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पीएमटी 2010, 2011 में भी हुई थी गड़बड़ी, व्यापमं ने STF को लिखा लेटर

योगेश पाण्डे | Last Modified - Nov 27, 2017, 03:19 AM IST

पीएमटी 2012 में सीबीआई की चार्जशीट के बाद व्यापमं महाघोटाले से जुड़ी पुरानी परतें भी उधड़ने लगी हैं।
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    भोपाल.पीएमटी 2012 में सीबीआई की चार्जशीट के बाद व्यापमं महाघोटाले से जुड़ी पुरानी परतें भी उधड़ने लगी हैं। वर्ष 2009 में डॉ. जगदीश सागर के व्यापमं के प्रिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा को कार गिफ्ट करने के सीबीआई के खुलासे से यह भी साफ हो गया है कि रैकेटियर और व्यापमं अधिकारियों की मिलीभगत सालों पुरानी है। घोटाला उजागर होने के बाद व्यापमं के तत्कालीन डायरेक्टर तरुण पिथौड़े ने वर्ष 2011 और 2010 की पीएमटी में गड़बड़ी पर एफआईआर के लिए एसटीएफ को पत्र भी लिखा था। इसके बावजूद एसटीएफ ने उस पर केस दर्ज नहीं किया।
    - क्या एसटीएफ ने जानबूझकर इन मामलों में केस दर्ज नहीं किया? इस सवाल पर सीबीआई के शीर्ष अधिकारी चुप हैं?

    - क्या सीबीआई इन मामलों की आगे जांच करेगी इस सवाल पर सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही वे किसी भी केस की जांच शुरू कर सकते हैं।

    - 15 जुलाई 2015 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एसटीएफ ने सीबीआई को कुल 185 मामले सौंपे थे। इन्हीं मामलों पर सीबीआई ने दोबारा एफआईआर दर्ज की।

    - सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि एसटीएफ को यदि पीएमटी 2010 और 2011 में गड़बड़ियों के साक्ष्य मिले थे तो उन्हें एफआईआर दर्ज करनी थी। उन्हें तो इसके लिए किसी कोर्ट से इजाजत लेने की भी जरूरत नहीं थी। हालांकि एसटीएफ के अधिकारी इस सवाल पर चुप हैं।

    फाइल तो दी, लेकिन कई जानकारियां छिपाईं

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई को जब व्यापमं घोटाले का केस ट्रांसफर किए गए तो सीबीआई ने एसटीएफ के जांच अधिकारियों से केस फाइल के साथ उससे जुड़ी हर जानकारी मांगी थी। उस वक्त भी एसटीएफ ने सीबीआई को यह नहीं बताया था कि पीएमटी के पहले के वर्षों में हुई गड़बड़ी के भी साक्ष्य मिले हैं। पीएमटी में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक मामला पहले से दर्ज था, फिर भी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के खिलाफ जांच आगे नहीं बढ़ाई गई। केस दर्ज करने के कई महीनों बाद तक सीबीआई केस समझने के लिए एसटीएफ अधिकारियों के लगातर संपर्क में थी। उस दौरान भी एसटीएफ अधिकारियों ने प्राइवेट कॉलेजों से जुड़ी जानकारियां साझा नहीं की। जून 2016 में कोचिंग संचालक रमेशचंद्र शिवहरे की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में सीबीआई को प्राइवेट कॉलेजों के खिलाफ कई अहम सुराग मिले।

    अधूरी जांच... पेंडिंग ही रह गईं मामले से जुड़ीं 1300 शिकायतें
    व्यापमं मामलों की सीबीआई जांच होने के बाद इससे जुड़ी कुल 1300 शिकायतें भी पेंडिंग ही रह गईं। एसटीएफ अधिकारी यह तर्क देते रहे कि इन शिकायतों की जांच चल रही थी, तभी यह मामला सीबीआई को चला गया। उन्होंने पूरे दस्तावेज सीबीआई को सौंप दिए थे। उधर सीबीआई का कहना है कि एसटीएफ को भी पता था कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिए थे, सीबीआई कोर्ट की इजाजत के बिना किसी भी केस में जांच दर्ज नहीं कर सकती।

    तर्क... एसटीएफ का काम जांच वापस लेने के बाद खत्म हो गया
    एसटीएफ की जांच की निगरानी के लिए गठित एसआईटी के चीफ जस्टिस चंद्रेश भूषण का कहना है कि एक हजार से ज्यादा शिकायतें पेंडिंग थीं। यह शिकायतें सीबीआई को सौंप दी गई थीं। इस पर आगे क्या हुआ, यह उनकी जानकारी में नहीं था। एसटीएफ से जांच वापस लिए जाने के बाद ही उनका काम खत्म हो गया था। जहां तक पेंडिंग शिकायतों की जांच का मामला है, उस पर आगे सीबीआई को काम करना था।

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Web Title: PMT 2010, 2011 Also Was A Disturbance
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