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एक करोड़ खर्च, लेकिन 2 साल बाद भी बेनजीर को नहीं मिला हैरिटेज लुक

पुराने शहर के ऐतिहासिक बेनजीर भवन को दो साल बाद भी हैरिटेज लुक नहीं मिल सका है।

Danik Bhaskar | Nov 23, 2017, 07:10 AM IST

भोपाल. पुराने शहर के ऐतिहासिक बेनजीर भवन को दो साल बाद भी हैरिटेज लुक नहीं मिल सका है। मप्र पर्यटन विकास निगम ने दो साल पहले भवन को मूर्त रूप देने के नाम पर एक करोड़ रुपए खर्च दिए और काम अधूरा छोड़ दिया। परिसर में ग्वालियर और सागर से आए कलाकारों द्वारा की गई नक्काशी अब धूल खा रही है। अफसरों का कहना है कि बेनजीर को हैरिटेज लुक देने का काम तब ही शुरू पाएगा जब गांधी मेडिकल कॉलेज परिसर में पार्किंग की व्यवस्था होगी, क्योंकि बेनजीर परिसर के आसपास पार्किंग के लिए जगह नहीं है।

- ऐसे में रिनोवेशन का काम शुरू नहीं किया जा सकता। मप्र पर्यटन विकास निगम ने ढाई साल पूर्व भवन की क्षतिग्रस्त हो चुकी दीवारों व भवन परिसर के एक बड़े हाल में लकड़ी के दरवाजों व अंदरूनी भाग में नक्काशी का काम भी हुआ। इसके लिए ग्वालियर और सागर से आए कलाकार आए थे।

भवन में 12 कमरे और दो बड़े हॉल

बेनजीर भवन में करीब 12 कमरे व दो बड़े हॉल हैं। इनमें से कुछ कमरे निर्वाचन आयोग व लोक निर्माण विभाग के पास हैं। बेनजीर भवन का निर्माण 1877 में नवाब शाहजहां बेगम ने समर रेस्ट हाउस के रूप में कराया था। इस भवन का प्रवेश द्वार मेहराबनुमा हैं। भवन में छोटे-छोटे कमरे हैं। बाहरी दरवाजों के ऊपर गुंबददार छतरियां हैं। भवन परिसर के मैदान में 1929 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जनसभा हुई थी।

जीएमसी परिसर में जमीन मांगी है
- बेनजीर भवन के आसपास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। इसलिए हैरिटेज लुक देने का काम बंद है। जीएमएसी परिसर में पार्किंग के लिए भूमि आवंटित करने के प्रयास हो रहे हैं। जैसे ही भूमि बोर्ड को आवंटित हो जाएगी उसके तीन माह के बाद टेंडर जारी हो जाएंगे और काम शुरू होगा।
एके राजौरिया, संचालक, मप्र टूरिज्म बोर्ड

इसलिए रुका काम
- सूत्रों का कहना है कि बेनजीर भवन को हैरिटेज लुक देने की केंद्र सरकार की जिस योजना के तहत राशि स्वीकृत हुई थी वो योजना ही केंद्र सरकार ने बंद कर दी। लिहाजा बजट खत्म हो गया। अब मप्र पर्यटन विकास निगम ने भी प्लानिंग और बजट के लिए अलग से मप्र टूरिज्म बोर्ड बना दिया है। बेनजीर भवन के विकास का जिम्मा इसी बोर्ड के पास है।

- 2500 वर्गफट क्षेत्र में नक्काशी भवन के बड़े हाल में बीड़ के पिलर हैं। इनके आसपास लकड़ी पर नक्काशी की गई है। यहां के क्षतिग्रस्त और जल चुके दरवाजों व भवन की टूट चुकी दीवारों को मूल रूप दिया गया है। यहां मलबे के नीचे दबे दो फाउंटेन को भी निकाला गया व हमाम को संवारा गया है।