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जरूरतमंद बेटियों की शादी और बच्चों की फीस भरने के बाद भी ‘नो-थैंक्स’

शहर के 42 युवा डॉक्टर, व्यवसायी, उद्योगपति और प्रोफेसरों ने जरूरतमंदों की मदद के लिए पहल की है।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 27, 2017, 04:56 AM IST

जरूरतमंद बेटियों की शादी और बच्चों की फीस भरने के बाद भी ‘नो-थैंक्स’

इंदौर.शहर के 42 युवा डॉक्टर, व्यवसायी, उद्योगपति और प्रोफेसरों ने जरूरतमंदों की मदद के लिए पहल की है। इन्होंने नो-थैंक्स के नाम से ग्रुप बनाया और इसी नाम से बैंक में अकाउंट भी खुलवाया। इसमें हर शख्स हर माह दो-दो सौ रुपए जमा करता है। एकत्रित राशि से गरीब बच्चों के लिए कॉपी-किताबें जुटाने से लेकर फीस तक भरी जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटी की शादी में मदद की जाती है।

- ग्रुप करीब एक साल से चल रहा है और 50 से ज्यादा जरूरतमंदों की मदद कर चुका है। ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि शुरुआत में ग्रुप ने करीब 10 हजार रुपए एकत्र किए। इससे 11 बच्चियों को कॉपी, किताबें और स्कूल ड्रेस दी गईं।

- ग्रुप के सुमित मिश्रा और डॉ. वैशाली बतोसिया ने बताया कि सभी लोग चाहते हैं कि लोगों की मदद करें, लेकिन कैसे? इसी के मद्देनजर ग्रुप शुरू किया गया। शुरुआत 200 रुपए से की। अब सभी हर महीने बड़ी राशि जमा करते हैं।

नाम तय करने में लगे दो माह

- प्रो. गगन राठौर, डॉ. निकुंज झा ने बताया कि जब ग्रुप शुरू करने का सोचा तो सबसे पहले नाम क्या रखें इस पर चर्चा हुई। लगातार चार बैठक के बाद भी नाम तय नहीं हुआ। सभी से चर्चा की, लेकिन नाम को लेकर आपसी सहमति नहीं बनती थी।

- एक दिन सभी आपस में चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान किसी सदस्य ने थैंक्स कहा। वहीं उसने बाद में किसी बात पर नो-थैंक्स। यहीं से ग्रुप का नाम भी तय हुआ कि हमें किसी तरह का धन्यवाद नहीं चाहिए। हम चाहते हैं लोगों की मदद करना, ताकि जो जरूरतमंद है वह समाज की मुख्य धारा से जुड़ सके।

ग्रुप से जोड़ रहे अन्य युवाओं को

- सुमित मिश्रा ने बताया कि पहले ग्रुप का प्रचार-प्रसार नहीं किया। हालांकि अब ग्रुप के बारे में अन्य युवाओं को भी बता रहे हैं। जो जरूरतमंदों की मदद के लिए जुड़ना चाहते हैं, उन्हें ग्रुप से भी जोड़ा जा रहा है। ग्रुप हर महीने अपनी एक बैलेंसशीट भी जारी करता है, जिसमें कितने रुपए आए, कितने खर्च हुए, ये ग्रुप से जुड़े लोगों तक पहुंचाते भी हैं।

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