--Advertisement--

जनता के सवाल- सांची के सीईओ बोले- मैं कायम हूं यानी दूध शुद्ध है

सांची दूध की शुद्धता और विश्वसनीयता पर उठे सवालों के जवाब जानने के लिए इंदौर दुग्ध संघ के सीईओ एएन द्विवेदी को बुलाया।

Dainik Bhaskar

Nov 23, 2017, 06:14 AM IST
Sanchis CEO says - I am standing i.e. milk is pure

इंदौर. सांची दूध की शुद्धता और विश्वसनीयता पर उठे सवालों के जवाब जानने के लिए इंदौर दुग्ध संघ के सीईओ एएन द्विवेदी को भास्कर ने न्यूज रूम बुलाया।भास्कर संपादकीय टीम से सीधी बात करते हुए बोले- सैंपल जांच में लापरवाही बरती जाती तो मैं आज इस कुर्सी पर नहीं होता।

सांची में मिलावट सामने आने के बाद भरोसा दरक गया है। घर में गृहिणी पूछने लगी है कि क्या सांची का दूध अब भी शुद्ध है?
गृहिणी और घर के हर सदस्य के मन में उभर रहे सवाल का जवाब मांगने के लिए भास्कर ने सांची के सीईओ एएन द्विवेदी को ही भास्कर न्यूजरूम बुलाया।
संपादकीय टीम के पत्रकारों ने हर सवाल का सीधा जवाब मांगा...

हर व्यक्ति का सवाल है कि सांची दूध में मिलावट है? केमिकल है? क्या मैं इस पर भरोसा कर उपयोग करूं?
- जवाब- सिस्टम में कई जरूरी सुधार किए हैं, ताकि कोई भी गड़बड़ी न हो। लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए अखबारों में विज्ञापन देकर बताया कि सांची की जांच रिपोर्ट में कोई केमिकल नहीं पाया गया। सीधे मुझसे बात करने के लिए नंबर भी दिया।

स्टेट फूड लैब ने सांची के दूध में मिलावट की बात कही है, जबकि सांची प्रबंधन मिलावट से इनकार कर चुका है ?
जवाब- हमने दूध में केमिकल की मिलावट से इनकार किया है। दूध में पानी जरूर मिला था। जानकारी थाने पर भी दी है। टैंकरों पर शिकायत के लिए नंबर भी लिखते हैं।

सुखविंदर उज्जैन में ब्लैक लिस्टेड था, पीथमपुर में भी केस दर्ज था, फिर क्यों उसे यहां कॉन्ट्रेक्ट दिया?
जवाब-
उज्जैन दुग्ध संघ में सुखविंदर के नाम से ब्लैक लिस्टेड का रिकॉर्ड नहीं है। निविदा पर कॉन्ट्रेक्ट दिया था।

सुखविंदर ने कहा कि वह तीन साल से ऐसा कर रहा था। कहा जा रहा है कि बिना सांची के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत के ऐसा नहीं हो सकता है?
जवाब-
मेरे रहते यहां ऐसी कोई घटना नहीं हुई है और यहां कोई एक व्यक्ति ही किसी एक काम को देखता हो ऐसा नहीं है जिससे मिलीभगत की बात कही जा सके। यहां अलग-अलग शिफ्टों में काम होता है। एक व्यक्ति द्वारा लिया गया दूध जब प्रोसेस में आता है तो तुरंत उसी समय पैकिंग में नहीं चला जाता। इसमें काफी समय लगता है। इस दौरान दूसरे कई स्तरों पर भी वह जांच से होकर गुजरता है, इसलिए किसी एक व्यक्ति द्वारा गड़बड़ी किया जाना संभव भी नहीं है।

पुलिस ने दूध में मिलाए जाने के लिए लाए गए सोडियम सल्फेट को पकड़ा था, क्या यह कभी प्लांट में जांच में पकड़ा गया?
जवाब- नहीं, सांची में दूध की जांच की आधुनिक मशीनें हैं जो दूध की हर जांच कुछ ही सेकंड में कर देती हैं। इसमें सोडियम लेवल जैसे कई टेस्ट एक साथ सामने आ जाते हैं। लेकिन अब तक कभी भी सांची प्लांट में सोडियम सल्फेट दूध में नहीं पाया गया है। हमारे यहां जांच के लिए सैंपल भी लैब के साथ ही प्रोसेस डिपार्टमेंट में रखे जाते हैं, जिन्हें रेंडमली चेक किया जाता है।

