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विदेशी भाषा जूठन की तरह, हमें मातृभाषा को बढ़ावा देने की जरूरत: शिक्षामंत्री

उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा-जिन देशों ने मातृभाषा से समझौता नहीं किया, वह आगे।

Dainik Bhaskar

Mar 09, 2018, 07:21 PM IST
Like foreign language leasing, we need to promote mother tongue

भोपाल। भाषा व्यक्तित्व को निखारती है। हमें विदेशी भाषा के रूप में मिली जूठन को बेहतर मानने की मानसिकता से उभरकर मातृभाषा को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास करने होंगे। इजराइल, जापान सहित विश्व के जिन 20 देशों ने मातृभाषा से समझौता नहीं किया, वह सकल घरेलू उत्पाद के मामले में अव्वल है। यह कहना है उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया का।

-वह शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि द्वारा हिंदी भाषा में तकनीकी, चिकित्सा एवं वैज्ञानिक अकादमिक लेखन, अनुवाद एवं प्रकाशन विषय पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। यह कार्यशाला मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से विज्ञान भवन में शुक्रवार को हुई।

-हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा इंजीनियरिंग और मेडिकल की किताबें हिंदी भाषा में लिखवाने के साथ ही अनुवाद करवाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए विवि दिल्ली स्थित वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की मदद लेने जा रहा है।

-कार्यक्रम में भाग लेने आए आयोग के अध्यक्ष अवनीश कुमार ने विवि को तकनीकी रूप से हर संभव मदद करने की बात कही है। मुख्य अतिथि पवैया ने कहा कि छात्रों को विकल्प देने की जरूरत है। साक्षात्कार में हिन्दी भाषा में जवाब देने वाले बच्चों का चयन भी होना चाहिए। उनको हिन्दी भाषी होने पर भी रोजगार के अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने हिन्दी के लिए सकारात्मक पहल की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि हिन्दी को हेय-दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।
दुनिया के सभी देश अपनी मातृभाषा में रिसर्च का काम कर रहे
-मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. नवीन चंद्रा ने कहा कि विज्ञान और तकनीकी को बढ़ावा देने के लिए मातृभाषा हिंदी जरूरी है। दुनिया के सभी देश अपनी मातृभाषा में शिक्षा और रिसर्च का काम कर रहे हैं। हमें भी इस दिशा में चिंतन करने की जरूरत है। कार्यक्रम में विवि के कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज और रजिस्ट्रार डॉ. एसके पारे भी मौजूद थे।

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