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अफसरों ने झिरी के पानी का लिया सैंपल, बांटी क्लीनवेट दवा, अब स्थिति सामान्य

पलसूद के समीपस्थ ग्राम बोरी के जामन्या फल्या में झिरी का पानी पीने से 6 परिवारों के 38 लोगों को उल्टी-दस्त हुए थे।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 21, 2018, 04:40 AM IST

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    पलसूद के समीपस्थ ग्राम बोरी के जामन्या फल्या में झिरी का पानी पीने से 6 परिवारों के 38 लोगों को उल्टी-दस्त हुए थे। दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग और पीएचई विभाग की टीम ने गांव में फल्या का दौरा किया। अधिकारियों ने बताया अब स्थिति सामान्य है। दूसरे दिन बुधवार को कोई भी उल्टी-दस्त का नया मरीज सामने नहीं आया। वहीं लोगों को दूषित पानी पीने से बचाने के लिए पीएचई विभाग ने क्लीनवेट दवा का फल्या में वितरण किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पीड़ित मरीजों की चेकअप किया, जो अब सभी स्वस्थ है।

    जिला महामारी नोडल अधिकारी डॉ. जीएस बारेला, महामारी अधिकारी डॉ. लक्ष्मी माहोर ने बताया स्थिति अब सामान्य है। बुधवार को टीम ने दौरा कर सभी पीड़ित मरीजों की जांच की। इसके अलावा गांव के लोगों को बताया कि पीने के पानी में क्लीनवेट दवा डालकर ही इसका उपयोग करें। उन्होंने बताया फल्या में दोबारा से बीमारी न फैले इसके लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों व पीएचई विभाग ने पानी के सैंपल लिए। पीएचई विभाग अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने में 24 घंटे का समय लगता है। इसलिए रिपोर्ट गुरुवार को आएगी।

    झिरी का पानी पीने से 38 लोग आए थे उल्टी-दस्त की चपेट में

    झिरी के पानी का सैंपल लेते पीएचई विभाग अधिकारी।

    लोगों को क्लीनवेट दवा डालने की प्रक्रिया समझाते अधिकारी।

    बारिश के दिनों में दूषित हो जाता है पानी

    पीएचई विभाग के सब इंजीनियर शिवनारायण छापरिया ने बताया कुछ दिन पहले इस क्षेत्र में बारिश हुई थी। उन्होंने बताया बारिश का पानी पहाड़ी इलाकों से बहकर झिरी में मिलता है। इसके चलते झिरी का पानी भी दूषित हो जाता है। पहाड़ी इलाकों के पत्थरों से टकराकर झिरी तक पहुंचने वाले पानी में बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ जाती हैै। इस कारण से ही पानी दूषित हो जाता है। इसे पीने से लोग बीमार हो जाते हैं।

    झिरी का ही पीना पड़ेगा पानी

    फल्या तक पहुंच मार्ग नहीं होने से यहां के लोगों को झिरी का ही पानी पीना पड़ेगा। पीएचई अधिकारियों ने बताया फल्या से तीन किमी दूर चार पहिया वाहन को खड़ा करना पड़ता है। यहां से फल्या तक पैदल जाना पड़ता है। इसके अलावा यहां पर अन्य कोई जलस्रोत भी मौजूद नहीं है। इससे फल्या में पानी सप्लाय किया जा सके। टंकी रखकर पानी की सप्लाय की जा सकती थी लेकिन फल्या तक पानी पहुंचाने के लिए कोई पहुंच मार्ग ही नहीं है। इसलिए यहां के लोगों को पानी उबालकर और दवा डालने के बाद ही पीने की सलाह दी गई है।

    ये लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित

    स्वास्थ्य विभाग जानकारी के अनुसार फलिया के रुकमा गोखरिया, कमली भाया, दुरली खेबड़ा, खेबड़ा गोखरिया, रीता रणछोड़, अनिता रणछोड़, हसिया रणछोड़, सुनील खेबड़ा, निरमा गुदा, सुनील गुदा, रवीना गुदा, सविता गुदा, सुनीता गुदा, व्यापारिया नगरिया, द्वारकी नगरिया, जनादि सुरेश, रेसलि श्याम सहित अन्य लोग पीड़ित थे। अब इन सभी की हालत ठीक है।

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