--Advertisement--

यादें: आज की बात फिर नहीं होगी, ये मुलाकात फिर नहीं होगी: वडाली ब्रदर्स

नादस्वरम-6 के तहत आखिरी बार 15 दिसंबर 2017 को करुणाधाम के मंच पर सजी थी वडाली ब्रदर्स की महफिल।

Dainik Bhaskar

Mar 09, 2018, 12:43 PM IST
भोपाल में दिसंबर में सजी थी वड़ाली ब्रदर्स की आखिरी शाम। भोपाल में दिसंबर में सजी थी वड़ाली ब्रदर्स की आखिरी शाम।

भोपाल. आज की बात फिर नहीं होगी..., ये मुलाकात फिर नहीं होगी...। ये बात इस हद तक सच साबित होगी, शायद किसी भोपाली संगीत प्रेमी ने नहीं सोचा होगा। वडाली ब्रदर्स के पूरनचंद्र वडाली और प्यारेलाल वडाली ने आखिरी बार भोपाल में इसी अंदाज में संगीत प्रेमियों से रूबरू हुए थे। वड़ाली ब्रदर्स की ये जुगलबंदी भोपाल के लोग कभी नहीं भूल पाएंगे।

-शुक्रवार को सुबह दिल तोड़ने वाली खबर आई। जब वडाली ब्रदर्स की यह मशहूर जोड़ी टूट गई। प्यारे लाल वडाली का 75 वर्ष की उम्र में देहांत हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वडाली ब्रदर्स की यादगार प्रस्तुति 15 दिसंबर 2017 को करुणाधाम आश्रम में आयोजित नादस्वरम-6 सूफी संगीत संध्या हुई थी।

-इस दौरान दोनों ही कलाकारों ने राजधानी की शाम को सूफियाना बना दिया। उन्‍होंने तू माने या न माने दिलदारा... और गुरु की शान में खुसरो रैन सुहाग की जो जगि पी के संग..., सुनाया। इन्हीं शानदार नगमों के साथ जब वडाली ब्रदर्स ने अपनी दमदार और सुकून देती आवाज से लोगों के दिलों को छू लिया।

छाप तिलक, सब छीनी...

-कार्यक्रम के दौरान मंच पर बैठते ही प्यारेलाल वडाली ने संगीत प्रेमियों से चर्चा करते हुए कहा था कि गाना बहुत सुना है। ये वो शहर है जहां सबसे ज्यादा श्रोता है, हम इस शहर में बहुत आए हमें यहां बहुत आनंद मिलता है। मैं आपसे कहना चाहूंगा, कि हम गाना गाते है नहीं, बाबा की हाजिरी करते है, कबूल कीजिए।

-इसके बाद वडाली ब्रदर्स ने छाप तिलक सब छीनी..., सुनाकर हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया। सूफियाना कलाम और वडालीज की रूह तक उतर जाने वाली आवाज ने मानों महफिल पर जादू सा कर दिया। वो सुनाते जा रहे थे और सुनने वाले देर रात तक उनकी आवाज में खोए रहे।

अमृतसर के एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में अंतिम सांस
-प्यारेलाल वडाली ने अपनी आखिरी सांस अमृतसर के फोर्टिस एस्कॉर्ट हास्पिटल में ली। बीमार होने की वजह से उन्हें गुरुवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पंजाबी सूफी भाईयों की जोड़ी वडाली ब्रदर्स के नाम से पहचाने जाते रहे हैं।

-अमृतसर के पास एक छोटे से गांव के रहने वाले वडाली ब्रदर्स दुनियाभर में अपनी गायकी के लिए काफी मशहूर थे। दोनों जालंधर के हरबल्ला मंदिर में परफॉर्म करने शुरू किया था, दोनों भाईयों की जोड़ी काफियां, गज़ल और भजन जैसी कई तरह की गायकी करते थे।

वड़ाली ब्रदर्स ने एक बढ़कर एक गीत सुनाए थे। वड़ाली ब्रदर्स ने एक बढ़कर एक गीत सुनाए थे।
मंच पर प्रस्तुति देते वड़ाली ब्रदर्स। मंच पर प्रस्तुति देते वड़ाली ब्रदर्स।
इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने वड़ाली ब्रदर्स को सम्मानित किया था। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने वड़ाली ब्रदर्स को सम्मानित किया था।
वडाली ब्रदर्स ने मंच से किताब का विमोचन भी किया था। वडाली ब्रदर्स ने मंच से किताब का विमोचन भी किया था।
X
भोपाल में दिसंबर में सजी थी वड़ाली ब्रदर्स की आखिरी शाम।भोपाल में दिसंबर में सजी थी वड़ाली ब्रदर्स की आखिरी शाम।
वड़ाली ब्रदर्स ने एक बढ़कर एक गीत सुनाए थे।वड़ाली ब्रदर्स ने एक बढ़कर एक गीत सुनाए थे।
मंच पर प्रस्तुति देते वड़ाली ब्रदर्स।मंच पर प्रस्तुति देते वड़ाली ब्रदर्स।
इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने वड़ाली ब्रदर्स को सम्मानित किया था।इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने वड़ाली ब्रदर्स को सम्मानित किया था।
वडाली ब्रदर्स ने मंच से किताब का विमोचन भी किया था।वडाली ब्रदर्स ने मंच से किताब का विमोचन भी किया था।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..