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पारंपरिक वेशभूषा में बुजुर्ग, वेस्टर्न कल्चर में दिखे युवा

भास्कर संवाददाता | बोरीबुजुर्ग /नेपानगर धुलकोट क्षेत्र के तहत आने वाले ग्राम अंबा में भाेंगर्या हाट लगा। 500 से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 04:50 AM IST

पारंपरिक वेशभूषा में बुजुर्ग, वेस्टर्न कल्चर में दिखे युवा
भास्कर संवाददाता | बोरीबुजुर्ग /नेपानगर

धुलकोट क्षेत्र के तहत आने वाले ग्राम अंबा में भाेंगर्या हाट लगा। 500 से ज्यादा दुकानें सजी। होली पर एक दूसरे से मिलने व खरीदारी के लिए लगभग 9 हजार आदिवासी समाजजन पहुंचे। हाट में बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए तो वहीं युवाओं ने वेस्टर्न कल्चर को अपनाया। इस दौरान ढोल और मांदल की थाप से पूरा गांव गूंज उठा।

क्षेत्र के अंबा, परतकुंड़िया, बिल्लोरी, सुक्ता, नवाड़, अंबा फाल्या, बोरी बुजुर्ग, दवाटिया सहित आसपास के एक दर्जन से ज्यादा गांवों से करीब 9 हजार आदिवासी समुदाय के लोग हाट में आए। 500 से अधिक दुकानें सजी थी। रंग गुलाल और अन्य वस्तुओं की जमकर खरीदी की गई। गुरुवार शाम को होलिका दहन करने के बाद शुक्रवार को धुलेंडी मनाई जाएगी। हाट में वेस्टर्न एवं पारंपरिक वेशभूषा में युवक-युवतियां और बुजुर्ग पहुंचे। ढोल और मांदल की थाप पर जमकर थिरके। झूले, कुल्फी, गुड की सेंव, गुड की जलेबी का लुत्फ उठाया। युवक-युवतियों ने वेस्टर्न कल्चर ड्रेस में सेल्फी ली। वहीं परंपरा को कायम रखते हुए बुजुर्ग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में आए। ढाेल व मांदल की थाप पर आदिवासी गीत गाते हुए थिरके। युवाओं ने जींस-पेंट अपनाई वहीं कई युवतियां भी परंपरा को छोड़ अलग वेशभूषा में नजर आई। गांव में सुबह से शाम तक भीड़ रही। युवाओं की टोलियां जहां से भी निकली रंग-गुलाल उड़ाते हुए निकली। जो भोंगर्या में मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। सुबह से शाम तक यह सिलसिला चलता रहा। सभी ने आदिवासी गीत आमू काका बाबा नी पोरिया पर जमकर ठुमके लगाए।

धूलकोट क्षेत्र के अंबा में लगा हाट, गांव में गूंजी ढोल और मांदल की थाप

अंबा के हाट में समाजजनों ने झूलों का लुत्फ उठाया।

आकर्षक वेशभूषा से रिझाया

गौरतलब है कि यह क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य होने के कारण हजारों की संख्या में समाजजन पहुंचते हैं। साल में एक बार आने वाले इस त्योहार को लेकर एक सप्ताह पहले से तैयारियों में जूट जाते हैं। भोंगर्या हाट में लोक उत्सव के तहत क्षेत्र के करीब 9 से 10 हजार की संख्या में आदिवासी समाजजन पहुंचे। भोंगर्या पर्व पर युवक-युवतियां एक-दूसरे से मिलकर परिचय प्राप्त करते हैं। अपने समाज एवं क्षेत्र के बारे में जानकारी देकर मेल मिलाप हाेता है। जानकारी के अनुसार आदिवासियों में शादी को लेकर कोई बंधन नहीं हाेता। इस दौरान अगर युवक-युवतियां किसी को पसंद कर लेते हैं तो वे शादी कर सकते हैं। यही कारण है कि भोंगर्या पर्व में युवक-युवतियां काफी सज-धज कर आते हैं। जिससे वे एक-दूसरे को लुभा सकें। देरशाम तक बाजार में भोंगर्या उत्सव की भारी धूम रही।

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Web Title: पारंपरिक वेशभूषा में बुजुर्ग, वेस्टर्न कल्चर में दिखे युवा
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