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जिला अदालत में मानहानि के 200 मुकदमे, इनमें से 25 राजनीतिक

अक्सर अदालत का फैसला आने से पहले दोनों पक्षों में राजीनामा या समझौता हो जाया करते थे।

Danik Bhaskar | Nov 15, 2017, 06:30 AM IST
भोपाल. राजनीतिक मानहानि के मुकदमों में अक्सर अदालत का फैसला आने से पहले दोनों पक्षों में राजीनामा या समझौता हो जाया करते थे। यही कारण है कि मानहानि के केसों में बहुत ही कम लोगों को सजा होती है, लेकिन राजधानी में इस साल यह दूसरा मौका है जब किसी हाई प्रोफाइल मानहानि के मामले में अदालत का फैसला आने वाला है। स्पेशल जज काशीनाथ सिंह की कोर्ट में 17 नवंबर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बनाम कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा की आखिरी सुनवाई है। इसी दिन इस केस का फैसला भी सबसे सामने आएगा। इससे पहले 7 माह पूर्व कांग्रेस विधायक कल्पना परुलेकर को भी मानहानि के मामले में सजा सुनाई जा चुकी है। वहीं भाजपा के दो दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिछले दो साल में अपने मानहानि के केसों में फैसला आने से पहले समझौता कर विवाद सुलझाने में सफल रहे।
वहीं एक पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और दिग्विजय सिंह के बीच मानहानि केस में समझौता होते-होते रह गया। राजधानी की अदालत में यूं तो मानहानि से जुड़े लगभग 200 केस लंबित हैं, इनमें लगभग 25 केस राजनीति से जुड़े चर्चित जनप्रतिनिधियों के हैं।
सालों तक चले ये केस, लेकिन फैसले से पहले ही समझौते पर खत्म हुए
दिग्विजय सिंह विरुद्ध सुंदरलाल पटवा-विक्रम वर्मा (तत्कालीन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष)
- विवाद का कारण : 1996 में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम वर्मा ने तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह पर हवाला कांड के आरोपी बीआर जैन से मिले हुए होने का आरोप लगाया था। इस केस का ट्रायल जनवरी 2015 में शुरू हुआ।
क्या हुआ
- 20 साल पुराने इस केस में 30 से ज्यादा बार अदालतों में तारीख लगीं। वर्ष 2016 में केस अंतिम सुनवाई पर पहुंचा, लेकिन फैसले की तारीख से पहले ही दोनों पक्षों ने अदालत में मध्यस्थता का आवेदन देकर सुलह कर ली। दिग्विजय सिंह ने केस वापस ले लिया।
संजय गुप्ता (तत्कालीन कांग्रेस महामंत्री) विरुद्ध कैलाश जोशी (तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष)
- विवाद का कारण : विस चुनाव में भाजपा द्वारा जारी घोषणापत्र में कांग्रेस और सीएम दिग्विजय सिंह पर 15000 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया। संजय गुप्ता ने कांग्रेस की छवि खराब करने और चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में जोशी के खिलाफ केस दायर किया, जिसका ट्रायल अप्रैल 2013 में शुरू हुआ।
क्या हुआ
- 11 साल बाद बाद इस केस में फैसला आने से ठीक पहले 24 फरवरी 2015 को दोनों पक्षों में राजीनामा (समझौता) हो गया और संजय गुप्ता ने केस वापस ले लिया।
दिग्विजय सिंह (तत्कालीन सीएम) विरुद्ध उमा भारती (तत्कालीन सीएम उम्मीदवार)
- विवाद का कारण : सीएम पद की दावेदार उमा भारती ने 2003 के चुनावी भाषणों में दिग्विजय सिंह पर 15 हजार करोड़ का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए मिस्टर बंटाधार और चोरों का सरदार कहा था। इसका ट्रायल 20 जून 2012 को शुरू हुआ।
क्या हुआ
- अब तक इस केस में 60 से ज्यादा तारीख लग चुकी हैं। दोनों पक्षों ने 12 साल बाद 5 फरवरी 2016 को सुलह करने के लिए केस मीडिएशन सेंटर में ट्रांसफर हुआ। कोर्ट ने मीडिएशन सेल से इस केस को वापस लेकर फिर से ट्रायल शुरू कर दिया है।
तारीख पर तारीख... अब भी अदालत में विचाराधीन हैं ये चर्चित केस
शिवराज सिंह चौहान (मुख्यमंत्री) विरुद्ध
अजय सिंह (तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष)
विवाद का कारण :
अजय सिंह ने 9 मई 2013 को सागर में सीएम के परिजनों पर आपत्तिजनक बातें कहते हुए सीएम हाउस में नोट गिनने की मशीन होने की बात कही। 4 जून 2013 को खरगौन में भी निजी आरोप लगाए थे। इसका ट्रायल नवंबर 2013 में शुरू हुआ।
30 तारीख लग चुकी हैं। सीएम, उनकी पत्नी और एलएन उप्पल की गवाही हो चुकी है। 15 नवंबर को अगली तारीख तय है।
अजय सिंह विरुद्ध प्रभात झा
विवाद का कारण : तत्कालीन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा ने प्रेस रिलीज जारी कर अजय सिंह पर चुरहट विस क्षेत्र में कोल आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया था। अजय सिंह ने झा पर छवि खराब करने के आरोप में मानहानि का मुकदमा दायर किया। इसका ट्रॉयल 29 अक्टूबर 2013 को शुरू हुआ।
केस में लगभग 50 से अधिक बार सुनवाई की तारीख
कल्पना परुलेकर को हो चुकी है जेल : मेंहदपुर (उज्जैन) की पूर्व विधायक कल्पना परुलेकर को 10 अप्रैल 2017 को मानहानि के एक मामले में दोषी मानते हुए अदालत ने 1 साल कारावास की सजा सुनाई थी। परुलेकर ने 23 नवंबर 2012 को विधानसभा परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तत्कालीन विस सचिव ईसराणी पर भ्रष्ट्राचार के आरोप लगाए थे। इन आरोपोंे को ईसराणी ने अदालत में चुनौती दी थी।