण

तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को शासकीय योजनाओं की जानकारी नहीं दी जा रही है। जिससे लोग लाभ नहीं ले पा रहे...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:00 AM IST
तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को शासकीय योजनाओं की जानकारी नहीं दी जा रही है। जिससे लोग लाभ नहीं ले पा रहे हैं। लंबे समय से भटक रहे हैं। सरपंच-सचिव कोई सुनवाई नहीं करते। विरोध में बुधवार को ग्रामीणों ने आदिवासी युवा संगठन के पदाधिकारियों व कार्यकताओं के साथ मिलकर रैली निकाली। शासन के खिलाफ नारेबाजी की।

ग्रामीण तहसीलदार सुनिल करवरे को ज्ञापन देने के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे लेकिन यहां तहसीलदार मौजूद नहीं थे। ग्रामीणों ने धूप में बैठकर दो घंटे उनका इंतजार किया। इस दौरान पुलिस व प्रशासनीक अफसरों ने उन्हें समझाकर छांव में बैठाना चाहा लेकिन वो नहीं माने। उन्होंने कहा इतने दिन से परेशान हैं तब किसी ने नहीं पूछा अब छांव में बैठाने का कह रहे हैं। जब तक तहसीलदार नहीं आंएगे तब तक हम यहां से नहीं उठेंगे। करीब दो घंटे बाद तहसीलदार करवरे कार्यालय पहुंचे उन्होंने बताया शासकीय कार्यों से जिला कार्यालय गए थे। मुझे आप लोगों के आने की सूचना नहीं मिली थी। इस पर संगठन के पदाधिकारियों ने कहा हम ज्ञापन देने की सूचना एक दिन पूर्व एसडीएम नेपानगर को दे चुके थे। काफी देर चली बातचीत के बाद पदाधिकारियों ने करवरे काे ज्ञापन सौंपा। संगठन के अध्यक्ष गुलाबसिंह ठाकुर ने कहा ग्रामीण क्षेत्रों में सरपंच-सचिव अपने मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं। ग्रामीणों को हर छोटे-छोटे कार्यों को करवाने के लिए कई दिनों तक चक्कर काटने पड़ते हैं। पंचायतों में बैठते नहीं है लोगों को उन्हें गांव में ढूंढने जाना पड़ता है। जिम्मेदार अफसर भी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देते। लापरवाह सरपंच-सचिवों पर कार्रवाई नहीं की जाती जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। शासन ने कई जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई है जो लोगों को सुविधाएं दें लेकिन पंचायत में कार्यरत जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते ग्रामीण भटक रहे हैं। उन्होंने जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की मांग की। इस पर तहसीलदार सुनिल करवरे ने शनिवार को ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर समस्याओं का निराकरण कर दोषी पाए जाने वाले सरपंच और सचिवों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

तहसीलदार के इंतजार में ग्रामीण धूप में दो घंटे तक बैठे रहे।