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आरटीआई का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए कर रहा है तो उसे जेल में क्यों नहीं डालते

Dainik Bhaskar

Nov 27, 2017, 03:30 AM IST

एक धारणा बन रही है कि सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) ब्लैकमेलिंग करने का सबसे अच्छा टूल है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है।

Why is RTI used for blackmailing, why not put him in jail?

भोपाल. एक धारणा बन रही है कि सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) ब्लैकमेलिंग करने का सबसे अच्छा टूल है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। दरअसल, ब्लैकमेलिंग उसी की होती है, जिसे राज खुलने का डर हो। यह कहना है रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और आरटीआई के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाली सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय का। उनका कहना है कि अगर कोई आरटीआई से जानकारी निकाल कर ब्लैकमेलिंग करने की गलत नीयत रखता है तो सरकारें कानूनी धारा का इस्तेमाल कर उस शख्स के खिलाफ कार्रवाई करें। एक कार्यक्रम में शिरकत करने भोपाल आईं अरुणा रॉय की भास्कर की विशेष बातचीत।

आंदोलन... लोकपाल के लिए जनता को लड़ाई लड़नी ही होगी

आरटीआई लागू हुए एक दशक से ज्यादा हो गया। यह अपने उद्देश्य में कहां तक सफल हुआ?
- आरटीआई कानून अपने उद्देश्य से कई गुना ज्यादा सफल हुआ है। देश में 60 से 80 लाख लोग हर साल आरटीआई का इस्तेमाल करते हैं। आरटीआई लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह शक्ति का विभाजन करता है और शक्ति के दुरुपयोग पर लगाम जरूरी है।
सरकारें और ब्यूरोक्रेसी मानती है कि आरटीआई ब्लैकमेलिंग का जरिया बन चुका है?
- यह सरकारों की गलतफहमी है। दरअसल, ब्लैकमेलिंग वहीं होती है, जहां सच छुपाया जाता है। आरटीआई लगाने वाले की नीयत गलत है तो सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा में कार्रवाई करना चाहिए। हमने यह महसूस किया है कि देशभर में ब्लैकमेलिंग जैसे केस एक प्रतिशत भी नहीं हैं।
ब्यूरोक्रेट्स आरटीआई का जवाब देने में सबसे ज्यादा रोड़े अटकाते हैं?
- सरकार के दो अंग हैं। ब्यूरोक्रेट्स और नेता। इन दोनों की मिलीभगत है। ब्यूरोक्रेट्स पर नियंत्रण नेता कर सकते हैं, लेकिन वे ही सूचना दिलाना नहीं चाहते हैं।
क्या आपको कोई ऐसा केस याद है, जिसका खुलासा आरटीआई से हुआ हो?
मुंबई का आदर्श घोटाला। व्यापमं घोटाला इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं।
- लोकपाल को लेकर अन्ना हजारे का आंदोलन महत्वपूर्ण था। फिर ये विफल क्यों हो गया?
- लोकपाल के लिए जनता को लड़ाई लड़नी ही होगी। लोकपाल लाने का आंदोलन इसलिए फेल हुआ, क्योंकि आंदोलन न तो गहराई में गया और न ही लोगों को ठीक से उसके बारे में समझा पाए।
क्या वजह कि आरटीआई लगाने वाले व्हिसल ब्लोअर्स पर लगातार हमले हो रहे हैं?
- व्हिसिल ब्लोअर्स कानून जल्द आना चाहिए। देशभर में 62 व्हिसिल ब्लोअर्स मारे गए हैं। उनको सुरक्षा की जरुरत है, क्योंकि ये लोग लोकतंत्र की रक्षा कर रहे हैं।

इलेक्टोरल बॉन्ड लोकतंत्र को गिरवी रखने की साजिश

- राजधानी आए सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे का कहना है कि राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने को उनके ही नेता इग्नोर कर रहे हैं। अब तो केंद्र सरकार ही यह प्रस्ताव ला रही है जिसमें इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक दलों को पैसा मिल सकेगा। यह लोकतंत्र को गिरवी रखने की साजिश है।

- इस बॉन्ड से यह पता नहीं चलेगा कि किससे कितना पैसा लिया और कितना दिया। यह एक बेयरर चैक की तरह होगा, जिसमें डोनेशन देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। यह काले कानून का बाप है।

- भास्कर से बात करते हुए डे ने कहा कि तीन साल हो चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार लोकपाल कानून नहीं ला रही है। आप देखिए 62 एक्टिविस्ट की हत्या हो चुकी है, इसलिए व्हिसिल ब्लोअर कानून जरूरी है।

- उन्होंने कहा हम यह मांग करते हैं कि हर विभाग का सामाजिक ऑडिट होना चाहिए। मेघालय ने जो कर दिखाया, वही दूसरे राज्यों के बाकी विभागों में भी लागू हो सकता है। किसी शिकायत पर जवाब नहीं मिले तो पेनाल्टी लगना चाहिए।

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