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मां के लिए मैं आज भी बच्चा हूं, इस एक्टर ने शेयर किए लाइफ एक्सपीरियंस

एक्टर बोमन इरानी इंटरनेशनल मोटोक्रॉस में शामिल होने इंदौर आए थे। इस दौरान उन्होंने अपने लाइफ के एक्सपीरियंस भी शेयर किए

Bhaskar News | Last Modified - Nov 26, 2017, 01:41 AM IST

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    इंदौर (मध्यप्रदेश) . एक्टर बोमन इरानी इंटरनेशनल मोटोक्रॉस में शामिल होने इंदौर आए थे। इस दौरान उन्होंने अपने लाइफ के एक्सपीरियंस भी शेयर किए। एक्टर बोमन इरानी बताया कि मेरी ज़िंदगी में मां, एक असाधारण महिला रही हैं। वो सिर्फ तीस साल की थीं जब मेरे फादर की डेथ हो गई थी। तीन छोटी बेटियां, ढ़ेर सारा कर्ज और बेकरी शॉप की ज़िम्मेदारी उन पर आ गई। मैं तो तब पैदा भी नहीं हुआ था। इतनी परेशानियों के बाद भी उन्होंने हम सभी को पढ़ाया और बड़ा किया। 18 नवंबर को वे 90 साल पूरे कर चुकी हैं लेकिन उनके लिए मैं आज भी बच्चा ही हूं। यह बात उन्होंने सिटी भास्कर से कही। शूटिंग में शबाना को बैठाकर बिना ब्रेक का स्कूटर चलाया....

    - उन्होंने बताया कि, सुपरक्रॉस बाइकिंग इवेंट में आया ज़रूर हूं लेकिन खुद मुझे टूव्हीलर चलाना पसंद नहीं। फिल्मों में भी हनीमून ट्रेवल्स में एक बार शबाना आज़मी को बैठाकर टू व्हीलर चलाया था बस। उसके ब्रेक खराब थे।

    - हालांकि फोटोग्राफी प्रोफेशन में मेरी पहली कमाई मोटोक्रॉस रेस से ही हुई थी। उन्हीं पैसों से ही मुझे फोटोग्राफी करने का मोटिवेशन मिला था। स्पोर्ट्स कवर करने के दौरान कई सारी मोटोक्रॉस रेसिंग में गया हूं।

    - ये एक ऐसा फील्ड है, जहां आप अपनी स्किल्स को बेहतर ढंग से दिखा सकते हैं। मैं यंगस्टर्स से यही कहना चाहूंगा कि सड़कों पर स्टंट कर लोगों की जान खतरे में डालने की जगह मोटोक्रॉस जैसी इवेंट में अपना टैलेंट दिखाएं।

    सगाई की तरह है फिल्म साइन करना

    - मैं वही फिल्में सिलेक्ट करता हूं कि डायरेक्टर को ये पता है कि या नहीं कि वो क्या बनाना चाहता है। फिल्म बनाने का मकसद क्या है?

    - फिर इससे फर्क नहीं पड़ता कि फिल्म सीरियस है या एंटरटेनर। मेरे लिए स्क्रिप्ट बहुत ज़रूरी चीज़ है। इसके अलावा मैं यह भी देखता हैं कि फिल्म प्रोजेक्ट से अच्छे लोग जुड़े हैं कि नहीं।

    - फिल्म साइन करना मंगनी करने जैसा है। आपको उन लोगों के साथ छह या आठ महीने रहना पड़ता है। मैं उन्हीं के साथ फिल्में करता हैं जिन्हें पसंद करता हूं।

    स्क्रिप्ट राइटर्स को सम्मान और पैसा मिलना चाहिए
    - हिंदुस्तानी फिल्मों ने टेक्निकल लेवल पर बहुत तरक्की की है। फिल्म सिर्फ स्पेशल इफेक्ट्स से नहीं बनती, इसके लिए अच्छा कंटेंट ज़रूरी है।

    - स्कूल्स और यूनिवर्सिटी में स्क्रिप्ट राइटिंग के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। बिना ट्रेनिंग लिए कुछ अच्छे स्क्रिप्ट राइटर्स बेहतर लिख कर रहे हैं।

    - उन्हें अच्छा पैसा, मान-सम्मान दिया जाना चाहिए।

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