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यहां फेल स्टूडेंट बन गए जज, लॉ यूनिवर्सिटी ने दी फेल छात्रों को लॉ की डिग्री

भास्कर की पड़ताल में दो ऐसे नाम भी मिले जो बीए, एलएलबी की इसी गलत डिग्री का उपयोग कर जज की नौकरी भी पा गए।

Danik Bhaskar | Nov 17, 2017, 06:15 AM IST

इंदौर. भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) में फेल छात्रों को भी लॉ की डिग्री देने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पिछले 4 बैच के ऐसे 14 छात्रों के नाम सामने आए हैं। भास्कर की पड़ताल में दो ऐसे नाम भी मिले जो बीए, एलएलबी की इसी गलत डिग्री का उपयोग कर जज की नौकरी भी पा गए। चयनित जजों में से एक भानु पंडवार (2015 बैच) की पोस्टिंग तो छिंदवाड़ा में हो भी चुकी है। वहीं इसी वर्ष सिविल जज-2 के पद (2016 बैच) पर चयनित अमन सूलिया की पोस्टिंग होनी बाकी है।


संस्थान के डायरेक्टर एसएस सिंह ने भी स्वीकार किया है कि रिजल्ट तैयार करने में गड़बड़ी के साक्ष्य मिले हैं। उनकी रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट जस्टिस ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय गोहिल को जांच का जिम्मा सौंपा है। गलत ढंग से डिग्री देने का खुलासा खुद विश्वविद्यालय की आंतरिक कमेटी की जांच रिपोर्ट में सामने आया। प्रो. घयूर आलम, प्रो. यूपी सिंह और लाइब्रेरियन छत्रपाल सिंह की तीन सदस्यीय कमेटी ने पाया कि पिछले चार सत्रों में 14 ऐसे छात्रों को डिग्री दी गई है, जो कई विषयों में फेल थे।

प्रारंभिक जांच में 2015 के 5 , सन 2014 के 1 छात्र, सन 2014 के तीन और 2013 के एक छात्र को गलत ढंग से डिग्री देना पाया गया है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद रिजल्ट तैयार करने का जिम्मा देख रहे असिस्टेंट रजिस्ट्रार (परीक्षा) रंजीत सिंह को निलंबित कर दिया गया। एनएलयू के ही अंदरुनी सूत्रों के मुताबिक यदि पिछले सभी बेच की जांच हो तो यह संख्या इससे कहीं ज्यादा निकलेगी। संस्थान की अंदरुनी जांच में मिले पुख्ता तथ्यों के बाद रिटायर हाई कोर्ट जस्टिस को जांच का जिम्मा सौंपा गया है।


सुप्रीम कोर्ट करवा रहा जांच
एनएलयू भोपाल के डायरेक्टर ने कमेटी की रिपोर्ट विजिटर सुप्रीम कोर्ट जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े को भेजी थी। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय गोहिल को जांच का जिम्मा सौंपा है। जस्टिस गोहिल ने भास्कर को बताया कि यह बहुत गंभीर मामला है। इसके साक्ष्य मिले हैं कि फेल छात्रों को भी असली डिग्री गलत ढंग से दे दी गई। अभी दस्तावेजों का परीक्षण चल रहा है।


देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में
सन 1997 में बना भोपाल का नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट युनिवर्सिटी देश के पहले 3 नेशनल लॉ स्कूलों में से एक है। इसमें क्लैट के माध्यम से प्रवेश मिलता है। यहां बीए एलएलबी से लेकर एलएलएम तक के कोर्स संचालित होते हैं। यह कितना महत्वपूर्ण संस्थान है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके वाइस चांसलर मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस इसके विजिटर होते हैं। फिलहाल यह जिम्मा सुप्रीम कोर्ट जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े के पास में है।

ऐसे दे दी फेल छात्रों को भी डिग्री
संस्थान में सेमेस्टर के बजाय ट्राइमेस्टर सिस्टम लागू है। ऑटोनॉमस दर्जा होने के चलते, परीक्षा लेने से लेकर रिजल्ट तैयार करने तक का काम यही होता है। डिग्री भी यही देता है। सालों से रिजल्ट टेबल तैयार करने और गोपनीय कार्यों का जिम्मा असिस्टेंट रजिस्ट्रार (एग्जाम) रंजीत सिंह के पास था। जब रिजल्ट की अंतिम टेबल तैयार हो जाती थी तो उसमें औपचारिक तौर पर प्रोफेसर यूपी सिंह के हस्ताक्षर होते थे। इसी फाइनल रिजल्ट टेबल के आधार पर डिग्रियां तैयार की जाती थी। फाइनल रिजल्ट टेबल तैयार करते समय फेल छात्रों को भी पास की कैटेगरी में रख दिया गया। इसके अलावा री-वैल्यूएशन में भी गड़बड़ी पाए जाने के प्रारंभिक साक्ष्य मिले हैं।

अब तक 4 साल के रिजल्ट में गड़बड़ी
मैंने पिछले 4 बेच के रिजल्ट की जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी। प्रथम दृष्टया असिस्टेंट रजिस्ट्रार(एक्जाम) रंजीत सिंह को गलत ढंग से रिजल्ट तैयार करने का दोषी पाया था। उन्हें निलंबित कर दिया गया है। मैंने यूनिवर्सिटी के विजिटर सुप्रीम कोर्ट जस्टिस शरद बोबड़े को रिपोर्ट दी थी, उन्होंने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय गोहिल को जांच सौंपी है।
प्रो. एसएस सिंह, डायरेक्टर, एनएलआईयू, भोपाल

प्रारंभिक जांच में पिछले चार बैच के 14 छात्रों के नाम सामने आए

अमन सूलिया : अभी पोस्टिंग होना बाकी

वर्ष 2014 के पास आउट अमन सूलिया इसी साल जज बने। अभी पोस्टिंग होनी बाकी है। 2016 में हुई सिविल जज की परीक्षा में भी बैठे थे, लेकिन इंटरव्यू से बाहर हो गए। 2017 में दूसरे प्रयास में (रोल नंबर 1586) 208 नंबर मिले और एसटी श्रेणी में जगह पा गए। यह भी पुराने ट्राइमेस्टर के कुछ विषयों में फेल थे। सूत्रों के मुताबिक वे एक विषय में परीक्षा में नहीं बैठने के बावजूद डिग्री हासिल करने में सफल रहे।

फेल छात्रों को दे दी डिग्री
जिन छात्रों को गलत डिग्री दी गई, उनमें से भानु पंडवार और अमन सूलिया भी हैं। दोनों को फेल होने के बावजूद डिग्री मिल गई। इसी का उपयोग कर वे जज बने हैं। ऐसे डिग्रीधारियों के कुछ बड़े प्रतिष्ठानों में भी काम करने की खबरें आई हैं। - जस्टिस अभय गोहिल ( रिटा.),
- सुप्रीम कोर्ट जस्टिस द्वारा गठित जांच कमेटी के अध्यक्ष