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महिलाओं काे दिया मंच ताकि जिम्मेदारियों मे प्रतिभा न दबे

शनिवार को नगर की जागृति कला केंद्र संस्था द्वारा नेपा ऑडिटोरियम में महिलाओं के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 05:45 AM IST
शनिवार को नगर की जागृति कला केंद्र संस्था द्वारा नेपा ऑडिटोरियम में महिलाओं के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया है। यह प्रतियोगिता पूर्ण रूप से महिलाओं के लिए होकर नि:शुल्क रहेगी। जिसमें नगर सहित आंचलिक क्षेत्र की महिलाएं भाग लेकर अपनी कला का प्रदर्शन कर सकती हैं। संस्था के निदेशक मुकेश दरबार ने बताया कार्यक्रम के तहत विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताआें का आयोजन होगा। सुबह 10 से 10:30 बजे तक रंगोली, 11 से 12 तक कुर्सी दौड़, 12.15 से 1 बजे तक मेहंदी प्रतियोगिता होगा। इसके पश्चात शाम 6 बजे से एकल नृत्य और सौंदर्य प्रतियोगिता रखी गई हैं। उन्होंने नगर सहित आसपास के आंचलिक गांवों की महिलाआें को उक्त प्रतियोगिता में भाग लेकर इस सफल बनाने की बात कही है।

मुकेश दरबार ने बताया प्रतिभाएं सभी में होती हैं। लेकिन मन का डर, उत्साह की कमी और घर परिवार की जिम्मेदारियाें के चलते महिलाएं इसे मन में ही दबा कर रख देते हैं। वहीं कामकाजी महिलाएं भी दफ्तर और घर के बीच ही उलझ कर रह जाती हैं। आपके भीतर के कलाकार को जगाने के लिए संस्था आपको मंच दे रहा है। जहां अाप अपनों के बीच रहते हुए प्रतिभा को प्रदर्शित कर सकते हैं। संस्था का उद्देश्य है कि डर को मन से निकालकर कला को लोगों तक पहुंचाया जाए। कार्यक्रम के दौरान आपकी प्रतिभा का सम्मान भी संस्था द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया शनिवार काे आयोजित प्रतियोगिता मात्र महिलाआें के लिए ही आयोजित की गई है। इसमें महिलाएं ही उपस्थित रहेंगी। उनके लिए संस्था की ओर से नि:शुल्क पास की व्यवस्था रहेगी। जिसे साथ में लाना अनिवार्य होगा। कार्यक्रम में संस्था रविंद्र हनोते, सैय्यद निसार, दीलीप शिंदे, भूषण गायकवाड़, अंकिता झा, शारदा बारी, पार्वती दलाल व अन्य कलाकार सहयोग दे रहे हैं।

शनिवार को नेपा ऑडिटोरियम में महिलाओं के लिए नि:शुल्क सांस्कृतिक कार्यक्रम का अायोजन

-ग्रीष्म कालीन शिविर में नृत्य के गुर सीखते बच्चे

150 बच्चे सीख रहे नृत्य अभिनय प्रशिक्षण

मुकेश दरबार ने बताया संस्था द्वारा बच्चों के लिए एक मई से ग्रीष्म कालीन नृत्य व अभिनय प्रशिक्षण शिविर भी चलाया जा रहा है। जिसमें 150 से अधिक बच्चे नृत्य अभिनय के गुर सीख रहे हैं। संस्था के प्रशिक्षकों द्वारा उनकी बारीकियों को देखते हुए उन्हें निखारा जा रहा है। जिससे वे अपने नृत्य को बेहतर तरीके से प्रदर्शित कर सकें। उन्होंने बताया कला का प्रदर्शन करना कोई गलत काम नहीं है। क्या पता आपकी कला की कहा जरूरत पड़ जाए और आपको एक दिशा मिल जाए। जिस प्रकार शिक्षा कभी भी व्यर्थ नहीं जाती है ठीक उसी प्रकार कला का भी अपने क्षेत्र में अपना महत्व होता है।