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बीएस-4 गाड़ियां भी 2020 से नहीं बिक पाएंगी, ड्राफ्ट नोटिफिकेशन हुआ जारी

देश में प्रदूषण कम करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक बड़ा निर्णय लिया है।

Dainik Bhaskar

Nov 27, 2017, 04:34 AM IST
BS-4 trains will not be able to sell 2020, draft notifications continue

इंदौर . देश में प्रदूषण कम करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक बड़ा निर्णय लिया है। मंत्रालय ने इसी साल बीएस-3 वाहनों के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाई है, वहीं वर्ष 2020 में मंत्रालय बीएस-4 वाहनों पर भी रोक लगाने जा रहा है। इसके लिए मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। उल्लेखनीय है कि देश में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए लगातार उन्नत तकनीक के वाहनों को बाजार में लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के तहत बीएस-3 के बाद अब मंत्रालय ने बीएस-4 तकनीक के वाहनों पर भी रोक लगाने की तैयारी कर ली है।

- नोटिफिकेशन जारी करते हुए 1 अप्रैल 2020 से बीएस-4 तकनीक के वाहनों के निर्माण पर रोक लगाने की बात कही है। साथ ही 30 जून के बाद ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं किया जाएगा। वहीं वाहन निर्माता कंपनियां जिन वाहनों के चेचिस बनाती है, ऐसे वाहनों के निर्माण के बाद रजिस्ट्रेशन के लिए 30 सितंबर 2020 तक का समय दिया है। जल्द इस संबंध में मंत्रालय द्वारा फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।

सीधे बीएस-6 तकनीक लाने पर हो रहा विचार
- विशेषज्ञों के अनुसार बीएस यानी भारत स्टेज वाहनों की वह तकनीक है जो उनसे निकलने वाले प्रदूषण को कम करती है। इस पर लगातार काम चलता है और लगातार नई स्टेज के वाहनों को बाजार में लाते हुए पुराने वाहनों के बंद किया जाता है।

- बीएस-3 वाहनों से निकलने वाला धुआं ज्यादा प्रदूषित और कई गंभीर रोगों का कारण बताया जाता था, वहीं बीएस-4 वाहनों से निकलने वाला धुआं ज्यादा प्रदूषण नहीं फैलाता है।

- बीएस-3 को बंद किए जाने के बाद कहा जा रहा था कि अभी बीएस-4 चलन में है और जल्द बीएस-5 तकनीक को लाया जाएगा। लेकिन कुछ समय पूर्व ही केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने कहा था कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बीएस-5 के बजाए सीधे बीएस-6 तकनीक के वाहनों को लाया जाएगा।

उन्नत तकनीक के वाहनों के निर्माण के संकेत
- विशेषज्ञों के मुताबिक शासन द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर सभी वाहन निर्माता कंपनियों को स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वे अभी से बीएस-4 से उन्नत तकनीक के वाहनों के निर्माण पर काम शुरू कर दें। बताया जा रहा है कि इसके लिए ईंधन कंपनियां भी अपने उत्पादों में बड़े बदलाव कर सकती है, क्योंकि नई तकनीक के वाहनों के लिए पेट्रोल और डीजल भी सामान्य से बेहतर लाना होंगे।

एक दिसंबर से कार सहित बड़े वाहनों पर लगकर आएगा फास्टैग स्टीकर, टोल टैक्स अपने आप कटेगा

- 1 दिसंबर से इंदौर सहित देश के सभी शहरों में बिकने वाली कारों के साथ ही अन्य बड़े वाहनों में फास्टैग स्टीकर लगा मिलेगा। इस स्टीकर के होने से वाहन जब टोल से गुजरेगा तो अपने आप उसका शुल्क कट जाएगा।

- इसे प्रीपेड कार्ड की तरह वाहन मालिक को रिचार्ज करना होगा। इंदौर में आने वाले नए वाहनों में यह स्टीकर लगकर आने लगा है, वहीं पहले से आ चुके वाहनों के लिए कंपनियों ने अलग से स्टीकर भी भेजे हैं।

