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पेंशन के लिए विश्वविद्यालयों को जमा करने होंगे 18 करोड़

पेंशन योजना चालू रखने के लिए यदि तय समय में राशि प्राप्त नहीं होती है तो सरकार विश्वविद्यालय की ब्लॉक ग्रांट से राशि का

Bhaskar News | Last Modified - Nov 15, 2017, 06:45 AM IST

  • पेंशन के लिए विश्वविद्यालयों को जमा करने होंगे 18 करोड़
    भोपाल.प्रदेश के विश्वविद्यालयों के रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन का मामला उलझने लगा है। आने वाले सालों में पेंशन का वित्तीय भार वहन करने के लिए वर्ष 2018 से प्रत्येक विश्वविद्यालय को तीन करोड़ के हिसाब से कार्पस फंड के लिए 18 करोड़ रुपए जमा करना होगा। पेंशन योजना चालू रखने के लिए यदि तय समय में राशि प्राप्त नहीं होती है तो सरकार विश्वविद्यालय की ब्लॉक ग्रांट से राशि काटने लगेगी।
    - उच्च शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि पेंशनधारियो को भविष्य में इस पेंशन फंड से किसी भी प्रकार का लाभ वित्त विभाग की अनुमति के बिना नहीं दिया जाएगा। सरकार विवि को सत्र 2018-19 की ब्लॉक ग्रांट तभी देगी, जब वे अपने हिस्से की राशि जमा करा देंगे।
    - सरकार के इस निर्णय के बीच पेंशनर्स का आरोप है कि हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और कैबिनेट के आदेश के बावजूद राज्य सरकार छह विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स को नियमानुसार भुगतान नहीं कर रही है। केवल उन्हीं पेंशनर्स को इसका लाभ दिया जा रहा है जिन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त किए हैं।
    - पेंशनधारियों ने इस मामले में कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विक्रम विवि पेंशनर्स समाज ने इस मामले में शासन को पत्र भी लिखा है।
    फंड से वहन होना है अप्रैल 2016 से पेंशन का भार
    - राज्य सरकार ने 1 जनवरी 2006 से विश्वविद्यालयीन पेंशनर्स को छठवें वेतनमान में पेंशन देने के लिए पेंशन मैनेजमेंट फंड बनाने की स्वीकृति उच्च शिक्षा विभाग को दी है। इसके तहत 1 जनवरी 2014 से कर्मचारियों से वेतन और महंगाई भत्ते व एजीपी पर 12 प्रतिशत राशि पेंशन फंड में नियोक्ता अंशदान के रूप में वर्ष 2044 तक जमा कराई जानी है।
    - साथ ही स्ववित्तीय कोर्स से प्राप्त राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा भी प्रत्येक विवि को इस फंड में जमा कराना जरूरी है। सरकार के फैसले के तहत 1 जनवरी 2006 से लेकर 31 मार्च 2014 तक की अवधि का आने वाला पेंशन का व्यय भार विश्वविद्यालयों को उठाना होगा। जबकि 1 अप्रैल 2016 से आगामी वर्षों में आने वाला व्यय भार विभाग द्वारा पेंशन फंड से वहन किया जाना है।
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