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सीनियर एडवोकेट अब अंकों के आधार पर होंगे मनोनीत, आवेदन करना अनिवार्य

सीनियर एडवोकेट बनने के लिए अब वकीलों को आवेदन करना होंगे। उनका साक्षात्कार होगा, अंक दिए जाएंगे।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 27, 2017, 03:23 AM IST

सीनियर एडवोकेट अब अंकों के आधार पर होंगे मनोनीत, आवेदन करना अनिवार्य

इंदौर .सीनियर एडवोकेट बनने के लिए अब वकीलों को आवेदन करना होंगे। उनका साक्षात्कार होगा, अंक दिए जाएंगे। एक हाईपावर कमेटी उनके पर नाम पर विचार करेगी। एकमत हुए तो सीनियर एडवोकेट मनोनीत हो पाएंगे। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने एक सीनियर एडवोकेट की जनहित याचिका पर सीनियर एडवोकेट मनोनीत करने के लिए गाइड लाइन बनाई है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस रोहिंगन फाली नरीमन, जस्टिस नवीन सिंन्हा की बेंच ने सीनियर एडवोकेट इंद्रा सिंह की याचिका पर यह फैसला दिया है। देशभर की हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस गाइड लाइन के आधार पर ही अब वकीलों को सीनियर होने का तमगा मिल सकेगा।

अंकों पर खरा उतरना होगा
- सुप्रीम कोर्ट ने गाइड लाइन में अंक व्यवस्था भी की है। 10 से 20 वर्ष की प्रैक्टिस होने पर 10 अंक, 20 वर्ष से ज्यादा प्रैक्टिस होने पर 20 अंक, हाई कोर्ट में बहस और पैरवी करने पर 40 अंक, आवेदक के जजमेंट प्रकाशित होने पर 15 अंक दिए जाएंगे। सौ फीसदी अंक मिलने पर ही उनका नाम कमेटी के पास भेजा जाएगा।

अप्रासंगिक है मनोनयन
अधिवक्ता आनंद अग्रवाल का कहना है कि सीनियर एडवोकेट बनाना है तो 30 वर्ष की प्रैक्टिस को आधार बनाना चाहिए। वैसे यह मनोनयन अब प्रासंगिक हो गया है। पहले सूचना क्रांति की कमी थी तो सीनियर एडवोकेट न्यायदृष्टांत बताने में मददगार साबित होते थे। अब ऐसी समस्या नहीं है। वैसे भी यह वकीलों में भेदभाव पैदा
करता है।

पहले ऐसा होता था
- इस गाइडलाइन के पहले तक ऐसा सिस्टम नहीं था। सामान्य तरीके से अनुभवी वकीलों के नाम संबंथित बेंच के जरिए मुख्यबेंच भेजे जाते थे। वहां से जांच पड़ताल के बाद मनोनयन कर दिया जाता था।

यह है मनोनयन की गाइडलाइन
- हाई कोर्ट में मनोनीत करने के लिए चीफ जस्टिस, महाधिवक्ता, दो वरिष्ठ जज और संबंधित बार काउंसिल का एक सदस्य कमेटी में रहेगा।
- एक सचिवालय भी बनाया जाएगा, जहां पर सीनियर एडवोकेट बनने का इच्छुक वकील आवेदन करेगा।
- सचिवालय यह देखेगा कि वकील का आचरण कैसा है। हाई कोर्ट में उपस्थिति कितनी है। उनके कितने जजमेंट न्यायदृष्टांत के रूप में प्रकाशित हुए हैं।
- सचिवालय स्क्रूटनी करने के बाद नाम कमेटी के पास भेजेगा। कमेटी नामित करने के लिए गुप्त मतदान नहीं कर सकेगी। नाम पर सहमति बनने के बाद ही उसे मनोनीत किया जा सकेगा।

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