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41 करोड़ के आबकारी घोटाले में 3 माह से फरार आरोपी राजू दशवंत ने सरेंडर किया

41 करोड़ से ज्यादा के घोटाले में फरार मुख्य आरोपी राजू दशवंत ने रविवार को खुद थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 27, 2017, 04:25 AM IST

  • 41 करोड़ के आबकारी घोटाले में 3 माह से फरार आरोपी राजू दशवंत ने सरेंडर किया

    इंदौर. आबकारी विभाग में ट्रेजरी के चालानों में हेर-फेर कर हुए 41 करोड़ से ज्यादा के घोटाले में फरार मुख्य आरोपी राजू दशवंत ने रविवार को खुद थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया।
    राजू सुबह 6 बजे अकोला से इंदौर आया और सीधे रावजी बाजार थाने पहुंच गया। उसने थाने के गेट पर तैनात संतरी योगेंद्र को कहा कि मैं राजू दशवंत हूं, पुलिस मुझे ढूंढ़ रही है, सरेंडर करने आया हूं। इस पर संतरी कुछ समझ नहीं पाया और उसने एएसआई मोइनुद्दीन शेख को बताया। शेख ने राजू की गिरफ्तारी लेकर उसे लॉकअप में बैठाया। वहीं बड़े अधिकारियों को सूचना दी तो वे भी फौरन थाने पहुंच गए। शराब ठेकेदार विजय श्रीवास्तव के यहां काम करता था.....

    - 41 करोड़ के आबकारी घोटाले के आरोपी राजू दशवंत ने भास्कर को पूछताछ में बताया कि घोटाला करने के लिए उसे एटीएम ग्रुप के अंश त्रिवेदी ने चालानों में हेर-फेर करना सिखाया था। एटीएम ग्रुप के साथ जुड़ने से पहले शराब ठेकेदार विजय श्रीवास्तव के यहां काम करता था। तब 12 हजार 500 रुपए वेतन मिलता था।
    - वहां चालान जमा करने और सेल्समेन का काम करता था। इसके बाद मंदसौर के एटीएम ग्रुप के इंदौर व सांवेर में आने की जानकारी मिली तो एक परिचित के माध्यम से उसकी मुलाकात अंश त्रिवेदी से हुई।

    - अंश ने 25 हजार सैलेरी पर रखा था। इसके बाद वर्ष 2015 में अंश की पिंगडमर और सांवेर वाली दुकान घाटे में जाने लगी तो उसने 50-50 हजार के पांच चालान बैंक में जमा करने को दिए थे।

    - वह बैंक में जब चालान जमा करवाकर आया तो उसकी एक कापी आबकारी विभाग में जमा करने जाने से पहले अंश ने कहा कि इन चालान में हेरफेर कर 12.50 लाख रुपए करवा दिया।

    - राजू ने भास्कर को बताया कि उसने ऐसा करने से अंश को मना किया तो उसने यह बोलकर टाल दिया कि अभी चालान जमा कर दो, एक-दो दिन में शेष रुपए जमा करवा देंगे। इसके बाद उसने उक्त चालान जमा कर दिए।

    दो दिन घबराहट में रहा, फिर करवाने लगा हेराफेरी

    - आरोपी राजू ने ये भी बताया कि पहली बार चालान में 10 लाख ज्यादा बढ़ाने पर उसे डर लगा और घबराहट के मामले वह दो दिन काम पर भी नहीं गया था। बाद में अंश ने उसे बुलाकर अच्छा कमिशन देने का बोलकर यह जादूगरी सिखा दी और वह कई चालानों में हेर-फेर कर राजस्व की चोरी करने लगा।

    - उसने बताया कि अंश की आबकारी विभाग में कई लोगों से अच्छी पहचान थी, इसलिए फर्जीवाड़े के बाद भी कुछ अधिकारी चुप रहे। न ट्रेजरी व बैंक चालान से मिलान किया। इसके बाद अंश ने आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर घाटे में चल रही शराब ठेकेदारों की दुकानें चलाने की भी सेटिंग जमा ली।

