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35 घंटे बोरिंग में रहे रोशन से मिलने उमड़े लोग, पढ़ाई का खर्चा उठाएंगे SDM

4 साल का रोशन अब पूरी तरह से स्वस्थ्य है। वह अपने परिजनों के बात करने के साथ ही खेलकूद भी रहा है।

dainikbhaksar.com | Last Modified - Mar 12, 2018, 04:41 PM IST

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    इंदौर। देवास के उमरिया गांव के बोरवेल से 35 घंटे बाद बाहर आए चार साल के मासूम रोशन से मिलने के लिए अस्पताल में लोगों की भीड़ उमड़ रही है। वहीं दूसरी ओर एसडीएम ने रोशन की बहादुरी की तारीफ करते हुए उसकी पूरी पढ़ाई का खर्चा उठाने की घोषणा की है। एसडीएम जीवन सिंह रजक का कहना है कि रोशन में गजब की जीवटता है। वो बच्चा बहुत आगे जाएगा। बच्चा जब तक पढ़ेगा मैं उसकी पढ़ाई का खर्चा उठाऊंगा।

    - अस्पताल में भर्ती रोशन से मिलने के लिए सोमवार सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चे में मिलकर हर कोई उसके साहक की तारीफ करना चाहता था। लोगों की उमड़ती भीड़ को देखकर प्रशासन ने बच्चे से मिलने पर रोक लगा दी है। प्रशासन का कहना है कि रोशन 35 घंटे बोरवेल में बिताकर आया है, उसे आराम की आवश्यकता है। उधर डॉक्टरों की टीम बच्चे पर नजर रखे हुए है। डॉक्टरों का कहना है कि सब कुछ ठीक रहा तो आज रात या कल सुबह तक रोशन को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

    बच्चे को बातों से बहलाया, बोला- नानी के यहां चलना है, रस्सी को हाथ में चूड़ी जैसे डाल लो

    - सेना के हवलदार अवतार सिंह और आपदा प्रबंधन के प्रधान आरक्षक धनेंद्र साहू को रोशन बाहर निकालने की जिम्मेदारी दी गई। दोनों बच्चे से लगातार बात करते रहे और आखिरकार उसे यह कहा गया कि तुझे नानी के यहां ले जाएंगे तू इस रस्सी को चूड़ियों की तरह पहन लो। वह मान गया तो उस सरफंदे को बोरवेल में डले नाइट विजन कैमरे की निगरानी के साथ कसना शुरू किया गया। हाथ अच्छी तरह से कसने के बाद उसे कमलांग मशीन से खींचकर बाहर निकाल लिया गया।

    27 फीट गहराई में फंसने, सांसें अटकने पर भी कहता रहा रोशन- बाहर आकर ट्रैक्टर लाएंगे

    - बोरवेल में फंसे रोशन की जीवटता भी कुछ कम नहीं रही। बीते 35 घंटों से वह जमीन से 27 फीट नीचे गहराई में फंसा हुआ था। इसके बावजूद चार साल के इस मासूम में हिम्मत नहीं हारी। अपने माता-पिता से बात करते हुए भी वह कभी घबराया नहीं, बल्कि कहता रहा कि जब मैं बाहर आऊंगा तो ट्रैक्टर लाएंगे। इस दौरान उसे 19 सिलेंडर ऑक्सीजन दी गई। कई बार ग्लूकोज भी दिया गया। वह बाहर आया तो होश में था और बातचीत कर रहा था।

    और छलक पड़े आंसू

    35 घंटे चले बचाव कार्य के बाद रोशन जैसे ही बोरवेल से बाहर निकला वैसे ही बचाव कार्य में लगे 200 अफसरों, कर्मचारियों और सेना के जवानों के चेहरे खिल उठे। बच्चे के गड्ढे से सकुशल बाहर निकलते ही खुशी से उसकी मां और पिता के आंसू छलक पड़े। उसकी सलामती की दुआ कर रहे लोगों ने भगवान का शुक्रिया अदा किया।

