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​स्वच्छ सर्वे : बटन लाल दबाओ या पीला, फीडबैक पॉजिटिव ही जाएगा

ईवीएम मशीन को लेकर अक्सर आरोप लगते हैं कि बटन कोई भी दबाओ वोट किसी खास पार्टी को ही जाता है।

Dainik Bhaskar

Nov 26, 2017, 06:07 AM IST
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भोपाल . चुनाव में वोटिंग के लिए ईवीएम मशीन को लेकर अक्सर आरोप लगते हैं कि बटन कोई भी दबाओ वोट किसी खास पार्टी को ही जाता है। अब यह बात पब्लिक टाॅयलेट्स में लगी फीडबैक मशीन के लिए कही जा रही है। लाल या पीला बटन दबाने पर भी फीडबैक हरे बटन वाला ही यानी पाजिटिव दर्ज हो रहा है। फीडबैक मशीन में लाल बटन का अर्थ है कि टॉयलेट गंदा है, पीले बटन का अर्थ है कि टॉयलेट की सफाई औसत है। जबकि हरे बटन का मतलब है कि टाॅयलेट की सफाई से यूजर पूरी तरह संतुष्ट है। बीते तीन महीने में आए कुल 3400 फीडबैक में से महज 248 यानी 7 प्रतिशत ही निगेटिव रहे। जबकि इन टॉयलेट को देखकर इस फीडबैक पर सहज यकीन करना मुश्किल है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि मशीन से छेड़छाड़ की गई है। शौचालय के फीडबैक को स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में 16 अंक दिए गए हैं। ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छे अंक पाने और नंबर वन आने के लिए यह गड़बड़ी हो रही है। आरंभ संस्था के एक सर्वे के मुताबिक शहर के 80 प्रतिशत से अधिक शौचालयों में गंदगी का आलम है।

करीब तीन माह में कुल 3400 फीडबैक, इनमें से सिर्फ सात फीसदी ही निगेटिव

ऐसे खुली पोल.... छह नंबर स्थित सुलभ शौचालय
- गड़बड़ी की आशंका पर छह नंबर स्थित सुलभ शौचालय पर नजर रखी गई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दरअसल, यहां लगी मशीन पर लोग फीडबैक दर्ज ही नहीं कर रहे थे। जब इस संबंध में यहां तैनात केयर टेकर संदीप कुमार वर्मा से बात की गई तो उसने बताया कि मशीन में गड़बड़ी थी। यहां के सुपरवाइजर चुनमुन लाल मिश्रा ने कहा था कि कोई भी बटन दबाओ हरा ही दबता है। जब इस संबंध में दैनिक भास्कर ने मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान कर दिया गया है।
(बातचीत की रिकॉर्डिंग दैनिक भास्कर के पास मौजूद है।)

एक सर्वे के मुताबिक 80% टॉयलेट अस्वच्छ
आरंभ संस्था ने पिछले हफ्ते शहर के सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की बारीकी से जांच की। इसकी पूरी रिपोर्ट निगम अधिकारियों को सौंपी है। संस्था के जितेन्द्र परमार ने बताया कि शहर के सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों में सफाई की स्थिति बहुत ही दयनीय है। 80 प्रतिशत से अधिक शौचालयों में स्थित अनुकूल नहीं मिली। जो शौचालय साफ सुथरे मिले, उनमें नए शहर के प्रमुख स्थानों के शौचालय अधिक हैं।

निगम के पास है कंट्रोल
- मशीनों का इंस्टॉलेशन हमने किया है। लेकिन, इनका कंट्रोल नगर निगम के पास ही है। इस संबंध में निगम अधिकारी ही बता पाएंगे।
सुमित खोटे, इंजीनियर, बीएसएनएल

गड़बड़ी का सवाल ही नहीं
- सिर्फ पॉजीटिव फीडबैक दर्ज होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पूरा सिस्टम बना हुआ है। अगर ऐसा होता तो 248 निगेटिव फीडबैक दर्ज ही नहीं होते।
एमपी िसंह, अपर आयुक्त, बीएमसी

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