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जिनके रिटेनर बनाकर लाइसेंस जारी किए वे बोले- हमने बनवाए ही नहीं

कुछ के लाइसेंसधारी मिले भी तो उन्होंने नागालैंड से लाइसेंस बनवाने की बात से इनकार कर दिया।

Danik Bhaskar | Nov 30, 2017, 06:36 AM IST

इंदौर. नागालैंड से शस्त्र लाइसेंस बनवाने वालों के खिलाफ क्राइम ब्रांच की टीम ने दीमापुर से कई अहम सुराग जुटा लिए। गिरोह के सरगना प्रदीप सागवान ने जिन लोगों को रिटेनर बताकर शस्त्र लाइसेंसधारी बनाया था। वे फर्जी निकले हैं। उनका भी कोई रिकॉर्ड नगालैंड प्रशासन के पास नहीं मिला है। वहीं कुछ के लाइसेंसधारी मिले भी तो उन्होंने नागालैंड से लाइसेंस बनवाने की बात से इनकार कर दिया।

- एएसपी क्राइम ब्रांच अमरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि इन्हें गवाह बनाया है। जिन पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया, उन पर धारा 467, 468 और 471 (कूट रचित दस्तावेजों से फर्जीवाड़ा) भी बढ़ाई है। वहीं लाइसेंस पर जिन्होंने रजिस्टर्ड बंदूकघरों से हथियार खरीदे हैं, उन पर भी आर्म्स एक्ट की धारा में केस दर्ज किया जाएगा।

नागालैंड में किसी का पता फर्जी निकला तो किसी का रिकॉर्ड ही नहीं मिला

- आरोपी अमरदीप सिंह खैरा के लाइसेंस की दीमापुर में टीम ने जांच की तो पता चला उसको हरियाणा के रेवाड़ी गांव के समृद्ध किसान प्रदीप पिता अजीत सिंह निवासी ग्राम रघुवर थाना जतुसाना का रिटेनर (शस्त्र उठाने वाला) बनाकर शस्त्र लाइसेंस धारी बताया था। लेकिन जब टीम किसान प्रदीप के पास पहुंची तो उसने कहा कि नगालैंड से न उसने कभी लाइसेंस बनवाया और हथियार खरीदे।
- कोर्ट से जमानत पर छूटे नवल किशोर गर्ग का लाइसेंस नागालैंड के रिकॉर्ड में गोपाल पिता भगवान सिंह यादव निवासी बाल पनगांव मधुबनी बिहार के नाम पर बतौर शस्त्र लाइसेंस धारक के रूप में पाया गया। बिहार पहुंची टीम को उक्त पते पर कोई गोपाल नहीं मिला।
- आरोपी जगदीश चौधरी का शस्त्र लाइसेंस दुलाल पिता गोपाल देव निवासी ओल्ड डेली मार्केट डीटीसी नगालैंड का निकला। यह पता भी फर्जी निकला।
- आरोपी संदीप सोनगरा के मामले में जानकारी मिली कि उसे जिसका रिटेनर बनाकर लाइसेंसी बताया गया, वह लाइसेंस वर्ष 1990 में बनाया गया था, लेकिन उसका रिकॉर्ड ही नगालैंड प्रशासन के पास नहीं मिला। 30 जनवरी 2016 को इसी लाइसेंस को रिन्यू करवाकर संदीप खुद शस्त्र लाइसेंसी बन गया था।

रैकेट 27 साल से सक्रिय पर कोई कार्रवाई नहीं

- एएसपी चौहान ने बताया कि फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनवाकर हथियार खरीदवाने वाला यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह 1990 से नागालेंड में सक्रिय है। लेकिन वहां की सरकार ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई है। गिरोह ने मप्र, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में फर्जी लाइसेंस बनवाकर हथियार खरीदवाए हैं।

गृह मंत्रालय और सीएम को भी भेजी जानकारी

- मामले में नगालैंड सरकार से सहयोग न मिलने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, मुख्यमंत्री के साथ राज्य गृहमंत्री को भी मामले की पूरी जानकारी भेजी है। इस मामले में कई बड़ी एजेंसी इस जांच में जुट गई हैं।