--Advertisement--

राऊ-खलघाट के बीच चार किमी के घाट पर हादसे रोकने को बनेगा 7.1 किमी का बायपास

बीते दिनों कंसल्टेंट ने सर्वे कर बायपास का प्रस्ताव तैयार किया था जिसे अप्रूवल मिल गया है।

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2017, 06:19 AM IST
RAW-Khalghat will be able to prevent the accident

धार/इंदौर. आगरा-मुंबई (एबी रोड) नेशनल हाईवे के राऊ-खलघाट वाले हिस्से में सबसे बड़े एक्सीडेंटल जोन गणपति घाट पर हादसे कम करने के लिए 7.1 किलोमीटर का बायपास ( रिअलाइनमेंट रोड) बनेगा। इसके लिए एनएचएआई के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने मंजूरी दे दी है। बायपास निर्माण के लिए घाट के जंगल क्षेत्र में वन विभाग की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। 6 महीने में टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार हो जाएंगे। एनएचएआई के परियोजना निदेशक सुमित कुमार ने बताया कि बीते दिनों कंसल्टेंट ने सर्वे कर बायपास का प्रस्ताव तैयार किया था जिसे अप्रूवल मिल गया है।

आठ साल पहले राऊ से खलघाट तक फोरलेन बनाने के बाद से चार किमी के गणपति घाट (बाकानेर घाट) में हो रहे हादसों से इंजीनियरिंग पर उठ रहे सवालों से तंग आ चुके अफसर अब कोई जोखिम लेने के पक्ष में नहीं हैं, इसलिए दो किमी से ज्यादा दूरी बढ़ने पर भी बायपास को मंजूरी दे दी है। कंसल्टेंट को आगामी कार्रवाई के लिए आदेश दिए हैं।

- अब दो महीने में दस्तावेज तैयार होंगे, जिसमें पता लगेगा कि कितनी जमीन अधिग्रहण करनी होगी, सड़क का डिजाइन कैसा होगा। दस्तावेज तैयार कर दो महीने के भीतर जमीन अधिग्रहण के लिए वन विभाग को भेजे जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया में छह महीने लग सकते हैं।

स्पीड ब्रेकर व दीवार बनाई, हाईमास्ट व संकेतक लगाए, फिर भी नहीं रुके हादसे
- 2009 में फोरलेन निर्माण के बाद पौने दो किमी के घाट में ढलान ज्यादा हो गया है। ट्रैफिक ज्यादा है। रोजाना लगभग 9400 वाहन निकलते हैं। स्पीड ब्रेकर बनाने, हाईमास्ट लगाने, संकेतक लगाने, सुरक्षा दीवार बनाने जैसे तमाम उपाय करने के बाद भी यहां हर सप्ताह छोटा-बड़ा हादसा हो रहा है।

- इसी के मद्देनजर इस साल मई में एनएचएआई ने घाट में एक अलग बायपास बनाने का निर्णय लिया था। कंसल्टेंट एजेंसी नियुक्त की थी, जिसने सर्वे कर 7.1 किमी का बायपास बनाने का प्रस्ताव तैयार कर एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी को प्रस्तुत किया, जिन्होंने अलाइनमेंट को मंजूरी दे दी है।

निर्णय में देरी : अलग सड़क बनाने का उपाय खोजने में लगाए 9 साल

- फोरलेन बनने के बाद पहले तीन साल में लगातार मौतें घाट पर हुई थीं। घाट सुधार के लिए जनवरी 2014 में पहली बार 23 करोड़ रुपए का एस्टीमेट बनाया गया। इसमें ढलान कम करने, उतार वाली साइड में दो अतिरिक्त लेन और बनाने तथा वाहनों के कूद कर दूसरी तरफ जाने पर रोक लगाने के लिए डिवाइडर पर कांक्रीट रेलिंग बनाने का प्रस्ताव शामिल था। तीन साल में तीन बार रिवाइज्ड एस्टीमेट तैयार किया गया। लागत घटाकर पहले 14.09 करोड़ की गई, फिर 7.63 करोड़ कर दी गई लेकिन मंजूरी नहीं हुई। मई में 5 किमी के बायपास का प्रस्ताव बनाने पर काम चला, अब 7.1 किमी का बायपास बनाना फाइनल हुआ है।

इस साल 20 लोगों की मौत हो चुकी घाट पर

- 27 अक्टूबर को तीन हादसे हुए। एक ट्रक चालक जिंदा जल गया।
- सितंबर में तीन दिन में तीन हादसे हुए। विसर्जन के लिए जा रहे इंदौर के मालवीय नगर के युवक की बाइक हादसे में मौत हुई।
- 9 मई को कार दो ट्रकों के बीच फंसने से दूल्हे समेत 9 लोगों की मौत हो गई थी।

प्रक्रिया में लगेंगे 6 महीने
एनएचएआई के परियोजना निदेशक सुमित कुमार ने बताया कि 7.1 किमी के बायपास के प्रस्ताव का प्रजेंटेशन देखकर आरओ रीजनल ऑफिसर ने एप्रूवल दे दी है। जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव कंसल्टेंट तैयार करेगा। छह महीने में टेंडर अवॉर्ड हो पाएगा।

X
RAW-Khalghat will be able to prevent the accident
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..