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M Learning ने बदला एजुकेशन पैटर्न, घर बैठे बच्चे बनते हैं डॉक्टर -इंजीनियर

The Visionaries of Madhya Pradesh में हम आपकी मुलाकात आज M Learning के फाउंडर और चीफ मेंटर संदीप गुप्ता से करा रहे हैं।

Danik Bhaskar | Nov 28, 2017, 10:14 AM IST

इंदौर. शिक्षा, हमेशा से समाज की खास जरुरत रही है। पौराणिक काल से मानव और समाज के विकास के लिए इसे सबसे जरुरी तत्व माना गया है। समय के साथ शिक्षा और शिक्षा ग्रहण के तौर-तरीकों में बदलाव आया है और इसी वजह से यह सभी के लिए साध्य बन पाई है। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए कुछ शिक्षक नित-नए प्रयोग करते हैं, जिसका सीधा फायदा छात्रों को होता है। इंदौर में एक ऐसा ही संस्थान है, जिसने नई तकनीकी पद्धति के ज़रिए शिक्षा ग्रहण करने के पारंपरिक तरीके को ही बदल कर रख दिया। M Learning (मोबाइल लर्निंग) ऐसा ही एक उत्कृष्ट संस्थान है, जिसकी ख्याति मध्यप्रदेश ही नहीं, देश के दूसरे राज्यों और विदेशों में भी फैली हुई है। यहां पढ़ने वाले बच्चे घर बैठे वीडियो लैक्चर्स के ज़रिए न सिर्फ सुविधाजनक पढ़ाई करने में सक्षम हो सके हैं, बल्कि इंजीनियर और डॉक्टर भी बन रहे हैं।

वर्चुअल एजुकेशन कॉन्सेप्ट के ज़रिए यह कमाल संभव हो सका है। अब बिना स्कूल-कॉलेज या कोचिंग सेंटर गए बच्चे घर बैठे अपने लैपटॉप, डेस्कटॉप, टैबलेट या मोबाइल फोन के जरिए वीडियोज़ देखकर मैथ्स और साइंस को समझ सकते हैं। इंदौर स्थित M Learning का वचुर्अल एजुकेशन में कोई सानी नहीं। यहां के स्टूडेंट्स वीडियो लेक्चर्स के ज़रिए बेस्ट टीचर्स द्वारा आइआइटी-जेईई, एनईईटी जैसे एक्ज़ाम की तैयारी कर सकने में सक्षम हो जाते हैं।

The Visionaries of Madhya Pradesh सीरीज में हम आपकी मुलाकात आज M Learning के फाउंडर और चीफ मेंटर संदीप गुप्ता से करा रहे हैं। वह मध्यप्रदेश की उन शख्सियतों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है और देश और दुनिया में मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया है।

पढ़ाने की ललक थी, इसलिए छोड़ी मल्टीनेशनल कंपनी

संस्थान के फाउंडर डायरेक्टर और चीफ मेंटर संदीप गुप्ता के मुताबिक, हम बच्चों को नई तकनीक से इस लायक बनाने की कोशिश करते हैं कि वे किसी पर भी आश्रित न रहे। इससे वे आत्मनिर्भर तो बनते ही हैं उनमें अलग तरह का आत्मविश्वास भी पैदा होता है।

- गुप्ता सर जब खुद 7वीं क्लास में थे यानी महज 13 साल के थे, तभी से पढ़ा रहे हैं।

- 1997 में IIT खड़गपुर से B.Tech (Hons.) करने के बाद एम-लर्निंग की इंदौर में नींव रखी।

- ग्रैजुएशन के बाद उन्हें मल्टीनेशनल कंपनी 'प्राइस वॉटरकूप' का जॉब ऑफर हुआ था, लेकिन उनके मन में पढ़ाने की ललक थी इसलिए उसे छोड़ दिया।

- बीते 20 सालों से आइआइटी-जेईई और मेडिकल एंट्रेस एक्जाम की तैयारी करा रहे हैं।

- 2011 में उन्हें वीडियो लेक्चर्स का आइडिया आया, जिसके बाद उन्होंने कुछ टैबलेट पीसी खरीदे, उसमें वीडियोज अपलोड करे और प्रयोग के तौर पर कुछ बच्चों को दिए।

- इसका जो फीडबैक या रिस्पॉन्स मिला, वो शानदार था। बच्चों ने बताया कि उन्हें यह अहसास ही नहीं हुआ कि वो क्लास में नहीं है बल्कि ये उनके लिए बेहद सुविधाजनक था।

- बच्चों के इस फीडबैक के बाद ही गुप्ता सर ने ये कॉन्सेप्ट और बच्चों तक भी पहुंचाने का फैसला लिया।

- हालांकि उन्हें जल्द ही समझ आ गया कि यह आसान नहीं है क्योंकि लॉन्च के वक्त मोबाइल और टैबलेट पीसी कम इस्तेमाल होते थे और इसी वजह से इसका उपयोग भी कम था।

- शुरुआत में बच्चे और उनके माता-पिता भी पूछते थे कि इस तरह कैसे बच्चे पढ़ सकेंगे और अगर उन्हें कुछ समझने में दिक्कत आई, तो कैसे दूर की जाएगी। इस चिंता का निदान किया गया।

M Learning के बारे में

- एम-लर्निंग के 8वीं से 12वीं तक स्टूडेंट्स के लिए साइंस और मैथ्स के सभी टॉपिक्स वीडियो लेक्चर्स थ्योरी और कॉन्सेप्ट के साथ सभी स्टडी मटेरियल देने में सक्षम है।

- सभी वीडियो लेक्चर्स सीबीएसई और सभी स्टेट बोर्ड के सिलेबस पर बेस्ड है।

- घर बैठे सभी वीडियो लेक्चर्स स्टूडेंट्स के लिए मौजूद हैं। जिसे वे बिना किसी दिक्कत के अपनी सुविधानुसार देख, सुन और समझ सकते हैं।

- वीडियो लेक्चर्स की फैसलिटी उन बच्चों के लिए भी मददगार हैं जो सेंटर तक आ नहीं पाते या रिमोट एरिया में रहते हैं।

- इसी वजह से पिछले कई सालों से M-Learning देश को नई पीढ़ी के डॉक्टर्स और इंजीनियर्स देने में सक्षम हो सका है।

वीडियो में देखें- M-Learning की पूरी कहानी गुप्ता सर की जुबानी