सांची प्लांट में नाइट्रोजन कंटेंट, एंटीबायोटिक, ऑक्सीटोसिन जैसी चीजों की जांच की क्या व्यवस्था है?
जवाब- मैं इस बारे में अभी नहीं कह सकता हूं, यह मेरी जानकारी में नहीं है। लेकिन मैं अपनी टीम से जानकारी लेकर आपको इसका जवाब कल दूंगा। यह सही है कि ऑक्सीटोसिन से पशुओं में दूध बढ़ता है, लेकिन यह कुछ समय के लिए होता है। सांची रोजाना कोल्हापुर यूनियन को 23 हजार लीटर दूध सप्लाय करता है। अगर गड़बड़ होती तो हमारी मशीन तो पकड़ेगी ही कोल्हापुर भी दूध नहीं लेगा।

इस घटना के बाद मिल्क फेडरेशन ने सुरक्षा के कई नए मानक तय किए हैं उनकी क्या स्थिति है, टैंकरों पर कैमरे भी लगवाने की बात कही गई थी, उसकी क्या स्थिति है?जवाब- घटना के बाद हम सुरक्षा के हर संभव प्रयास कर रहे हैं। हमने घटना के दिन देखा था कि टैंकर के ऊपर लगे ढक्कन को सील की दूसरी ओर से काटा गया था। इसलिए हमने चार सील लगाने की व्यवस्था लागू कर दी है। हम टैंकरों की मॉनिटरिंग के लिए जीआईएस फेंसिंग की व्यवस्था भी कर रहे हैं। इसमें भी हम सिर्फ जरूरी अलर्ट ही लेंगे, ताकि गड़बड़ी होने पर तुरंत उसे देखा जा सके। ये अलर्ट टैंकर के मार्ग से हटने, ढक्कन खुलने, टैंकर के एक स्थान पर ज्यादा समय रुकने और डीजल टैंक का ढक्कन खुलने पर आएंगे। कैमरों को लगाए जाने का काम अभी नहीं कर रहे हैं, क्योंकि कैमरे टैंकरों पर ही लगेंगे, जिनका रिकॉर्ड भी टैंकर पर ही होगा। उससे छेड़छाड़ टैंकर चालक के लिए आसान होगी।

अगर सांची प्लांट में सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं और वहां कभी कोई गड़बड़ी या केमिकल मिला दूध नहीं आया तो कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों की?
जवाब- घटना सामने आने पर हमारी टीम ने पूरे मामले की जांच की। घटना की गंभीरता को देखते हुए उस प्रोसेस से जुड़े लोगों को हटाया गया है। कुछ लोग यह भी चाह रहे थे कि इस घटना के बाद मुझे ही निलंबित कर दिया जाए, लेकिन हमारा सिस्टम इतना पारदर्शी है कि उसी की वजह से मैं अब तक यहां हूं। हमारे हिसाब से कर्मचारियों की कोई गलती नहीं है। अब मामला कोर्ट में है। अगर वहां से क्लीनचिट मिलती है तो उन्हें वापस रखा जाएगा।

निकाले गए कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने दूध में नमक होने और टैंकर की सील टूटी होने की शिकायत की थी, लेकिन उस ओर ध्यान नहीं दिया गया, ऐसा क्यों?
जवाब-
मुझे ऐसी किसी शिकायत की जानकारी नहीं है। हमारे पास सारा रिकॉर्ड मौजूद है। आप कभी भी आकर उसे चेक कर सकते हैं। कर्मचारियों द्वारा दूध को चखकर देखा जाता है, लेकिन लैब की रिपोर्ट के आधार पर ही प्रोसेस की जाती है। उस दिन और उससे पहले भी टैंकरों से सभी सील मिलने का भी पूरा रिकॉर्ड मौजूद है।

जिन गांवों में दूध की खरीदी की जाती है, क्या वहां किसानों द्वारा मिलावटी दूध बेचा जाता है, अगर ऐसा है तो अब तक ऐसे कितने मामले पकड़े जा चुके हैं?
जवाब-
सांची द्वारा गांवों में सहकारी संस्थाओं से दूध की खरीदी की जाती है। वहां किसान जो दूध लाते हैं उसमें ज्यादा से ज्यादा शकर की मिलावट की जाती है। यह मिलावट भी आसानी से पकड़ी जाती है। ऐसे कितने मामले पकड़े जा चुके हैं, रिकॉर्ड से निकलवाकर दे पाऊंगा।

Sanchis CEO says - I am standing i.e. milk is pure
X
Sanchis CEO says - I am standing i.e. milk is pure
Sanchis CEO says - I am standing i.e. milk is pure
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..