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बच्चों की यूनिट में बताया था आग का खतरा, स्मोक अलार्म तक नहीं लगाए

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अस्पताल तो नहीं गए लेकिन घटना की जांच के आदेश दे गए।

Danik Bhaskar | Nov 25, 2017, 07:15 AM IST

इंदौर . एमवाय अस्पताल की दूसरी मंजिल पर जिस सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट में आग लगने से 47 नवजात बच्चों की जान पर बन आई थी, उसे एक साल पहले फायर ब्रिगेड के तत्कालीन एसपी राजेश सहाय ने फायर प्रोन एरिया बताया था। यानी, आग लगने की आशंका ज्यादा। हैवी इलेक्ट्रिकल लाइन होने के कारण फायर फाइटिंग सिस्टम को अपडेट करने के लिए कहा था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इन बातों को गंभीरता से नहीं लिया। वहीं एमवाय से कुछ ही दूर नेहरू स्टेडियम में शुक्रवार को एक कार्यक्रम में शामिल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अस्पताल तो नहीं गए लेकिन घटना की जांच के आदेश दे गए।

- इंदौर आए सीएम ने कहा कि घटना गंभीर है और इसकी जांच तीन सदस्यीय कमेटी कर तीन दिन में रिपोर्ट देगी। इस मामले पर अपर मुख्य सचिव (एसीएस) चिकित्सा शिक्षा राधेशयाम जुलानिया नजर रखेंगे। हालांकि शाम होते-होते कमेटी दो सदस्यीय रह गई और इसमें एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर के पूर्व डीन डॉ. अशोक वाजपेयी और पीडब्ल्यूडी की इलेक्ट्रिक विंग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर एमके शुक्ला को शामिल करने के आदेश जारी हुए। बताया जा रहा है कि कमेटी शनिवार से जांच शुरू कर सकती है। वहीं, एसएनसीयू को सील कर दिया गया।
- झुलसी बच्ची की मौत कार्डियक अरेस्ट से होने का दावा, डीएनए भी होगा : कबीटखेड़ी के जिस व्यक्ति को झुलसी हुई मृत बच्ची का पिता बताया जा रहा है, उसने शव देखते ही उसे पहचानने से इनकार कर दिया। पहचान के लिए अब डीएनए जांच करवाई जाएगी। अस्पताल का यह भी कहना है कि मौत आग लगने से पहले ही हो गई थी। वहीं, एमजीएम फोरेंसिक विभाग ने बच्ची की शाॅर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पुलिस काे सौंपी। सूत्रों के अनुसार इसमें दम घुटने से मौत की आशंका से इनकार किया गया है। बच्ची की मौत कार्डियक अरेस्ट से होना बताई गई।

मॉक ड्रिल में बताई खामी के बावजूद...
- कोई फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं है। अग्निशमन यंत्र के भरोसे व्यवस्था है। कोई हाईड्रेंट सिस्टम भी नहीं।
- एसएनसीयू में स्मोक अलार्म नहीं था।
- यहां न तो जरूरी क्षमता वाले फायर एक्सटिंग्युशर थे और न उन्हें चलाने वाले एक्सपर्ट।
- जो एक्सटिंग्युशर थे, वह आधा मिनट की कैपेसिटी वाले थे जिनसे आग को काबू करना संभव नहीं था।

पहले जांच ही नहीं की कि बिजली लाइनें
लोड सहने लायक हैं या नहीं

- अस्पताल में उपकरणों और मशीनों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिसके कारण बिजली का लोड भी बढ़ता जा रहा है। फिर भी अस्पताल प्रशासन ने यह जांच करने की जहमत नहीं उठाई कि बिजली लाइनें यह लोड झेलने लायक हैं या नहीं?

जवाबदेह : घटना से पहले जरूरी कदम नहीं उठाए, अब कमरे में कर लिया खुद को बंद

संभागायुक्त- संजय दुबे

एमजीएम कॉलेज की एक्जीक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन के नाते सभी काम के लिए इनकी मंजूरी जरूरी।
किया क्या - आग लगने की दशा में एक्जीक्यूटिव कमेटी ने कोई बड़ा फैसला नहीं लिया।
घटना के बाद - अस्पताल जाकर हालात तक नहीं जानें।
सीधी बात - बार-बार घटनाएं हो रही हैं। क्या वजह?
- इतने बड़े अस्पताल में लगातार मेंटनेंस करना अब बहुत मुश्किल हो रहा है।
बिजली का लोड बढ़ रहा है। वायरिंग नहीं बदली गई?
- वायरिंग ज्यादा पुरानी नहीं है। इतनी बड़ी बिल्डिंग है। जितनी राशि आती है, उससे काम हो रहे हैं।

घटना के लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं?
- सीएम ने जांच कमेटी बना दी है। अभी कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।

एमवाय अधीक्षक- डॉ. वीएस पाल

- अस्पताल पर नजर रखना और मरीजों को सभी व्यवस्थाएं मुहैया करवाना।
- किया क्या - लगातार अस्पताल का दौरा करते हैं, लेकिन मॉनिटरिंग में चूक ।
- घटना के बाद - बंद कमरे में बैठकें की। प्रशासनिक अधिकारियों के फोन भी नहीं उठाए।
सीधी बात - घटना में आपकी तरफ से चूक हुई है?
- किसी भी तरह से चूक नहीं हुई। यह घटना कभी भी हो सकती है।
कभी पीडब्ल्यूडी ने बताया था क्या वायरिंग पुरानी है?
- नहीं, पीडब्ल्यूडी लगातार मॉनिटरिंग करता है।

मेडिकल कॉलेज डीन - डॉ. शरद थोरा

- एकेडमिक व्यवस्था देखना और अधीक्षक के साथ मिलकर अस्पताल की कमियां दूर करना।
- किया क्या - पीडब्ल्यूडी द्वारा की जा रही मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े नहीं किए।
- घटना के बाद - अस्पताल पहुंचे और अधीक्षक के साथ बंद कमरे में बैठक की।
- सीधी बात - एमवाय की घटना में चूक हुई है‌?
- डीन होने के नाते मेरा काम एकेडमिक है। अस्पताल देखना मेरा काम नहीं है।
- घटना हुई है तो आपकी भी जिम्मेदारी बनती है?
- नहीं, अस्पताल की पूरी जिम्मेदारी अधीक्षक की होती है। मैं सिर्फ उनकी मदद करता हूं।