- विदेशों में टोल टैक्स वसूली के लिए लंबे समय से इस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। इसके तहत वाहनों पर स्टीकर लगाए जाते हैं जिसमें एक चिप लगी होती है। प्रीपेड मोबाइल सिम की तरह वाहन मालिक को इसे रिचार्ज करना होता है।

- इसके बाद जब वाहन टोल से गुजरता है तब उस पर लगे सेंसर स्टीकर पर लगी चीप को ट्रेस कर शुल्क काट लेते हैं। भारत में भी टोल पर लगने वाली लंबी कतारों को देखते हुए शासन ने कुछ समय पूर्व वाहनों के लिए फास्टैग स्टीकर की व्यवस्था शुरू की थी।
इसके तहत सभी टोल कंपनियों को भी निर्देश दिए गए थे कि वे सभी टोल पर अलग से फास्टैग लेन बनाएं। कुछ बैंकों ने ऐसे स्टीकर भी तैयार किए और कई टोल नाकों पर अलग से लेन भी तैयार की गई, लेकिन अधिकांश लोगों द्वारा इसका इस्तेमाल न किए जाने से शासन ने कुछ समय पूर्व नोटिफिकेशन जारी कर 1 दिसंबर से सभी नए चार पहिया सहित अन्य बड़े वाहनों में कंपनी से ही फास्टैग स्टीकर लगाकर देने के आदेश जारी किए थे। इसके तहत इंदौर के सभी वाहन शोरूम पर कंपनी से आने वाले नए वाहनों में यह स्टीकर लगे हुए आने लगे हैं। वहीं जो वाहन पहले आ चुके हैं कंपनी उनके लिए अलग से स्टीकर भेजे रही है।

होगी करोड़ों की बचत
- केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने अपने एक बयान में कहा था कि देश में टोल पर लगने वाली कतारों पर हर साल वाहनों में 86 हजार करोड़ का ईंधन व्यर्थ जल जाता है। इसलिए ऑटोमेटिक टोल कलेक्शन पर शासन जोर दे रहा है।

- फास्टैग व्यवस्था उपलब्ध होने के बाद भी बहुत कम वाहनों द्वारा इसका इस्तेमाल किए जाने के कारण टोल पर वाहनों की कतारें कम नहीं हो रही हैं। लेकिन नए वाहनों में इसके लगे होने से इसका इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे लोगों को सुविधा भी मिलेगी और ईंधन की बचत भी होगी।

शुल्क में 10 प्रतिशत की छूट
- विशेषज्ञों ने बताया कि फास्टैग लगा होने पर वाहन के टोल पर पहुंचते ही सेंसर उसे ट्रैस कर शुल्क काटकर अपने आप टोल गेट खोल देगा। इससे वाहन को टोल पर रुकना नहीं पड़ेगा। इससे समय की बचत होगी। इसके साथ ही बताया जा रहा है कि फास्टैग से शुल्क दिए जाने पर 10 प्रतिशत की छूट भी मिलेगी।

आरटीओ जांचेगा वाहनों के स्टीकर
- आरटीओ डॉ एम.पी. सिंह का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार अधिकांश कंपनियों द्वारा भेजे जाने वाले सभी नए चार पहिया सहित अन्य बड़े वाहनों में कंपनी से ही फास्टैग स्टीकर लगकर आने लगे हंै। जो पहले से बाजार में वाहन आ चुके उनके स्टीकर अलग से भेजे गए हैं, जिन्हें डीलर्स वाहनों पर लगाकर 1 दिसंबर से वाहन डिलीवर करेंगे। इसकी जानकारी डीलर्स द्वारा दी गई है। इसकी जांच रजिस्ट्रेशन के दौरान परिवहन विभाग द्वारा की जाएगी।

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