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इंदौर में 5 साल में ज्यादती के 1067 मामले, आरोपियों को सजा केवल 160 में

शहर में एक महिला से परिचितों ने गैंग रेप किया था, लेकिन उसने परिवार के डर से केस दर्ज नहीं करवाया।

Dainik Bhaskar

Nov 26, 2017, 07:15 AM IST
In Indore, 1067 cases of superstition in 5 years;

इंदौर. शहर में एक महिला से परिचितों ने गैंग रेप किया था, लेकिन उसने परिवार के डर से केस दर्ज नहीं करवाया। ये अकेला मामला नहीं है, जिसमें पीड़िता ने कार्रवाई के लिए कदम नहीं उठाया। इतना ही नहीं, ज्यादती के मामलों में पीड़िता रिपोर्ट दर्ज करवा भी देती है तो 80 फीसदी केस में कोर्ट में बयान बदल देती है। डायरेक्टोरेट ऑफ पब्लिक प्रोसिक्यूशन के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 2012 से 2016 के बीच पूलिस ने ज्यादती के 20871 मामलोें में चालान पेश किया। 3488 में ही सजा हुई। एडीजी महिला सेल अरुणा एम. राव का कहना है ज्यादती के सामान्य केस में अपराध सिद्ध होने की दर 34% है। एनसीआरबी की रिपोर्ट कहती है 97% केस में आरोपी करीबी होते हैं। इसलिए पीछे हट जाती हैं पीड़िताएं

चौतरफा दबाव
- पीड़िता पर घर वालों से लेकर समाज तक का दबाव रहता है। इसलिए महिलाएं पीछे हट जाती हैं।

15 दिन में पेश नहीं होता चालान
- ज्यादती के मामलों में 15 दिन में चालान पेश होना चाहिए, पर ऐसा नहीं होता। कोर्ट में सुनवाई टलती रहती है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट बंद
- फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई दो माह में पूरी करना जरूरी है, लेकिन इंदौर में 2015 से कोर्ट बंद है। 9266 केस पेंडिंग हैं।

अदालतें व वकील कम

1281
- मजिस्ट्रेट और 629 सेशन कोर्ट स्वीकृत हैं प्रदेश में, लेकिन हैं 1350 ही

1048
- सरकारी वकील हैं इन कोर्ट में, होना चाहिए वन कोर्ट-वन प्रॉसिक्यूटर

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In Indore, 1067 cases of superstition in 5 years;
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