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निंबार्कपीठ के आचार्य के साथ आई भगवान सर्वेश्वर की 5 हजार साल पुरानी चने की दाल के आकार की मूर्ति

निंबार्कपीठ के आचार्य श्रीजी महाराज श्यामशरणदेव का नगर आगमन हुआ। नगर में आचार्य श्री का भक्तों ने भव्य स्वागत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 11, 2018, 05:20 AM IST

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    निंबार्कपीठ के आचार्य श्रीजी महाराज श्यामशरणदेव का नगर आगमन हुआ। नगर में आचार्य श्री का भक्तों ने भव्य स्वागत किया। आचार्य श्यामशरणदेव के साथ 1510 साल पुरानी सर्वेश्वर भगवान की दाल के आकार की मूर्ति भी है। इसमें राधा-कृष्ण का युगल स्वरूप दर्शाया गया है। इसको मैग्नीफाइंग ग्लास के माध्यम से ही देखा जा सकता है। यह मूर्ति 600 साल से निंबार्कपीठ के सालेमाबाद में स्थित है। 20 साल से इस मूर्ति को जेड प्लास सुरक्षा में रखा गया है। मूर्ति की सेवा में 20 सेवादार 24 घंटे तैनात रहते हैं। आचार्य मूर्ति को भोग बनाकर स्वयं लगाते हैं। साथ ही पूजा करते हैं।

    मूर्ति का एतिहासिक महत्व होने से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज है। पौराणिक कथा अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं नारद देव को यह मूर्ति दी थी। उसके बाद ऋणियों, फिर निंबार्कपीठ के प्रथम आचार्य के बाद आज तक निंबार्कपीठ में विद्यमान है। आचार्य श्री ने रात्रि विश्राम समाजसेवी बाबूलाल तायल के यहां किया। सुबह आचार्य श्री ने शिष्यों को दर्शन देकर आशीर्वाद दिया। पल्लव तायल ने बताया यह मूर्ति हमेशा आचार्य श्री के साथ ही रहती है। आचार्य सामेमाबाद से पाटोत्सव के लिए मुंगीपीठ प्रस्थान कर रहे हैं। इस दौरान रास्ते में भक्तों द्वारा अनुरोध करने पर धर्मप्रचार के लिए रुके हैं। यहां से दोपहर के बाद मुंगीपीठ के लिए आचार्य श्री रवाना हो गए। मूर्ति का आकार इतना लघु है कि तुलसी के पत्ते के नीचे ढक जाती है।

    मैग्नीफाइंग ग्लास से भक्तों को कराए मूर्ति के दर्शन-आचार्य श्री ने शर्वेश्वर भगवान की मूर्ति भक्तों के दर्शन के लिए रखी। इसे कुछ मिनटों के लिए मैग्नीफाइंग ग्लास के माध्यम से भक्तों के दर्शन करवाए गए। आचार्य ने बताया चने की दाल के बराबर आकार की इस मूर्ति में राधा-कृष्ण का युगल स्वरूप है। इस दिव्य मूर्ति के दर्शन मात्र से मानव के सभी पाप कट जाते हैं। अपार शांति का अनुभव होता है।

    आचार्य श्यामशरणदेव का स्वागत करते भक्तजन।

    भगवान सर्वेश्वर की मूर्ति के दर्शन करते भक्तजन।

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