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नर्मदा की 87 खदानों से 2021 तक कांट्रेक्टर ही निकालेंगे रेत, ग्राम पंचायतें करेंगी खनन

नदियों से रेत निकालने का अधिकार ग्राम पंचायतों को देने वाली नई रेत नीति को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

Danik Bhaskar | Nov 15, 2017, 05:24 AM IST
भोपाल. नदियों से रेत निकालने का अधिकार ग्राम पंचायतों को देने वाली नई रेत नीति को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। लेकिन नर्मदा की 87 खदानों से 2021 तक कांट्रेक्टर ही रेत निकालते रहेंगे। हालांकि नर्मदा से खनन में मशीनों का उपयोग नहीं हो सकेगा। खनिज विभाग के सचिव मनोहर दुबे ने बताया कि नर्मदा नदी से रेत निकालने पर पांच माह से लगी रोक नई नीति लागू होने के साथ ही समाप्त हो जाएगी। चूंकि 87 खदानों के ठेके 5 साल के लिए नीलाम हो चुके हैं, इसलिए इनका संचालन 2021 के बाद पंचायतों के हाथ में जाएगा।
- नई नीति में खदानों के माइनिंग प्लान, पर्यावरण अनुमतियां व जलवायु संबंधी प्रमाण पत्र की जिम्मेदारी खनिज विभाग के पास ही रहेंगी।
- करीब 200 खदानों के माइनिंग प्लान बन चुके हैं। ये खदानें अगले सवा महीने में ग्राम पंचायतों को ट्रांसफर कर दी जाएंगी।
- बाकी की 800 खदानों को पंचायतों को सौंपने में छह माह का समय लगेगा।
- बता दें कि अवैध उत्खनन को रोकने के संबंध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश के बाद नर्मदा नदी की इन खदानों से रेत निकालने पर रोक लगाई गई थी।
रिटायर्ड एसएएस अफसरों की लेंगे सेवाएं
- जिन जिलों में 20 या उससे अधिक खदानें हैं, वहां जिला रेत प्रबंधकों की संविदा नियुक्ति की जाएगी।
नई नीति के मुताबिक रिटायर्ड राज्य प्रशासनिक सेवा (एसएएस) के अधिकारी, खनिज अथवा ग्राम निवेश सेवा के राजपत्रित अफसरों की सेवाएं ली जाएंगी। उन्हें 35 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा।
200 खदानें खनिज निगम से ग्राम पंचायत को सवा माह में हो जाएंगी ट्रांसफर
फैक्ट फाइल
- 1266 कुल रेत खदानें हैं मप्र में।
- 160 खदानें सिर्फ नर्मदा नदी में।
- 1106 खदानें अन्य नदियों पर संचालित।
ग्राम पंचायतें खनिज विभाग की सहमति से तय करेंगी रेट
- रेत की दरें खनिज विभाग की सहमति से ग्राम पंचायतें तय करेंगी। इसके लिए वित्त विभाग की अनुमति भी लेनी होगी।
- नई दरें हर तीन साल में तय की जाएंगी। इसके लिए खनिज विभाग की सहमति अनिवार्य होगी।
ठेकेदारों को 138 करोड़ रु. लौटाएगा खनिज निगम
- खनिज निगम ने 445 खदानें ऑनलाइन नीलाम की थीं। केवल 203 खदानों से परिवहन शुरू हो पाया है।
- शेष 242 स्वीकृत खदानों के 138 करोड़ रुपए सरकार के खजाने में जमा हैं। अब यह राशि निगम ठेकेदारों को लौटाएगा।