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एसपी ने किया सस्पेंड तो एसआई ने कहा- तुगलक हो गए हैं अधिकारी, मनचाहा फरमान सुना रहे हैं

राजधानी के थानों में हो रहे सीमा विवाद का मामला अब स्टेशन बजरिया थाने में सामने आया है।

Dainik Bhaskar

Nov 23, 2017, 06:53 AM IST
the officials are hearing the order

भोपाल . राजधानी के थानों में हो रहे सीमा विवाद का मामला अब स्टेशन बजरिया थाने में सामने आया है। रेलवे अस्पताल में गैंगमैन की मौत के बाद स्टेशन बजरिया थाने पहुंचे अस्पताल के कर्मचारी को देर रात साढ़े तीन बजे से सुबह साढ़े छह बजे तक स्टेशन बजरिया, हबीबगंज और गोविंदपुरा थानों के चक्कर लगवाए गए। हैरानी की बात यह रही कि तीनों ही थानों में मर्ग कायम नहीं हुआ। लापरवाही सामने आते ही एसपी साउथ ने वायरलेस सेट पर ही स्टेशन बजरिया थाने के एसआई रामगोपाल साठे को सस्पेंड करने के आदेश कर दिए। इसके विरोध में एसआई ने कहा है कि अधिकारी मोहम्मद बिन तुगलक हो गए हैं, मनचाहा फरमान सुना रहे हैं।

थाना प्रभारी से पहले एसपी को मिली जानकारी
- इस लापरवाही की जानकारी थाना प्रभारी डीपी सिंह तक पहुंचने के बजाए अफसरों तक पहुंच गई। एसपी साउथ राहुल लोधा ने बुधवार सुबह 9:10 बजे थाना प्रभारी से फोन पर बात की।

- एसआई की गलती सामने आई तो करीब पौने दस बजे एसपी ने वायरलेस सेट पर ही साठे को सस्पेंड करने का मौखिक आदेश कर दिया गया। दोपहर करीब दो बजे लिखित आदेश भी जारी हो गए।

- इस दौरान स्टेशन बजरिया पुलिस ने मृतक का पंचनामा बनाया। थाना प्रभारी के मुताबिक शांति बाई ने पति को लंबे समय से बीमार बताते हुए पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। उनकी दोनों किडनी खराब थीं और करीब एक साल से उनका इलाज जारी था।

एसआई ने कर्मचारी से कहा- हबीबगंज थाने चले जाओ
- रेलवे कॉलोनी, हबीबगंज निवासी 57 वर्षीय देशराज सिंह भोपाल में गैंगमैन थे। मंगलवार रात करीब दो बजे गंभीर हालत में उनकी पत्नी शांति बाई उन्हें रेलवे अस्पताल लेकर पहुंचीं, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

- रात करीब तीन बजे अस्पताल से एक कर्मचारी को तहरीर (मौत की सूचना) लेकर स्टेशन बजरिया थाने भेजा गया। ड्यूटी पर तैनात सब इंस्पेक्टर रामगोपाल साठे रेलवे अस्पताल पहुंचे।

- डॉक्टरों से बातचीत करने के बाद साठे ने कर्मचारी को घटनास्थल हबीबगंज थाने का होने का हवाला देकर लौटा दिया। कर्मचारी हबीबगंज थाने पहुंचा तो वहां से भी उसे गोविंदपुरा और फिर वापस बजरिया थाने भेज दिया गया।

ये है शून्य पर केस दर्ज करने की हकीकत
- सुप्रीम कोर्ट, कानून में प्रावधान होने के बाद भी पुलिसकर्मी शून्य पर केस दर्ज करने से क्यों बचते हैं। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि एसआई साठे की नाइट ड्यूटी के साथ ही संभागीय गश्त थी।

- इसमें स्टेशन बजरिया के साथ अशोका गार्डन और एमपी नगर थाने की गश्त भी शामिल थी। उनके अनुसार घटना की सूचना उन्हें बुधवार सुबह चार बजे मिली। वे अस्पताल गए, लेकिन कार्रवाई नहीं की।

- इसकी मुख्य वजह ड्यूटी का समय था। उनकी ड्यूटी मंगलवार रात दस बजे से बुधवार सुबह दस बजे तक थी। शून्य पर कायमी करने के चलते उन्हें पंचनामा बनाने से लेकर पोस्टमार्टम और अन्य कागजी कार्रवाई करनी पड़ती। इसमें पूरा दिन भी लग सकता था। इसलिए वे शून्य पर कार्रवाई करने से बचते रहे।

अकेली मेरी जिम्मेदारी थोड़े ही थी, गोविंदपुरा और हबीबगंज पुलिस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई

- मूलतः खंडवा निवासी रामगोपाल साठे (52) पुलिस लाइन से एक साल पहले ही प्रमोशन के बाद स्टेशन बजरिया थाने पदस्थ हुए थे। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा कि ‘अधिकारी मोहम्मद तुगलक हो गए हैं।

- मनचाहा फरमान निकाल देते हैं। रात में 12 बजे तक चैकिंग करवा रहे हैं। किसी की बोलने की हिम्मत नहीं होती। घटना स्थल हबीबगंज का था। मैंने हबीबगंज में हवलदार से बात भी की थी। उनके कहने पर उन्हें वहां भेज दिया था।

- उसके बाद उन्हें गोविंदपुरा भेज दिया गया। गोविंदपुरा से वापस मामला हमारे पास ही आ गया। मैं करीब साढ़े नौ बजे दोबारा अस्पताल पहुंचा। वहां बातचीत कर कार्रवाई कर ही रहा था कि इतने में वायरलेस सेट पर सुनाई दिया कि साठे को सस्पेंड कर दिया है।

- मैं वहां से अपने घर आ गया। अकेली मेरी जिम्मेदारी थोड़े ही थी। गोविंदपुरा व हबीबगंज थाना पुलिस की भी तो जिम्मेदारी बनती है। उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?’’

- प्रारंभिक तौर पर बजरिया थाने के एसआई रामगोपाल साठे की गलती पाई गई है। उन्हें शून्य पर कायमी करनी थी। उन्होंने शिकायतकर्ता को दूसरे थाने भेज दिया। उन्हें सस्पेंड कर दिया है। अब मामले में गोविंदपुरा व हबीबगंज थाना पुलिस की भूमिका की जांच की जा रही है। इसमें जो भी आएगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे।'

राहुल लोधा, एसपी साउथ

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