    - जिसकी दुकान घाटे में चलती थी आबकारी अधिकारी उसकी दुकान का संचालन एटीएम ग्रुप को देने लगे। राजू ने ये भी बताया कि आबकारी अधिकारियों को दबाव रहता था कि कोई दुकान घाटे में न चले और उनका टारगेट अच्छे से पूरा हो, इसलिए वे शराब ठेकेदारों पर भी दुकान सरेंडर न करने और उसे दोबारा टेंडर न निकालने के लिए दबाव बनाते थे।

    - इसी के चलते उनका ये रैकेट सक्रिय हो गया और कई घाटे में चल रहे शराब ठेकेदारों की दुकानें अंश त्रिवेदी ने लेकर चलाना शुरू कर दी। उनके चालानों में हेरफेर कर वे दुकानों को फायदे में दिखा देते थे।

    फरारी काटकर परेशान हो गया तो किया सरेंडर
    - आरोपी राजू ने कहा कि वह पुलिस से बचकर भाग-भाग कर हैरान हो गया था। उसका पूरा परिवार भी परेशान था, इसलिए उसने सरेंडर किया है। उसने बताया कि उसके पास सनसिटी का मकान और एक प्लॉट व कारें हैं, वह अंश की हैं उसी ने उसके नाम पर ये संपत्ति ली है।

    - उसने ये भी बताया कि नोटबंदी के तत्काल बाद ही उसने एक बेशकीमती प्लॉट भी उसके नाम पर खरीद लिया था। पूरे घोटाले का जिम्मेदार अंश ही है। उसने ब्लैकमेल कर वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के कई चालानों में अंक बढ़ाकर राजस्व की चोरी की है। सभी चालानों पर उसके हस्ताक्षर हैं।

    फ्लैशबैक...8 अगस्त को उजागर हुआ था घोटाला
    - 8 अगस्त 2017 को तत्कालीन असिस्टेंट आबकारी आयुक्त संजीव दुबे ने इस घोटाले को जांच में उजागर होना बताया था। इस घोटाले में शासन को 41 करोड़ 74 लाख 73 हजार 647 रुपए के राजस्व।
    - कलेक्टर निशांत वरवरड़े ने शासन को हुए राजस्व के नुकसान पर आरोपी राजू दशवंत और अंश त्रिवेदी सहित 8 शराब ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज करवाने के आदेश दिए थे।
    - 11 अगस्त 2017 में कलेक्टर के आदेश पर आबकारी अधिकारियों के एक शिकायत आवेदन पर रावजी बाजार थाने में 8 शराब ठेकेदारों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया।
    - डीआईजी ने मामले में एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दिए तो 8 अन्य आरोपियों के नाम और सामने आए जिन्हें एफआईआर में आरोपी बनाया गया। सभी पर 20 हजार रुपये के इनाम घोषित किए गए।
    - रावजी बाजार पुलिस अब तक इस घोटाले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुका है।
    - घोटाले में अंश त्रिवेदी , सूर्यप्रकाश अरोरा, गोपाल शिवहरे, विजय श्रीवास्तव, जितेंद्र शिवरामें, लवकुश पांडे, अभिषेक शर्मा और राहुल चौकसे की गिरफ्तारी होना शेष है।
    - सभी फरार आरोपियों की संपति कुर्की के लिए पुलिस ने कोर्ट में आवेदन भी लगा दिया है। और संपतियों की जानकारी जुटा रही है।
    - घोटाले में आबकारी विभाग के 6 अधिकारी डी एस सिसौदिया, सुखनंदन पाठक, आर पी दुबे, जी पी एस सिकरवार, धनराज सिंह परमार और अनमोल गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बाद में सभी को सस्पेंड कर दिया था।
    - इसके अलावा जांच के बाद तत्कालीन असिस्टेंट आबकारी आयुक्त संजीव दुबे सहित तीन साल से ज्यादा शहर में रहे 14 अधिकारियों के ट्रांसफर भी कर दिए गए थे। इस घोटाले में अब तक 27 करोड़ की वसूली भी आबकारी विभाग कर चुका है।
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