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नाबालिग से गैंगरेप के छह आरोपियों को उम्रकैद, दो आरोपियों का केस बाल न्यालालय में

भोपाल रेलवे स्टेशन पर 12 साल की नाबालिग से हुए गैंगरेप के मामले में कोर्ट ने कहा, मरते दम तक भुगतनी होगी सजा।

Danik Bhaskar | Mar 12, 2018, 07:02 PM IST
सजा सुनने के बाद कोर्ट के बाहर सजा सुनने के बाद कोर्ट के बाहर

भोपाल. भोपाल रेलवे स्टेशन पर 12 साल की बच्ची से ज्यादती के मामले में स्पेशल कोर्ट ने 6 दोषियों को उम्रकैद (अंतिम सांस तक जेल में रखने) की सजा सुनाई है। इनमें से एक अर्जुन का डीएनए बच्ची के भ्रूण से मैच हुआ है। बाकी को बच्ची ने पहचाना था। सोमवार को जस्टिस सविता दुबे ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपियों पर 20-20 हजार का जुर्माना करते हुए जुर्माने की रकम में से 60 हजार रुपए बच्ची को देने के आदेश दिए। जस्टिस सविता दुबे ने ही कुछ दिनों पहले पीएससी की तैयारी कर रही छात्रा से गैंगरेप के मामले में दोषियों को सजा सुनाई थी। इस केस में कुल आठ आरोपी थे। इनमें से दो नाबालिग थे। उन्हें जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट से सजा हो चुकी है।

इन्हें उम्र भर रहना होगा जेल में
सलमान किडनी पुत्र मोहम्मद महबूब, राजेश टकला पुत्र संतोष साहू, मोहम्मद सलमान उर्फ भेंडा पुत्र अयूब, मनीष यादव पुत्र रवि यादव, मंगल ठाकुर पुत्र मुन्ना ठाकुर, अर्जुन पुत्र मोहर सिंह को अंतिम सांस तक सजा भुगतने के लिए जेल में रखे जाने के आदेश दिए हैं। इन आरोपियों में चार की उम्र 19 साल, एक 20 साल और एक 24 साल का है।

परिजन का अदालत में हंगामा

- उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद जैसे ही दोषियों को कोर्ट रूम से बाहर लाया गया उनके परिजन ने हंगामा शुरू कर दिया। दो दोषी अपने परिजन से गले लगकर फूट-फूटकर रोने लगे। वहीं दो पुलिस के साथ गाली-गलौज करते हुए बाेले कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। आरोपियों आैर उनके परिजन ने कोर्ट में कुछ देर हंगामा भी किया।

क्या था मामला?

पिछले साल 3 नवंबर को जीआरपी ने भोपाल रेलवे स्टेशन पर एक नाबालिग लड़की के संदिग्ध अवस्था में मिलने की सूचना रेलवे चाइल्ड लाइन को दी थी। रेलवे चाइल्ड लाइन ने लड़की की जांच कराई तो वह गर्भवती निकली।

- 7 नवंबर 2017 को भास्कर ने सबसे पहले यह खबर प्रकाशित की। इसके बाद कार्रवाई हुई।


पुलिस ने चार दिन बाद दर्ज किया था केस

- इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी उजागर हुई, पुलिस ने लड़की के मिलने के 4 दिन बाद केस दर्ज किया था।

- जीआरपी ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 और पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि बाद में पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी की और मामले में जांच करके कोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी थी।