    गजब की जीवटता दिखाई रोशन ने

    बोरवेल में फंसे रोशन की जीवटता भी कुछ कम नहीं रही। बीते 35 घंटों से वह जमीन से 27 फीट नीचे गहराई में फंसा हुआ था। इसके बावजूद चार साल के इस मासूम ने हिम्मत नहीं हारी। इन
    दो दिनों में उसने कई बार अपने माता-पिता से बात की, लेकिन कभी घबराया नहीं, बल्कि
    कहता रहा कि जब मैं बाहर आऊंगा तो ट्रैक्टर लाएंगे। इस दौरान उसे 19 सिलेंडर ऑक्सीजन दी गई। कई बार ग्लूकोज भी दिया गया। नली के जरिए दूध भी पिलाया गया। रविवार रात जब वह बाहर आया तो होश में था और बातचीत कर रहा था।

    ऐसे चला ऑपरेशन बचाव

    - 10 मार्चकी सुबह 11.30 बजे - बोरवेल में गिरा था चार साल का मासूम बालक रोशन।

    - दोपहर 12 : बच्चे के बोरवेल में गिरने की जानकारी लगते ही बचाव कार्य शुरू।
    - दोपहर 1 बजे : आसपास के गांवों से बड़ी तादाद में लोग जुट गए और बचाव कार्य में सहायता करने की कोशिश करते रहे। महू से सेना को बुलाने का फैसला लिया।
    - दोपहर 3 बजे : दो पोकलेन मशीन बुलवाकर खुदाई की गई लेकिन पत्थर आने से खुदाई की गति धीमी हो गई।
    - शाम 5.30 बजे : कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचे।
    -शाम 6 बजे : भोपाल से सेना के इंजीनियरों का दल पहुंचा।
    - रात 9 बजे : बच्चे को 200 एमएल दूध दिया जा चुका था।
    - रात 10.45 बजे : पुन: बच्चे को ग्लूकोज नली के जरिए दिया गया।
    - रात 11.30 बजे : कलेक्टर ने कहा कि हमें अंदर और हार्डगिट्टी मिल रही है। इससे 1-1 फीट खुदाई में 30 मिनट तक लग रहे हैं। चार से 5 घंटे और लग सकते हैं पर कसर नहीं छोड़ेंगे।
    - रात 12 बजे : बच्चे का मूवमेंट जारी था। वह बातचीत भी कर रहा है।
    - रात 2ः30 बजे : बच्चेने ग्लूकोज पिया।


    11 मार्च

    सुबह 5 बजे : बालक को पुनः दूध दिया गया।
    - दोपहर 1 बजे : 25 घंटे बाद मां रेखा को पहली बार मौके पर लाया गया व बेटे से बात कराई गई और बच्चे का हौसला बढ़ाया गया।
    - दोपहर 2 बजे : अचानक बादल छाये तो सब घबराने लगे पर कुछ देर में बादल छट गए।
    - शाम 5 बजे : सेना ने 8 फीट लम्बी सुरंग की खुदाई 40 फीट गहरे गड् में उतरकर की।

    - शाम 7 बजे : मलबा निकालने के लिए सेना बाहर आई, जेसीबी से काम शुरू किया।
    - रात 10.30 बजे : आखिरकार बालक रोशन को रस्सी की सहायता से बाहर निकाला गया।

    मां ने बताया ऐसे हुआ था हादसा...

    बोरवेल में फंसे चार साल के मासूम बच्चे रोशन पिता भीम सिंह देवड़ा निवासी कानजीपुरा की मां रेखा बाई ने बताया कि शनिवार 10 मार्च 2018 को वह खेेेत में गेहूं कटाई का काम कर रही थी। पास ही के खेत में रोशन के पापा भी गेहूं कटाई का काम कर रहे थे। रोशन के साथ उसका बड़ा भाई नैतीक (6 साल) और दो साल का छोटा भाई चेतन पास ही में खेल रहे थे। रेखा बाई ने बताया कि खेलने के दौरान रोशन मेरे पास आया था, मुझे लगा कि पास में ही खड़ा है पलटकर देखा तो नैतीक और चेतन बोरिंग के पास थे लेकिन रोशन कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। बोरिंग के पास जाकर देखा तो उसमें से रोशन की रोने की आवाज आ रही थी।

