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55 ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑपरेशन इनमें ब्रेनडेड मरीजों से मिली 11 लोगों को नई जिंदगी

27 नवंबर को इंडियन आॅर्गन डोनेशन डे है। अच्छी खबर यह है कि राजधानी में आॅर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांट सर्जरी बढ़ रही है

Bhaskar News | Last Modified - Nov 27, 2017, 04:10 AM IST

  • 55 ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑपरेशन इनमें ब्रेनडेड मरीजों से मिली 11 लोगों को नई जिंदगी

    भोपाल.27 नवंबर को इंडियन आॅर्गन डोनेशन डे है। अच्छी खबर यह है कि राजधानी में आॅर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांट सर्जरी बढ़ रही है। बीते एक साल में लिवर और किडनी के 55 मरीजों ने ट्रांसप्लांट सर्जरी कराई। इनमें से 11 केसों में नई जिदंगी गंभीर बीमारी और सड़क हादसे में घायल लोगों के ब्रेनडेड होने के बाद अंगदान करके दी गई है। नेशनल आॅर्गन एंड टिश्ू ट्रांसप्लांट अाॅर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट में भोपाल को लेकर पॉजिटिव संकेत हैं।

    कितने ट्रांसप्लांट

    - 48 किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई है बंसल, सिद्धांता और चिरायु मेडिकल कॉलेज में।

    - 07 लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई है एक साल में। इनमें से 4 सिद्धांता, 3 बंसल अस्पताल में।

    - 04 लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी कैडेबर ऑर्गन डोनेशन से हुई हैं पिछले एक साल में ।

    भास्कर पड़ताल - दूसरों को बताया अंगदान का महत्व....किसी ने पति के ऑर्गन डोनेट किए तो किसी ने बेटी के

    पति की आखिरी इच्छा को पूरा करने परिजनों के विरोध को दरकिनार किया
    - कटारा हिल्स कॉलोनी की रेखा कुंभकार ने 12 अक्टूबर को पति विष्णु कुंभकार की दोनों किडनी व लिवर डोनेट किए। विष्णु को ब्रेन हेमब्रेज हुआ था। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें नहीं बचा सका। स्वामी विवेकानंद स्पारइनल सेंटर ने रेखा को उनके आॅर्गन डोनेट करने की सलाह दी थी।

    - वे बताती हैं कि रात 9 बजे ब्रेनडेड की जानकारी दी। आॅर्गन डोनेशन करने की स्थिति में सिद्धांता रेडक्रास शिफ्ट करने को कहा था। रात 12 बजे आॅर्गन निकालने की अनुमति दी। परिजन आॅर्गन डोनेट करने का विरोध कर रहे थे।

    - कुछ साल पहले पति ने ही देहदान का इरादा जाहिर किया था। उनके संकल्प ने ही हिम्मत दी। रेखा को एम्स व भोपाल आर्गन डोनेशन कमेटी ने अंगदान अभियान में काउंसलर के रूप में जोड़ लिया है।

    डॉक्टर्स की सलाह पर पिता ने डोनेट किया बेटी का लिवर
    - भोपाल स्टेशन के डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट सुदामा रघुवंशी ने इसी साल 15 सितंबर को बंसल अस्पताल में अपनी बेटी श्रद्धा के ब्रेनडेड होने के बाद उसका लिवर डोनेट किया है।

    - उन्होंने बेटी को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती कराया था। सर्जरी के ठीक पहले ब्रेन हेमब्रेज से उसकी मौत हो गई।

    - रघुवंशी बताते हैं कि बेटी के ट्रांसप्लांट के लिए मां कविता की किडनी भी मैच हो गई थी।

    - लेकिन, ऑपरेशन के पहले सेहत बिगड़ने पर उसे ब्रेनडेड घोषित कर दिया। डॉक्टर्स की सलाह पर लिवर डोनेट कर दिया।

    ब्लड ग्रुप नहीं हुआ मैच, दो साल से टल रही थी ट्रांसप्लांट सर्जरी ...
    - सीएमएचआे कार्यालय भोपाल में कार्यरत प्रवीण प्रधान लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे। अगस्त 2012 में पहली बार डॉक्टर्स ने लिवर खराब होने की जानकारी दी थी।

    - फरवरी 2015 में डॉक्टर्स ने लिवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी। दो साल तक परिवार और रिश्तेदारों में लिवर डोनर को खोजा। लेकिन, ब्लड ग्रुप मैच नहीं होने के कारण संभव नहीं हुआ।

    - 24 जुलाई 2017 की देर शाम नोटाे दिल्ली के अफसरों ने ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए सिद्धांता रेडक्राॅस हॉस्पिटल में भर्ती होने के बारे में फोन पर पूछा।

    - परिजनों से बात कर 30 मिनट के भीतर सर्जरी की सहमति दे दी। इसके 10 घंटे बाद जबलपुर में ब्रेनडेड मरीज का लिवर उन्हें मिल गया। सर्जरी दो साल से टल रही थी।

    मां की किडनी से मिली बेटे को नई जिदंगी
    - बंसल हॉस्पिटल में बीते साल अक्टूबर में रीवा निवासी संदीप पांडे का किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन हुआ। वह एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं।

    - संदीप ने बताया कि जब बीई फर्स्ट ईयर में था, तब वायरल फीवर के बाद किडनी खराब होने की जानकारी डॉक्टर्स ने दी।

    - लंबे इलाज के बाद बीते साल अक्टूबर में बंसल हॉस्पिटल के डॉक्टर्स ने मां की किडनी ट्रांसप्लांट की।

    - वह बताते हैं कि ट्रांसप्लांट ऑपरेशन के बाद भी किडनी को इनफेक्शन से बचाने दवाएं लेनी पड़ रही हैं।

    - किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी के मरीजों की वेटिंग लिस्ट कैडेबर आॅर्गन डोनेशन से कम होगी। इसके लिए जरूरी है अस्पतालों में बनी आॅर्गन डोनर काउंसलर लोगों की अंगदान की जरूरत और उससे बीमार व्यक्ति की जिंदगी में आने वाले बदलाव लोगों को बताएं।
    डॉ. सुबोध वार्ष्णेय, डायरेक्टर, सिद्धांता हाॅस्पिटल

    - अस्पताल में भर्ती ब्रेन डेड मरीज के परिजनों को संबंधित के अंगदान करने के लिए राजी करना सबसे बड़ी चुनौती है। नाेटो के निर्देश पर सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में अंगदान के लिए काउंसलर काम कर रहे हैं।
    डाॅ. संतोष अग्रवाल, बंसल हॉस्पिटल की किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के प्रमुख

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