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हमीदिया की ब्लड बैंक में मशीनों पर धूल की परत, कैंसिल हो सकता है बैंक का लाइसेंस

रेफ्रिजेटर, डीफ फ्रीजर, खून की जांच में काम आने वाली स्लाइड और उपकरणों पर धूल की परत जमी है।

Dainik Bhaskar

Nov 30, 2017, 05:14 AM IST
Damage layer on machines in Hamidias blood bank

भोपाल. रेफ्रिजेटर, डीफ फ्रीजर, खून की जांच में काम आने वाली स्लाइड और उपकरणों पर धूल की परत जमी है। एक कर्मचारी 30-30 मिनट के अंतर से मशीनों को पोंछ रहा है। लैब टैक्नीशियन ब्लड को एक निश्चित तापमान पर सुरक्षित रखने के लिए रखे गए डीप फ्रीजर को साफ कर रहे हैं। कुछ के फिल्टर खराब हो गए हैं, जिनकी मरम्मत करने से सप्लायर कंपनी ने भी मना कर दिया है। यह स्थिति है हमीदिया की ब्लड बैंक की, जिसका लाइसेंस 31 दिसंबर को खत्म हो रहा है। इसके चलते 1 जनवरी से इसके कामकाज पर सवाल खड़े हैं।


- फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ड्रग्स एंड कास्मेटिक एक्ट के तहत ब्लड बैंक का लाइसेंस देती है। एक्ट में ब्लड़ बैंक के लाइसेंस के लिए डस्ट फ्री होना आवश्यक है।

- 2 हजार बिस्तर के मॉडर्न हॉस्पिटल की बिल्डिंग का निर्माण कार्य जारी रहने के कारण ब्लड बैंक में रखे उपकरणों तक धूल आ रही है।

- इसके अलावा ड्रिलिंग मशीनों से खुदाई से बैंक की दीवारें भी कमजोर हो गई है। इसी वजह से मंगलवार को ब्लड बैंक का छज्जा गिर गया था।


- इसके चलते फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से ब्लड बैंक का लाइसेंस रिन्यू नहीं होगा। इस स्थिति में ब्लड बैंक बंद होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

ब्लड बैंक की स्टोरेज क्षमता दो हजार यूनिट
- हमीदिया अस्पताल ब्लड बैंक की ब्लड स्टोरेज क्षमता 2 हजार यूनिट है।

- इस ब्लड बैंक से भोपाल के अलग - अलग अस्पतालों में भर्ती 22 हजार मरीजों को हर साल ब्लड दिया जाता है।

- इसमें से करीब 15 हजार यूनिट ब्लड उन मरीजों को दिया जाता है, जिनके पास ब्लड डोनर और ब्लड की प्रोसेसिंग फीस जमा करने का खर्च नहीं होता।

...तो निजी ब्लड बैंकों को होगा फायदा
- जीएमसी के पैथोलॉजी विभाग के सीनियर के मुताबिक ब्लड बैंक बंद हाेने की स्थिति में मरीजों को प्राइवेट बैंक जाना पड़ेगा।

- इसकी वजह अस्पताल के आसपास तीन किलोमीटर के दायरे में एक भी सरकारी ब्लड बैंक नहीं होना है।

- इससे एक ओर जहां परिजनों को प्रोसेसिंग फीस ज्यादा चुकाना पड़ेगी, वहीं दूसरी ओर उन्हें ब्लड़ के लिए परेशानी होगी।

बीमार होने की नौबत आ गई..

- यहां ब्लड देने पहुंचे कोलार निवासी कमलेश दुबे ने बताया कि ब्लड की जांच कराने के दौरान ही धूल के कारण गले में खराश पैदा हो गई है। लगता है इंफेक्शन हो गया।

- उनका कहना है कि वे अपने साथी को ब्लड देने आए थे। लगता है कि बीमार पड़ जाएंगे।

- वहीं मरीज के लिए ब्लड लेकर जा रहे अमरीश कतिया ने बताया कि कीचड़ की वजह से वे गिर गए थे। गनीमत है कि चोट नहीं आई।

डस्ट फ्री करने का कोई प्लान नहीं
- बैंक में ब्लड स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए जुलाई 2016 में हमीदिया के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. डीके पाल ने 50 लाख की मशीनें खरीदी थी।

- ब्लड बैंक में आ रही धूल के कारण यह उपकरण खराब हो गए हैं।

- कंपनी के सर्विस इंजीनियर्स की शिकायत के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने ब्लड बैंक को डस्ट फ्री बनाने के लिए कोई एक्शन प्लान नहीं बनाया है।

प्रोटोकॉल मेंटेन करना मुश्किल
- निर्माण के चलते यहां दिनभर धूल उड़ती है। इस कारण उपकरण भी खराब हो रहे हैं। धूल की वजह से प्रोटोकाल को मेंटेन करने में समस्या आ रही है। इस संबंध में अस्पताल के अधीक्षक और कॉलेज के डीन को लिखित में जानकारी दे दी है।
डॉ. यूएम शर्मा, प्रभारी, हमीदिया अस्पताल ब्लड बैंक

डीन स्तर पर हल होगी समस्या
- ब्लड़ बैंक में धूल और उससे उपकरण खराब होने की जानकारी हमीदिया अस्पताल अधीक्षक, जीएमसी कॉलेज डीन को दी है। ब्लड बैंक में धूल की समस्या का निराकरण कॉलेज डीन के स्तर पर होगा।
अमृता वाजपेयी, पीआरओ, हमीदिया अस्पताल

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Damage layer on machines in Hamidias blood bank
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