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आईजी को बच्चों के सामने क्यों बांधनी पड़ी आंखों में पट्टी

आईजी को बच्चों के सामने क्यों बांधनी पड़ी आंखों में पट्टी

Dainik Bhaskar

Nov 15, 2017, 10:35 AM IST
IG became a child with children by placing a bar in the eye
भोपाल। आंखों में पट्टी बांधकर बच्चों के साथ मटकी फोड़ खेलते हुए जिन्हें आप देख रहे हैं, वह कोई और नहीं, भोपाल रेंज के आईजी जयदीप प्रसाद हैं। आईजी जयदीप प्रसाद टीटी नगर के एक शासकीय स्कूल में बच्चों से मिलने पहुंचे थे। स्कूल के बच्चे उस समय हैरान रह गए, जब आईजी ने उनके साथ मटकी फोड़ खेलने की इच्छा जता दी। फिर क्या था, सारे बच्चे खुशी उछलने लगे।

- आईजी जयदीप प्रसाद ने बच्चों से कहा कि वे भी आंखों पर पट्टी बांधकर मटकी फोड़ ना चाहते हैं। फिर क्या था बच्चे भी काफी खुश हो गए और उन्होंने तुरंत ही आईजी की आंखों पर पट्टी बांधना शुरू कर दिया। जब बच्चों को यकीन हो गया कि आई जी साहब को कुछ नहीं दिख रहा है तो उन्होंने उन्हें गोल गोल घुमा कर दूसरी दिशा में छोड़ दिया।
- लेकिन आईजी साहब ने सही दिशा पकड़ी और वह धीरे-धीरे सही मार्ग पर जाने लगे, तभी अचानक उनका पैर गलत दिशा की ओर मुड़ गया। लेकिन बच्चों ने आवाज लगाकर उन्हें इसकी जानकारी दे दी । आई जी साहब ने समझदारी दिखाते हुए सही रास्ता चुना और वे मटकी तक बड़ी आसानी से पहुंच गए और मटकी फोड़ दी। बच्चे उत्साह में खुशी से चिल्लाने लगे।
जब बच्चे बन गए आईजी जयदीप प्रसाद
- आईजी जयदीप प्रसाद ने कहा कि बच्चों के बीच आकर ऐसा लगता है कि हम भी बच्चे हो गए हैं। जब आज मैंने बच्चों के साथ आंखों पर पट्टी बांधकर मटकी फोड़ में हिस्सा लिया तो बचपन की यादें ताजा हो गई । पुलिस का इस तरह बच्चों के बीच जाना और बच्चों के साथ खेलना एक सुखद माहौल पैदा करता है।
बच्चे पुलिस को अंकल की तरह नहीं देखें
- आईजी जयदीप प्रसाद ने कहा कि स्कूल में आने से उनके बचपन के दिन याद आ रहे हैं । उन्हें बच्चों के बीच आकर बेहद अच्छा लगा। उन्हें इस बात की भी खुशी है कि बच्चों ने उन्हें पुलिस अंकल की तरह नहीं लिया , बल्कि वे मुझे एक आम नागरिक की तरह ही देख रहे थे।
- बच्चों में पुलिस के प्रति किसी भी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए। पुलिस तो बच्चों की मित्र होती है । हमने बच्चों के बीच आकर भी यही मैसेज देने की कोशिश की है। हमने बच्चों को यह भी बताया कि पुलिस हमेशा आपके साथ है परेशानी में पड़ने पर डायल-100 या 1090 पर कॉल कर सकते हैं। पुलिस सभी छात्र-छात्राओं की मदद के लिए तत्पर है। ​
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