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150 दिन से लगातार मरीजों के परिजन को नि:शुल्क भोजन करा रहे शहर के 7 युवा​

Dainik Bhaskar

Nov 27, 2017, 04:52 AM IST

शहर के सात युवा लगातार 150 दिन से एमवाय अस्पताल आने वाले मरीजों के परिजन को नि:शुल्क खाना खिला रहे हैं।

7 young people from the city having free meals for the patients

इंदौर. शहर के सात युवा लगातार 150 दिन से एमवाय अस्पताल आने वाले मरीजों के परिजन को नि:शुल्क खाना खिला रहे हैं। इसके लिए रोजाना ये अपने व्यस्त समय में से डेढ़ घंटा निकालते हैं। युवाओं की इस सराहनीय पहल से शहर के कई बड़े उद्योगपति, कारोबारी, समाजसेवी और जन्मदिन या पुण्यतिथियों पर अपनों के लिए कुछ करने की मंशा रखने वाले 80 से ज्यादा लोग जुड़ गए हैं, जो अपनी तरफ भोजन उपलब्ध कराते हैं।

- ग्रुप से जुड़े विक्की मालवीय बताते हैं कि जून 2016 में जब वे दोस्त राहुल परुलकर, जय होलकर, पंकज मालवीय, गोविंद खलोटिया, गोरव वर्मा, महेंद्र सिंह चौहान और जिगर लश्करी के साथ काम निपटाकर ग्रुप में बैठे थे, तभी शहर के बाहर का एक परिवार गरीबी के कारण भोजन के लिए परेशान होता उन्हें नजर आया।

- ग्रुप के युवाओं ने उनसे बात की तो पता चला परिवार का इकलौता कमाने वाला बेटा गंभीर बीमारी से ग्रस्त है और वृद्ध मां-बाप व उनकी बेटी के पास इलाज तो घर चलाने के लिए रुपए नहीं थे। इस पर युवाओं ने उन्हें एकजुट होकर खाना खिलाया और अगले दिन भी मदद की।

- उसके बाद उस परिवार का बेटा ठीक होकर अपने गांव लौटा तो उन्हें दुआ देकर गया। इसी के बाद से इन युवाओं ने ठाना की वे शहर से बाहर के हर उस मरीज के परिजन को खाने की व्यवस्था करवाएंगे जो यहां किसी को नहीं जानते। इसके बाद इन्होंने रोजाना अपने खर्च को कम कर भोजन के लिए रुपए जुटाने शुरू किए। इसके बाद इस पहल से अन्य लोग भी जुड़ते गए।

इतने लोग जुड़े कि खाना लाने के लिए देना पड़ता है टोकन
- विक्की मालवीय बताते हैं उन्होंने ग्रुप का न तो कोई नाम दिया है न संस्था बनाई है। ग्रुप का उद्देश्य पब्लिसिटी पाना नहीं है, इसलिए हम सभी दोस्तों ने राहुल परुलकर के माता-पिता को हमारा मुखिया बना रखा है।

- उन्हीं की निगरानी में रोजाना रुपए जुटाकर घर के नीचे खाना बनाकर गरीबों व परिजन को वे खुद एमवाय अस्पताल में जाकर खिलाते हैं। इस पहल का मैसेज उन्होंने सोशल मीडिया पर डाला तो अन्य लोग भी इससे जुड़ने लगे। आज भोजन उपलब्ध कराने के लिए करीब सौ लोग उनसे जुड़ गए हैं, इसलिए अब किसे कब भोजन की व्यवस्था करना है, इसलिए लोगों को टोकन देते हैं।


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