    इन मशीनें का किया गया उपयोग

    - तीन पोकलेन, तीन जेसीबी। इनमें से एक पोकलेन में पत्थर फोड़ने की मशीन थी।

    -आपदा प्रबंधन दल हैम्बर ड्रिल मशीन, विक्टिम लोकेटिंग कैमरा, आस्का लाइट, डायमंड चैनसा, रोटरी रेस्क्युसा, इलेक्ट्रिक ड्रील मशीन आदि साथ लाई थी।

    - ऑक्सीजन सिलेंडर के अलावा ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर के जरिए ऑक्सीजन जनरेट कर बच्चे तक नली से पहुंचाई जा रही थी।

    सेना, आपदा प्रबंधन दल सहित 200 से ज्यादा अफसर-कर्मचारी

    - सेना के इंजीनियर विंग के कर्नल अजयकुमार शर्मा सहित 60 अफसर-जवान भोपाल से आए थे। भोपाल के राज्य आपदा आपातकालीन बल की 15 लोगों की टीम ने इंस्पेक्टर जीडी कपिल नागर के नेतृत्व में बेहतरीन काम किया।

    - काॅलेक्स स्ट्रक्चर सर्च एंड रेस्क्यु टीम, नर्सिंग असिस्टैंट, डॉक्टर्स, एमएफआर की टीमें भी मौजूद थी। कलेक्टर-एसपी सहित 50 से अधिक अफसर-कर्मचारी जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारी कर्मचारी भी लगातार 35 घंटे बचाव कार्य में जुटे रहे।

    पहले भी हो चुकी हैं एेसी घटनाएं


    28 जनवरी 2006 : इंदौर में तीन साल का दीपक 22 फीट गहरे गड्ढे में खेलते-खेलते अचानक गिरकर फंस गया। यह गड्ढा ट्यूबवेल लगाने के लिए खोदा गया था। हालांकि प्रशासन और गांव वालों की मदद से कई घंटे की मशक्कत के बाद दीपक को सकुशल बाहर निकाल लिया गया था।

    23 जुलाई 2006 : हरियाणा के कुरुक्षेत्र में प्रिंस नाम के 5 वर्षीय बच्चे के बोरवेल में गिरने की घटना ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। सेना की ओर से किए गए राहत कार्यने प्रिंस की जान भी बचा ली थी। बच्चे को बचाने के लिए ‘ऑपरेशन प्रिंस’ अिभयान चलाया गया था। सेना ने बड़ी सावधानी से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया और कुरुक्षेत्र के प्रिंस को बचा लिया गया।

    02 जनवरी 2007: झांसी के पास एक गांव में 30 फीट गहरे गड्ढे में फंसे ढाई साल के बच्चे की मौत हो गई थी।

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    रोशन की पढ़ाई का पूरा खर्च एसडीएम जीवन सिंह रजक उठाएंगे।
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    35 घंटे तक बोरवेल में रहा रोशन अब पूरी तरह से स्वस्थ्य है।
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    35 घंटे बाद सेना की मदद से बाहर आया रोशन।
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    इस बोरवेल में गिरा गया था रोशन।
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    35 घंटे बोरवेल के पास बैठे रहे पिता।
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    रोशन की 27 फीट की बोरवेल में फंसे रहने के दौरान की तस्वीर।
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    40 फीट का बोरवेल, 38 फीट तक पैरेलल खुदाई कर चुकी थी सेना
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    सुरंग बनाने के बीच एक मजबूत चट्‌टान आ गई है जिसे तोड़ने के लिए एक बार पुन: पोकलेन को लगाना पड़ा था।
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    4 साल के रोशन के रेस्क्यू में 200 अफसरों, कर्मचारियो और सेना के जवानों लगे थे।
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