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एमपी एग्रो से पोषण आहार सप्लाई बंद, सुनवाई से एक दिन पहले सरकार का बड़ा फैसला

महिला बाल विकास विभाग के प्रमुख को बचाने ताबड़तोड़ एमपी एग्रो से वितरण बंद करने पर फैसला लेना पड़ा।

Danik Bhaskar | Mar 10, 2018, 02:55 AM IST
इंदौर हाईकोर्ट में इस मसले पर इंदौर हाईकोर्ट में इस मसले पर

भोपाल(मध्यप्रदेश). महिला बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव जेएन कंसोटिया को अवमानना से बचाने के लिए आनन-फानन में एमपी एग्रो के माध्यम से पोषण आहार सप्लाई बंद करने का फैसला लेना पड़ा। सरकार ने 24 घंटे के भीतर फैसला लिया और 8 मार्च को देर रात एमपी एग्रो की पोषण आहार सप्लाई यूनिट बंद करने के आदेश जारी कर दिए। दरअसल इंदौर हाईकोर्ट में इस मसले पर शुक्रवार को सुनवाई में प्रमुख सचिव जेएन कंसोटिया को तलब किया था। हाईकोर्ट ने इस केस को चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता के पास भेज दिया है। अब पोषण आहार की व्यवस्था का फैसला वहीं होगा।

प्रमुख सचिव के दफ्तर से लेकर संचालनालय तक दौड़-भाग

इधर इंदौर की अदालत को अपना जवाब देने के लिए गुरुवार को भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग में दिनभर गहमागहमी रही। मंत्रालय में प्रमुख सचिव के दफ्तर से लेकर संचालनालय तक दौड़-भाग हुई। प्रमुख सचिव कंसोटिया और आयुक्त संदीप यादव के बीच बैठकें हुई। विभाग के अफसरों और विधि विशेषज्ञों से सलाह ली गई कि हाईकोर्ट को जवाब देना है। अब एमपी एग्रो का क्या किया जाए। महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस को भी इस मुद्दे से अवगत कराया गया। ताबड़तोड़ एमपी एग्रो से वितरण बंद करने पर फैसला लेना पड़ा। इस सारी कवायद के चलते संचालनालय में रात करीब 11 बजे तक कामकाज चला।

24 घंटे पहले क्यों लेना पड़ा फैसला?
विभाग ने पिछले डेढ़ साल से किसी ना किसी तर्क के माध्यम से मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद एमपी एग्रो के माध्यम से सप्लाई की व्यवस्था बरकरार रखी थी। हाईकोर्ट में शुक्रवार को प्रमुख सचिव को नई व्यवस्था को लेकर जवाब देना था। प्रमुख सचिव करीब चार महीने पहले एमपी एग्रो से अनुबंध समाप्त होने का जवाब दे चुके थे, जबकि बाद में शासन का जवाब आया था कि पुरानी व्यवस्था बरकरार है। ऐसे में विधि विशेषज्ञों से यहीं सुझाव मिला कि एमपी एग्रो की व्यवस्था खत्म करना ही विकल्प है। विभाग ने आनन-फानन में इसके आदेश निकाल दिए।

दो जवाबों में फंस गए अफसर
विभाग के प्रमुख सचिव ने हाईकोर्ट में जवाब पेश किया था कि शासन ने एमपी एग्रो से अनुबंध समाप्त कर दिया है। इसके बाद अगली पेशी में विभाग के सचिव एनपी डेहरिया ने जवाब में यह कहा कि एमपी एग्रो की व्यवस्था चल रही है। इन दो जवाबों के बाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव को पेशी पर तलब किया था।

पोषण आहार का क्या होगा?
विभाग की ओर से बताया गया है कि सरकार अब एमपी एग्रो से पोषण आहार नहीं लेगी। ये फैक्ट्री बंद हो गई है। अब विभाग उलझ गया है कि पोषण आहार कैसे बंटेगा। अफसर लंबे समय से कई तर्क के बहाने एमपी एग्रो के माध्यम से ही सप्लाई पर अड़िग रहे हैं। इसके चलते स्वयं सहायता समूहों के जरिए पोषण आहार अभी तक अधर में है। हाईकोर्ट में वितरण के लिए तत्कालिक व्यवस्था करने का तर्क दिया गया है, लेकिन विभाग के पास इसका कोई इंतजाम नहीं है। पोषण आहार का स्टॉक मुश्किल से 15 दिन तक का रहता है। ऐसे में नए टेंडर और शार्ट टर्म टेंडर निकालने का रास्ता होगा। इसके जरिए भी निजी कंपनियों को दोबारा मौका देने की कवायद वापस हो सकती है।

नई व्यवस्था के लिए हाईकोर्ट से मार्गदर्शन लेंगे

एकीकृत बाल विकास सेवा के कमिश्नर संदीप यादव के मुताबिक, एमपी एग्रो के माध्यम से पोषण आहार वितरण नहीं होगा। इसकी फैक्ट्री गुरूवार से बंद हो चुकी है। पोषण आहार की नई व्यवस्था के लिए हाईकोर्ट से मार्गदर्शन लिया जाएगा।