• Hindi News
  • Madhya Pradesh
  • Nepanagar
  • अस्पताल में 7 साल से डॉक्टर नहीं फर्जी डॉक्टरों के भरोसे ग्रामीण
--Advertisement--

अस्पताल में 7 साल से डॉक्टर नहीं फर्जी डॉक्टरों के भरोसे ग्रामीण

Nepanagar News - ग्राम नावरा सेक्टर में आने वाले सिंधखेड़ा का उपस्वास्थ्य केंद्र बदहाल है। 7 साल से अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं।...

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 04:50 AM IST
अस्पताल में 7 साल से डॉक्टर नहीं फर्जी डॉक्टरों के भरोसे ग्रामीण
ग्राम नावरा सेक्टर में आने वाले सिंधखेड़ा का उपस्वास्थ्य केंद्र बदहाल है। 7 साल से अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं। इससे फर्जी डॉक्टरों ने गांव व आसपास के क्षेत्रों में डेरा जमा लिया है। ये झोलाछाप मरीजों को 100 प्रतिशत उपचार देने का दावा कर मनमानी फीस वसूल रहे हैं। लोगों को दोगुना फीस देने के बाद भी इलाज से फायदा नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों को पंचायत व ग्रामीणों ने समस्या से कई बार अवगत करवाया लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

गांव के सरपंच भारत पटेल ने बताया कि गांव में करीब 250 मकान हैं। 1500 से ज्यादा लोग रहते हैं। 7 साल पहले लोगों को चिकित्सा सुविधा देेने के लिए उपस्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था। स्थापना के समय से ही यहां सुविधाओं का अभाव है। कुछ डॉक्टर आए लेकिन वो ज्यादा समय यहां टीके नहीं। करीब 6 साल से कोई डॉक्टर और स्टाफ यहां नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र पर ताले लगे रहते हैं। भवन के चारों ओर जंगली झाड़ियां उग आई है। मरीज भूल भी चुके हैं कि यहां कोई स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है। इलाज के लिए लोगों को 5 किमी दूर नावरा जाना पड़ता है लेकिन यहां भी इलाज नहीं मिल पाता। नेपा का अस्पताल 30 किमी दूर है। जहां तक जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं मिलती। सरकारी सुविधाओं के अभाव का फायदा फर्जी डॉक्टरों ने उठाया। इन्होंने गांव व आसपास के क्षेत्रों में अपने क्लीनिक खोल लिए हैं। लोगों को 100 प्रतिशत इलाज देने का दावा कर मनमानी फीस वसूलते हैं। दोगुना फीस देने के बाद भी लोगों को बीमारियों से राहत नहीं मिल पाती।

सिंधखेड़ा का उपस्वास्थ्य केंद्र पर ताले लगे रहते हैं।

ग्रामीण बोले- दिखावे के लिए खोला है अस्पताल

ग्रामीण माणिकराम शालिकराम, अरुण श्यामलाल, कैशलाश काशिनाथ, निर्मलाबाई जगन, किशोर रतन सहित अन्य ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने यहां दिखावे के लिए अस्पताल खोल है। शासन की योजनाएं तो चलाई है लेकिन किसी का कोई लाभ नहीं मिलता। गांव में बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं बीमार होते हैं तो उन्हें दूसरे अस्पतालों तक बाइक से लाना-ले जाना पड़ता है। सड़कें भी बदहाल हैं। ऐसे में डर बना रहता है किसी दिन कोई गंभीर हादसा न हो जाए। गांव में कभी-कभी कोई एएनएम आकर आयरन की गोलियां देकर चली जाती हैं। गांव के माणिकराम शालिकराम ने बताया एक सप्ताह पहले काम के दौरान हाथ में चोट आई और घाव हो गया है। अस्पताल में सुविधा नहीं होने से घरेलू उपचार कर रहे हैं। जिम्मेदार अफसरों को समस्या बताई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। लंबे समय पहले निरीक्षण करने आए थे। निराकरण का आश्वासन देकर गए लौटकर नहीं आए।

...इधर, 1 माह पहले जननी एक्सप्रेस का एक्सीडेंट हुआ, नहीं सुधरी

धूलकोट |
सिंधखेड़ा की ही तरह धूलकोट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी डॉक्टर नहीं है। यहां के मरीजों का इलाज अस्पताल में पदस्थ कंपाउंडर कर रहा है। आसपास के करीब 15 से ज्यादा गांव के लोग इस अस्पताल पर निर्भर हैं। पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में झोलाछाप डॉक्टरों ने डेरा जमा लिया है। ग्रामीणों ने बताया कि अस्पताल में एक जननी एक्सप्रेस थी जिसका एक माह पहले एक्सीडेंट हो गया। इंदौर सुधरने के लिए गई है। अब तक नहीं आई और न ही यहां कोई वैकल्पिक सुविधा की जा रही है।

X
अस्पताल में 7 साल से डॉक्टर नहीं फर्जी डॉक्टरों के भरोसे ग्रामीण
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..